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पूर्वोत्तर में उल्फा सहित अन्य उग्रवादी संगठनों का नया ठिकाना अब चीन बना

  • चीनी सरकार धन, हथियार और गोला-बारूद दे रही है

  • गृह मंत्रालय ने प्राधिकारण को दी है इसकी जानकारी

  • बीस आतंकवादी समूह सक्रिय हैं पूर्वोत्तर के क्षेत्र में

  • म्यांमार से शिविर हटाकर अब चीन की सीमा में गये

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर के अलग-अलग राज्यों में करीब 20 प्रमुख विद्रोही गुट सक्रिय हैं।

असम में चार संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम, नेशनल बोडोलैंड फ्रंट ऑफ

बोडोलैंड, कामतापुर लिबरेशन आर्गेनाइजेशन, कार्बी लांगरी एन सी हिल्स लिबरेशन फ्रंट

-केएनएलएफ सक्रिय हैं। मेघालय में गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी,हाइ नीव ट्रेप नेशनल

लिबरेशन काउंसिल की सक्रियता बनी हुई है। त्रिपुरा में नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा

– एनएलएफटी, ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स की गतिविधियां चल रही हैं। किसी भी तरह की

बातचीत के विरोधी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट

ऑफ असम (स्वतंत्र) और उत्तर पूर्व के अधिक उग्रवादी संगठन ने चीन को अपना नया

ठिकाना बनाया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुवाहटी के ट्राइब्यूनल को हलफनामा सौंपा है, जिसके अनुसार

संगठन ने अपने ठिकाने को म्यांमार से हटा लिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उल्फा

(I) चीफ परेश बरुआ ने म्यांमार की सीमा से सटे दक्षिणी चीन के रुइली में नया ठिकाना

बनाया है। उग्रवादी संगठन का ऑपरेशनल बेस और ट्रेनिंग कैंप म्यांमार के सागैंग सब-

डिवीजन में है। एक अलग हलफनामे में असम सरकार ने बताया है कि टाका में इन

उग्रवादियों के कैंप पर म्यांमार सेना के ऐक्शन के बाद जनवरी 2019 में कैंप तबाह हो गया

था। कई सारे कैडरों ने भी संगठन का साथ छोड़ दिया। सागैंग सब-डिवीजन में उल्फा ने

नागा संगठन एनएससीएन (खापलांग) की मदद से 8 ऑपरेशनल कैंप तैयार किए थे,

जिनकी सूची राज्य सरकार ने सौंपी है।

पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठन म्यांमार से चीन चले गये

ऐफिडेविट के अनुसार उल्फा अपने IT एक्सपर्ट्स की मदद से वेब ऐक्टिविटी की तैयारी में

भी लगा था, जो कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए खतरे के तौर पर उभर रहा है। गृह

मंत्रालय और राज्य के गृह विभाग के प्रतिनिधियों ने जस्टिस प्रशांत कुमार डेका की

अगुवाई वाले ट्राइब्यूनल को रिपोर्ट सौंपी। इसका काम यह फैसला लेने का था कि इस

संगठन को गैरकानूनी (रोकथाम) अधिनियम के तहत रखा जाए या नहीं। ट्राइब्यूनल ने

पिछले ही महीने उल्फा (आई) को गैरकानूनी संगठन घोषित किए जाने के गृह मंत्रालय के

फैसले पर सहमति जताई थी।

गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चीन के पीएलए सेना ने उत्तर पूर्व

आतंकवादी समूहों को हथियारों और गोला-बारूद के साथ समर्थन किया और आश्रय भी

दिया है।भारत सरकार की खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर-पूर्व भारत में

सशस्त्र विद्रोह चार दशकों से भारतीय सेना को चेतावनी दे रहे हैं।केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में

सक्रिय उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों को नए सिरे से खंगाल रही है। खासतौर पर

नागरिकता कानून लागू होने के बाद पूर्वोत्तर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में चल

रहे आंदोलन के बीच पूर्वोत्तर की सरकारों से कई उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों का

ब्योरा मांगा गया है।केंद्र और राज्यों की एजेंसियां भी इस मामले में तालमेल बनाए हुए हैं।

सूत्रों ने कहा कि खुफिया एजेंसियों को कुछ ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि कुछ इलाकों में

उग्रवादी गुट सिर उठाने के लिए मौके की तलाश में हैं।

चीन इसकी मदद से छाया युद्ध चलाना चाहता है

हालाँकि,भारत सरकार की खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की पीएलए सेना ने

उत्तर-पूर्व के उग्रवादी संगठन को अधिक धन, हथियार और गोला-बारूद के साथ रहने के

लिए अधिक स्थान भी दिया है। चीन ने भारत को परेशान करने के लिए यह सब कर रहा

है। वर्तमान में, भारत सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर आतंकवादी

संगठनों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिया है।


 

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