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चीन की सेना ने अंततः अपना डेरा डंडा हटाना प्रारंभ किया

  • चीन के अनेक वाहन पीछे लौटाये गये

  • प्योंगयांग झील पर गतिरोध कायम

  • दो घंटे तक चली वीडियों कांफ्रेंस

  • पर्दे के पीछे फिर अजीत डोभाल

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चीन ने अंततः गलवान घाटी से अपने अस्थायी शिविरों और बंकरों को हटाना

प्रारंभ कर दिया है। वैसे भारतीय सेना कीतरफ से यह स्पष्ट किया गया है कि चीन की

सेना की इस कार्रवाई के बाद वे भी पीछे हटेंगे। लेकिन इस बीच वे लगातार चीन के पीछे

हटने पर संतुष्ट होने के बाद ही पीछे हटेंगे। तय हुआ है कि दोनों देशों की सेना अपनी

अपनी वर्तमान स्थिति से एक किलोमीटर पीछे चली जाएंगी। भारतीय सेना अगले तीन

दिनों तक वहां का जायजा लेकर संतुष्ट होने के बाद ही अब पीछे हटेगी। गलवान क्षेत्र में

अचानक आगे बढ़ते हुए चीनी सेना ने वहां अस्थायी निर्माण और अपने तंबू लगा दिये थे।

इसके बाद से ही वहां तनाव उपजा था। इसी तनाव की वजह से बीस भारतीय सैनिकों की

मौत हुई थी जबकि चीन ने अपनी तरफ से मारे गये सैनिकों के बारे में अब तक कोई

जानकारी नहीं देने के बाद भी सिर्फ यह स्वीकार किया है कि भारतीय सैनिकों के साथ

भिड़ंत में उसकी सेना को भी नुकसान हुआ है।

चीन ने 30 जून की बैठक के फैसले पर अमल किया

मिली जानकारी के मुताबिक गत 30 जून को चुसूल में हुई लंबी बैठक में हुई चर्चा के बाद

शांति का यह रास्ता निकाला गया है। तीस जून की इस सैनिक कमांडरों की बैठक में

भारतीय सेना की तरफ से 14 कॉपर्स कमांडर ले. जनरल हरिंदर सिंह और चीनी सेना की

तरफ से दक्षिण जिनजियांग के जिला सैनिक मेजर जनरल ल्यू लिन शामिल हुए थे।

इसमें यह सहमति बनी थी कि जिन इलाकों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई हैं, वहां

से सैनिकों की वापसी कर ली जाएगी। इसमें खास तौर पर गलवान घाटी के अलावा घोघरा

हॉट स्पिंग्स और भारतीय सेना के पेट्रोलिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 ए का इलाका है। यहां

पहुंची सूचनाओं के मुताबिक चीन के अधिकांश वाहन वाकई इस इलाके से पीछे चले गये

हैं। लेकिन भारतीय सेना वापसी की तैयारियों को पूरा कर लेने के बाद भी वहां नजर रखे

हुए है। इसके बाद भी अब तक पेंगांग सो के इलाके में अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

यहां की झील पर दोनों देशों की सेना ने अपनी अपनी किलेबंदी मजबूत कर ली है।


इस पूरे इलाके में हालात बिगड़ने के बाद पूरी भारत चीन सीमा पर सैनिक सतर्कता पूर्ण

तैयारी की हो चुकी थी। वैसे समझा जा रहा है कि अब दो स्थानों पर सेना के पीछे हटने के

बाद अब तनाव वाकई कम होगा।


चीनी विदेश मंत्रालय ने माना की अजीत डोभाल ने बात की

इस बीच अंदरखाने से यह जानकारी आयी है कि इस गतिरोध को समाप्त करने में भी

प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भूमिका रही है। श्री डोभाल ने इस मुद्दे

पर चीन के विदेश मंत्री वांग येई से लंबी बात की थी। इस वार्ता को चीन के विदेश मंत्रालय

ने भी स्पष्ट किया है। इस बात-चीत के बाद ही सेना की वापसी की यह कार्रवाई प्रारंभ हुई

है। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों के बीच दो घंटे की वीडियो कांफ्रेसिंग की

बैठक हुई थी।


 

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