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टेंग्नौपाल के जंगलों में गुप्त सूचना मिलने के बाद बोला था धावा

  • असम राइफल्स ने आतंकी ठिकाने का किया भंडाफोड़

  • चीन में बने रॉकेट लांचर, हथियार और गोला बारूद बरामद

ब्यूरो प्रमुख

गुवाहाटी : टेंग्नौपाल के जंगल में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने की पूर्व सूचना पर

असम राइफल्स ने कार्रवाई की थी। इस त्वरित कार्रवाई के माध्यम से असम राइफल्स के

जवानों ने मणिपुर के टेंग्नौपाल जिले के जंगलों में आतंकियों के एक ठिकाने का भंडाफोड़

किया है। टेंग्नौपाल के लेइबी गांव के पास जंगलों में आतंकवादियों की मौजूदगी की विशेष

सूचना मिलने के बाद असम राइफल्स के जवानों ने ठिकाने का भंडाफोड़ किया। ऑपरेशन

के दौरान ठिकाने से एक एम-16 असॉल्ट राइफल और एक राकेट लॉन्चर पाया गया।

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक विशिष्ट खुफिया इनपुट के आधार पर सैनिकों ने

मणिपुर के लीबी गांव के करीब जंगल में एक अभियान शुरू किया। तलाशी अभियान के

दौरान सैनिकों ने एक उग्रवादी ठिकाने का पर्दाफाश किया और ‘ वारनुमा स्टोर बरामद

किए जिसमें गोला-बारूद के साथ पांच रॉकेट लांचर शामिल थे । सभी हथियार और गोला

बारूद चीन में बने हैं। सूत्रों ने बताया कि इस ठिकाने पर कोई आतंकी नहीं मिला, जो

म्यांमार से लगी सीमा से करीब 10 किलोमीटर दूर था। छापेमारी में भारी मात्रा में तमंचा

भी बरामद किया गया है. कार्रवाई के दौरान अन्य जंगी सामान भी बरामद किए गए।

इसके अलावा, ऑपरेशन के दौरान 5000 म्यांमार क्यात भी बरामद किए गए थे। बरामद

सामान को आगे की कार्रवाई के लिए टेंग्नौपाल पुलिस को सौंप दिया गया है।

टेंग्नौपाल जंगल म्यांमार की सीमा के करीब है

यह इलाका अंतर्राष्ट्रीय सीमा के काफी करीब है। दूसरी तरफ इन दिनों म्यांमार में भी

सैनिक शासन चल रहा है। वहां के अपने हालात ठीक नहीं होने की वजह से उत्तर पूर्व के

आतंकवादी संगठनों ने फिर से वहां अपनी गतिविधियां प्रारंभ कर दी है। इसी वजह से अब

भारतीय सेना को इस इलाके में अधिक सतर्कता बरतनी पड़ रही है। कई बार म्यांमार की

सीमा से भारत में प्रवेश कर ऐसे उग्रवादी संगठन बड़ी घटनाओं को अंजाम देने के बाद

तुरंत ही जंगल के रास्तों से होते हुए फिर से म्यांमार चले जाते हैं। कुछ समय पूर्व भारतीय

सेना ने म्यांमार की सरकार को सूचित कर वहां बने उग्रवादी शिविरों पर कार्रवाई की थी।

उसके बाद म्यांमार की सेना ने भी वहां स्थापित उत्तर पूर्व के कई उग्रवादी शिविरों पर

कब्जा कर लिया था। अब राजनीतिक अस्थिरता के दौर में फिर से वहां से ऐसी राष्ट्र

विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। इसके अलावा यह इलाका अब भारत में

मादक पदार्थ भेजने का सबसे चर्चित कॉरिडोर भी बन गया है।

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