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किसान बिल मामले में सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल ने भी भाजपा से नाता तोड़ा

  • सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल ने भी भाजपा से नाता तोड़ा

  •  मोदी सरकार को पहली बार लग रहा है अंदर से जोर का झटका

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः किसान बिल के मामले में मोदी सरकार और भाजपा के पहली बार अपने

सहयोगियों से झटका लगना प्रारंभ हो गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा के

सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल ने कल रात खुद को इस गठबंधन से अलग करने का

एलान कर दिया। शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को कहा कि उसने इस महीने के शुरू

में विवादास्पद तीन कृषि क्षेत्र के बिल पर तीखे मतभेदों के बाद सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को छोड़ दिया है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल

ने पहले कहा था कि उनकी पार्टी सत्तारूढ़ पार्टी के साथ संबंधों की समीक्षा कर रही है।

राजग में भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी है अकाली दल

अकाली दल ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से से किसानों के साथ खड़े होने और विधेयकों

पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध किया है। बता दें कि अकाली दल का आधार पंजाब के

किसान ही हैं. पार्टी ने एसएसपी को समाप्त करने की आशंकाओं के चलते नए कानूनों का

विरोध किया है और कहा है कि खेती में प्राइवेट प्लेयर छोटे और सीमांत किसानों के लिए

मुसीबत पैदा कर देंगे। अकाली दल नेता सुखबीर बादल ने कहा था कि संसद में अकाली

दल ने जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया उतना और किसी पार्टी ने नहीं उठाया। यहां तक

कि कांग्रेस भी विरोध करने में हमसे पीछे रही। बादल ने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेता

संसद से गायब थे। साथ ही सुखबीर बादल ने कहा कि हमें कैप्टन अमरिंदर से किसान

समर्थक होने का कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। इससे पहले कृषि बिल को लेकर देश भर में

जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब

के मुक्तसर में किसानों को संबोधित करते हुए कहा था , ‘अकालियों के एक बम ने मोदी

को हिला दिया।’ हरसिमरत कौर बादल ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से गुहार लगाई थी

कि वे कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर किए बिना लौटा दें।

किसान बिल के मामले में प्रकाश सिंह बादल का भी बयान जारी

शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल ने कहा था कि अकाली ऐसे किसी भी

कदम का समर्थन नहीं कर सकते जो किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाते हों। इसी के

चलते हरसिमरत कौर बादल ने तीन कृषि विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से

इस्तीफा दे दिया था।


 

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