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सरकार द्वारा प्रायोजित जासूसी में आईफोन को भी निशाना बनाने का मामला




एपल कंपनी ने पेगासूस बनाने वाले के खिलाफ मामला किया

अदालत में मामला दायर कर दिया गया है

कई प्रमुख कंपनियों के साथ बैठक भी की है

देश की सरकारों को भी इसमें पार्टी बनाया गया

कैलिफोर्नियाः सरकार द्वारा प्रायोजित जासूसी में लोगों की निजता का हनन होने के बाद अब पेगासूस एपल कंपनी के निशाने पर आ गयी है। वैसे बता दें कि लोगों की निजता के मामले में एपल का अपना निजी मानदंड बहुत कड़ा है।




इसी वजह से जब इस बात का पता चला कि कई देशों की सरकारों ने एपल के फोन में भी पेगासूस स्पाईवेयर भेजे थे तो तकनीकी बेइमानी की वजह से एपल ने यहां की अदालत में पेगासूस बनाने वाली कंपनी एनएसओ के खिलाफ यह मामला दायर कराया है। एनएसओ कंपनी का दावा है कि उन्होंने सिर्फ सरकारों को ही यह स्पाईवेयर बेचा है और उसका मकसद आतंकवादियों और अपराधियों पर नजर रखना है।

दूसरी तरफ यह स्पष्ट हो चुका है कि अनेक देश की सरकारों ने इस स्पाईवेयर का उपयोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए किया है और वैसे लोगों की निजता का हनन किया है, जिनका आतंकवाद या अपराध से कोई रिश्ता नहीं था।

इसी माह के प्रारंभ में अमेरिका ने पेगासूस बनाने वाली एनएसओ और उसकी सहयोगी दो कंपनियों को अपने देश की काली सूची में डाल दिया है। अब माइक्रोसाफ्ट, मेटा प्लेटफॉर्म (पहले का फेसबुक), गूगल के स्वामित्व वाले अल्फाबेट तथा सिस्को सिस्टम्स के साथ बैठक करने के बाद एपल ने एनएसओ के खिलाफ यह मामला दर्ज कराया है।

एपल की तरफ से औपचारिक तौर पर पेगासूस स्पाईवेयर की खिलाफ की गयी इस कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी गयी है। एपल की घोषणा के मुताबिक आइ फोन में इस किस्म की गैर कानूनी जासूसी करने वाले सभी पक्षों के खिलाफ वह कार्रवाई की मांग कर रही है।




सरकार द्वारा प्रायोजित जासूसी में सरकारों पर कार्रवाई की मांग

इसमें पेगासूस बनाने वाली कंपनी के साथ साथ उसका गलत इस्तेमाल करने वाले भी शामिल हैं। यानी एपल की शिकायत के मुताबिक इसके लिए उन देशों की सरकारों को भी जिम्मेदार माना जाना चाहिए, जिन्होंने इस स्पाईवेयर का गलत इस्तेमाल किया है।

पेगासूस का मामला पहले से ही जांच के दायरे में होने के बाद भी एपल की यह कार्रवाई अपने आप में नई है क्योंकि उसने तमाम देशों की सरकारों को भी इसमें दोषी मानते हुए कार्रवाई की मांग कर दी है।

एनएसओ की सफाई के बाद भी आईफोन बनाने वाली कंपनी का तर्क है कि किसी भी व्यक्ति की निजता का हनन चाहे वह सरकार की देखरेख में ही क्यों ना हो, गलत है और उसके लिए जिम्मेदार सभी पक्षों पर बराबर की कानूनी कार्रवाई की मांग इसी वजह से की गयी है।

 



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