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जनवरी 2022 में दस उल्कापिंड धरती के करीब से गुजरेंगे




  • किसी से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं
  • सिर्फ एक ही आकार में काफी बड़ा है
  • सभी पर नजर है खगोल वैज्ञानिकों की
  • यह महीना उल्कापिंडों के करीब से गुजरने का है
राष्ट्रीय खबर

रांचीः जनवरी 2022 में अनेक देशों में कोरोना की तीसरी लहर के बीच खगोल वैज्ञानिकों की नजर उल्कापिंडों पर लगी है। दरअसल यह महीना दस उल्कापिंडों के पृथ्वी के करीब से गुजरने का है। आम तौर पर एक माह में इतने उल्कापिंड धरती की धुरी से इतनी कम दूरी से नहीं गुजरते हैं।




नासा का नियर अर्थ ऑब्जेक्ट पर नजर रखने वाला नियंत्रण कक्ष वैसे 26 हजार पिंडों पर नजर रखता है, जो पृथ्वी के करीब आ सकते हैं। इसी माध्यम से पता चला है कि इस जनवरी 2022 की शुरुआत ही उल्कापिंडों के धरती के करीब से गुजरने से होगी।

इनमें से तीन तो इसी सप्ताह हमारी धुरी के करीब से निकलेंगे। बाद में शेष सात का नंबर आयेगा। नासा के जेट प्रॉपल्सन प्रयोगशाला में इनकी गतिविधियों को ध्यान से देखा जा रहा है। इसी वजह से यह कहा गया है कि यह पहला अवसर है जब इतने सारे उल्कापिंड पृथ्वी के करीब आयेंगे।

जनवरी 2022 के उल्कापिंडों को लेकर चेतावनी नहीं

वैसे इन दस उल्कापिंडों के पृथ्वी के करीब आने के बाद भी उन्हें लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गयी है। वैज्ञानिक यह देख चुके हैं कि इसमें से किसी के भी पृथ्वी की तरफ आने की कोई आशंका नहीं है। वैसे इनमें से सबसे बड़ा उल्कापिंड इसी सप्ताह गुजरने वाला है। 2021 वाई क्यू नामक यह उल्कापिंड काफी बड़ा है।




लेकिन वह भी पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से बाहर ही रहेगा। यह बता दें कि नियर अर्थ ऑब्जेक्ट उस खगोलीय पिंड को माना जा ता है जो पृथ्वी से सूर्य की दूरी से कम पर से गुजरता है। पृथ्वी से सूर्य की दूरी करीब 93 मिलियन मील आंकी गयी है।

अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे इन उल्कापिंडों के बनने का अलग अलग इतिहास है। फिर भी यह माना जाता है कि यह प्राचीन सौरमंडल के तैयार होने के वक्त से ही मौजूद हैं। किसी न किसी तारे के विस्फोट अथवा दो तारों के विस्फोट की वजह से ऐसे खगोलीय पिंड अंतरिक्ष में चारों तरफ बिखर गये थे। तब से वे चक्कर काट रहे हैं।

इनमें से कुछ जल्द ही लौटकर भी आयेंगे

खगोल वैज्ञानिको के मुताबिक 2021 वाई क्यू कल यानी पांच जनवरी को सबसे करीब से गुजरेगा। यह उल्कापिंड इससे पहले वर्ष 1923 में धरती के करीब आया था। इस बार उसकी गति 52 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की आंकी गयी है। उसके बाद छह जनवरी को 2014 वाई ई 15 पृथ्वी के करीब से करीब 22 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरेगा।

वह आकार में छोटा है और फिर से वर्ष 2024 में वापस लौटेगा। एस्ट्रोयड 2020 पी 1 को सात जनवरी को गुजरना है। वह भी इसी साल फिर वापस लौटेगा जबकि वह आकार में सबसे छोटा है। इसके अलावा 2013 वाईडी 48, 2021 बीए, 7481 1994 पीसी आई, 2022 ए बी, 2018 पीएन 22 और 2021 बीजेड भी इसी माह पृथ्वी के करीब से गुजर जाएंगे। इस बीच कई अन्य उल्कापिंड भी पृथ्वी के पास से गुजर चुके हैं लेकिन धरती से उनकी दूरी काफी अधिक मापी गयी थी।



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