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रुप बदलने लगा है कोरोना वायरस धीरे धीरे

  • मार्च के मध्य से नजर आया है बदलाव

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    इससे संक्रमण के अधिक फैलने का खतरा
  • दवा बनाने में ध्यान देना होगा इस पर भी
  • वैश्विक महामारी को लेकर जारी होगी चेतावनी
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः रुप बदलने की वजह से अब कोरोना वायरस का नया खतरा वैज्ञानिकों को

चिंतित कर रहा है। इस शोध में जुटे वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि मार्च महीने के मध्य से

यह वायरस अपने आप में तब्दीली कर रहा है। इस बदलाव की वजह से यह आगे और भी

खतरनाक हो सकता है। एक एक कर नमूनों का विश्लेण करने वाली टीम ने अब तक 14

ऐसे बदलावों को दर्ज किया है। इसके तहत स्पाइक डी614जी प्रोटिन की भी पहचान हुई है,

जो इस बीमारी को और खतरनाक बना सकता है और शायद यह यूरोप एवं अमेरिका में

पहले से ही लोगों के बीच फैल चुका है।

लॉस एलॉमोस प्रयोगशाला (न्यू मैक्सिको) के शोधकर्ताओं ने पाया है कि वायरस के रुप में

यह बदवाल मार्च महीने के मध्य से दर्ज किया गया। उसके पहले कोरोना संक्रमण से

पीड़ित रोगियों में ऐसा नहीं देखा गया था।

जिस नये स्पाईक प्रोटिन के बारे में चिंता व्यक्त की गयी है उसे सबसे पहले फरवरी माह

में दर्ज किया गया था। चीन के वुहान शहर को अपनी चपेट में लेने वाले कोविड 19 में इस

प्रोटिन के होने का पता नहीं चल पाया था। वुहान शहर में पिछले वर्ष यह महामारी के तौर

पर फैला था और पूरा शहर ही इसकी चपेट में आने की वजह से आर्थिक तौर पर तहस

नहस हो चुका है। लेकिन वहां से दुनिया के अन्य इलाकों में फैलने के पहले दौर में भी इस

बदलाव का पता नहीं चल पाया था।

रुप बदलने का यह खतरा नये मरीजों में दिख रहा है

इस शोध दल के नेता और इस संबंध में प्रकाशित शोध प्रबंध के मुख्य रचनाकार डॉ बेट्टे

कोरवे ने कहा कि जब वायरस अपना रुप बदलने लगता है तो यह स्थानीय स्तर पर अन्य

बीमारियों को अपने साथ जोड़ता चला जाता है। इसी वजह से वायरस का रुप बदलना

ज्यादा खतरनाक है। इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए शोध वैज्ञानिकों को छह हजार नमूनों

का अलग अलग विस्तारित विश्लेषण करना पड़ा है। इसी विश्लेषण से अब यह पता चल

रहा है कि बदलाव की यह प्रक्रिया मार्च माह से मध्य से तेज हो रही है। इसकी वजह से अब

यह वायरस अधिक तेजी से फैल भी सकता है क्योंकि अब तक अनेक इलाकों में लोग

बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेसिंग का सही अर्थों में पालन नहीं कर रहे

हैं। वरना अब तक इस पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका होता। शोध दल के लोग इस

बात को स्वीकार करते हैं कि इस किस्म की जानकारी को सार्वजनिक करना लोगों को और

डराने जैसा ही है। लेकिन स्पाइक प्रोटिन की वजह से लोगों को सतर्क कर देना भी उनकी

जिम्मेदारी बनती है।

दवा और वैक्सिन के लिए भी इस पर अब ध्यान देना होगा

अनुसंधान से जुड़े लोग यह मानते हैं कि इस कोरोना वायरस को रोकने के लिए कार्यरत

वैज्ञानिकों को नये सिरे से इस बदलाव पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि अबतक के शोध में

यह बात सामने नहीं आ पायी थी। इस बारे में लोगों की जानकारी बढ़ाने के लिहाज से

बताया गया है कि दरअसल स्पाइक प्रोटिन की भूमिका उस हुक की तरह है जो इंसान के

अंदर वायरस के प्रवेश का रास्ता बनाता है। साथ ही यह वायरस के ऊपर होने वाले हमलों

को भी विफल करता है। एलएनएल की रिपोर्ट के मुताबिक यह दो हिस्सों में काम करता

है। पहला तो रिसेप्टर यानी वायरस को बसने लायक माहौल प्रदान करता। दूसरे में यह

वायरस को अन्य कोषों तक प्रवेश में मदद करता है।

कोविड के ईलाज से जुड़े वैज्ञानिकों को इस बदलाव की वजह से अपने वैक्सिन अथवा दवा

में भी इस नये स्वरुप को नियंत्रित करने की विधि को शामिल करना पड़ेगा ताकि दवा का

इस्तेमाल होने पर रुप बदलने वाला वायरस इस अवस्था में भी काबू में आ सके और

दुनिया में तबाही मचाने वाली इस बीमारी को रोका जा सके।


 

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