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बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण का दूसरा चरण का टेंडर इसी माह







  • गंदे पानी को साफ करने पर मौन है सारे अफसर
  • पहले चरण का काम अब तक पूरा नहीं
  • स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित
  • सेवा सदन की तरफ होंगे विकास
संवाददाता

रांचीः बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण का दूसरा चरण इसी माह प्रारंभ हो सकता

है। वैसे यह तैयारी झारखंड में चुनाव की घोषणा के पहले की है।

लेकिन हो सकता है कि आदर्श आचार संहिता के दौरान इसे अस्थायी तौर

पर चुनाव संपन्न होने तक रोक दिया जाए।

निगम और झारखंड के नगर विकास के अधिकारी यह मानकर चल रहे हैं कि

इस कार्य का विधिवत शुभारंभ किसी राजनीतिक व्यक्ति के द्वारा कराया

जाना बेहतर होगा। लेकिन आदर्श आचार संहिता के लागू होने के दौरान ऐसा

नहीं किया जा सकता। रांची नगर निगम की प्रस्तावित योजना बड़ा तालाब

के क्षेत्र में करीब दस एकड़ जमीन को बेहतर बनाना है। इसके लिए सात करोड़

रुपये की योजना बनायी गयी है। लेकिन इसके अलावा भी वहां लोगों की

सुविधा के लिए कई योजनाओं को मूर्त रुप दिया जाना है। अभी तालाब के

बीचोंबीच स्वामी विवेकानंद की विशाल प्रतिमा स्थापित कर दी गयी है।

इस प्रतिमा की स्थापना के बाद से इसे विवेकानंद सरोवर भी कहा जाता है।

लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह बड़ा तालाब और रांची लेक के नाम से

ही परिचित है।

बड़ा तालाब योजना चड्डा एंड एसोसियेट्स का

इस कंपनी द्वारा करमटोली तालाब के सुंदरीकरण योजना के बेहतर साबित

होने के बाद निगम के लोग इसके प्रति आशान्वित हैं। नगर विकास विभाग से

योजना को स्वीकृति मिलने के बाद नवंबर माह में ही इसकी निविदा जारी

किये जाने की चर्चा है। लेकिन आदर्श आचार संहिता के लागू होने के बाद इस

टेंडर का वर्क आर्डर चुनाव संपन्न होने के बाद ही जारी कर विवादों से बचने

की तैयारी कर ली गयी है। इस दूसरे चरण की सुंदरीकरण योजना को मूर्त रुप

देने के क्रम में निगम के अधिकारी पहले चरण का काम कब पूरा होगा, इस

बारे में कुछ कहने से बच रहे हैं। वर्तमान में तालाब के चारों तरफ पैदल चाल

पथ निर्माण का काम चल रहा है, जो अक्सर ही बीच में बंद हो जाता है।

इस निर्माण कार्य की वजह से तालाब में सारा कचड़ा भी डाला जाता है।

दूसरे चरण के सुंदरीकरण का काम नागरमल मोदी सेवा सदन की तरफ

से किया जाएगा। इसमें लोगों के चलने के लिए पथ और अन्य सुविधाएं प्रदान

करने की योजना है। निगम के लोग मान रहे हैं कि सब कुछ ठीक चला तो यह

काम भी 12 महीने के भीतर पूरा हो जाएगा।

इसके तहत वहां वाशरुम और खाने की दुकानें भी लगायी जाएंगी।

लेकिन करीब 52 एकड़ में फैले इस बड़ा तालाब का पानी कैसे साफ होगा,

इसकी कोई योजना नहीं है। तालाब का पानी इतना गंदा है कि लोग अपनी

दैनिक जरूरतों के लिए भी अब उसका इस्तेमाल नहीं करते। 1842 में रांची के

कैदियों की परिश्रम से तैयार इस तालाब की सिर्फ एक बार सफाई हुई थी।

उसके बाद से ही इसके पानी को साफ करने की योजना पर कोई काम नहीं

कर पा रहा है। विशेषज्ञ पहले ही यह बता चुके हैं कि इस तालाब के जल

भंडारण की क्षमता बढ़ाने और पानी को साफ करने के लिए इसके पूरी

ड्रेजिंग की जरूरत है। वर्तमान में निगम के लोग इस परेशानी से बचकर

सिर्फ सीमेंट के निर्माण कार्य को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी तरफ निर्माण

कार्य पूरा नहीं होने की वजह से स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को अब भी

पर्यटकों के लिए खोला नहीं जा सका है।



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