fbpx Press "Enter" to skip to content

टेलीपोर्ट की तकनीक विकसित करने में एक कदम आगे बढ़ा

  • साइंस फिक्शन फिल्मों में हम देख चुके हैं इसे
  • हिंदू पौराणिक कथाओं में भी इसका उल्लेख है
  • सुदूर अंतरिक्ष तक कम समय में पहुंचना संभव होगा
  • क्वांटम तकनीक पर आधारित प्रयोग में सफलता पायी
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः टेलीपोर्ट एक सपने जैसी कार्रवाई है। अनेक विज्ञान

आधारित फिल्मों में इसे हम देख चुके हैं। लेकिन पहली बार इसे

कामयाब बनाने की दिशा में कार्रवाई हुई है। हालांकि यह प्रयोग

क्वांटम तकनीक पर आधारित है। लेकिन इसके विकास से विज्ञान के

नये आयाम खुल सकते हैं। जिन्हें नहीं पता उनकी जानकारी के लिए

यह बता देना प्रासंगिक होगा कि दरअसल टेलीपोर्ट का सीधा अर्थ

बिना निजी प्रयास के एक साथ से किसी अन्य स्थान तक किसी वस्तु

को पहुंचाना है।

भारतीय पौराणिक कथाओं में अनेक ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें देवी-

देवता अथवा ऋषि मुनि इसी तरह अपनी क्षमता से अनायास ही एक

स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच जाते थे। इसी पद्धति पर युद्ध के

उपकरण अथवा अन्य सामान भी टेलीपोर्ट हुआ करते थे। लेकिन

पौराणिक कथाओं में इसका उल्लेख होने के बाद भी विज्ञान के जगत

में इस दिशा में कोई प्रगति इससे पहले नहीं हो पायी थी।

वैज्ञानिक इस दिशा में काफी समय से ही प्रयासरत हैं। पहली बार क्वांटम

तकनीक के आधार पर इसमें प्रारंभिक सफलता मिली है। यदि यह शोध और विकसित हुआ

तो खास तौर पर अंतरिक्ष यात्रा में काफी दूर तक इंसान का पहुंचा

वाकई संभव हो पायेगा क्योंकि इसमें यात्रा के लिए खर्च होने वाले

समय में उल्लेखनीय कमी हो जाएगी।

अभी जो प्रयोग सफल हुआ है वह क्वांटम पद्धति पर आधारित है। इस

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों ने क्वांटम अणुओं को एक चिप से दूसरे चिप

तक अपने आप ही स्थानांतरित करने में सफलतापायी है। इसके पहले

ही यह प्रयोग सफल हो चुका है कि क्वांटम पद्धति पर काम करने वाले

नयी प्रजाति के सिलिकॉन चिप बिना किसी सीधे संपर्क के भी काफी

दूरी से एक दूसरे के साथ संपर्क स्थापित कर पाये हैं। इसके बाद ही

क्वांटम पार्टिकल्स के टेलीपोर्ट को आजमाया गया है।

टेलीपोर्ट की विधि का पहली बार सफल परीक्षण हुआ

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय एवं डेनमार्क के तकनीकी विश्वविद्यालय में

चल रहे शोध के तहत वैज्ञानिकों ने नैनो स्तर पर इसका सफल

परीक्षण किया है। इसके सफल होने की वजह से ऐसा माना जा रहा है

कि जब सुक्ष्म अणुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक इस टेलीपोर्ट

विधि से भेजा जा सकता है तो इस विधि को विकसित कर बड़े आकार

के सामान भी बिना किसी अतिरिक्त परिश्रम के स्थानांतरित किये जा

सकेंगे। इस काम को करने के लिए इसी तकनीक को और विकसित

करना पड़ेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब एक स्थान से एक

सुक्ष्म कण दूसरे कण तक भेजा जा सका है तो आगे अन्य वस्तुओं को

भी इसी तरीके से टेलीपोर्ट किया जाना संभव हो जाएगा।

इस विधि को आजमाने के लिए वैज्ञानिकों ने उस तकनीक का सहारा

लिया, जिसमें पार्टिकल यानी सुक्ष्म कण एक स्थान से दूसरे स्थान

तक की दूरी तय कर सकते हैं। इसके जरिए वर्तमान में आंकड़ों और

सूचनाओं का आदान प्रदान अत्यंत तेज गति से किया जा सका है।

भविष्य में इसी तकनीक के आयाम को बढ़ाने की जरूरत है। दोनों

चिपों के बीच संपर्क स्थापित होने के बाद जिस तरीके से कणों का

स्थानांतरण होता है वह दो तरफा रास्ता है। इस शोध दल के नेता डॉ

जिनानवेई वांग ने इस बारे में बताया है कि इस काम को करने के लिए

उनलोगों ने सिलिकॉन कार्बाइड चिप का इस्तेमाल किया है।

परीक्षण के दौरान इनसे निर्मित चिपों ने क्वांटम फोटोन की भांति

काम किया, जिससे यह प्रयोग सफल हुआ है।

फोटोन किरणों के जरिए इसे आजमाया गया

एक खास तरंग पर फोटोन के विकिरण से यह संपर्क स्थापित किया

गया है। इस शोध सी जानकारी रखने वाले प्रोफसर डेविड अब्सचालोम

ने यह जानकारी दी है। वह खुद भी क्वांटम तकनीक के जाने माने

विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में पूरी दुनिया में इस्तेमाल होने वाले फाइबर

ऑप्टिक्स की मदद से इस काम को और सरल और तीब्र गति का

बनाया जा सकता है। अभी जो परीक्षण सफल हुआ है उसमें सुक्ष्म

कणों के स्थानांतरण में शोधकर्ताओं को 91 प्रतिशत कामयाबी मिली

है। त्रिआयामी टेलीपोर्ट की वजह से इसकी गति सामान्य से काफी तेज

है। इसलिए भी वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इस विधि के और विकसित

होने की स्थिति में अंतरिक्ष में सौर मंडल से आगे तक जाने का सपना

भी भविष्य में सपना नहीं रहेगा। अत्यंत कम समय में अंतरिक्ष 

अभियान काफी अधिक दूरी तय कर पायेगा। इससे नये खगोलीय

खोज में भी मदद मिलेगी।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

3 Comments

  1. […] टेलीपोर्ट की तकनीक विकसित करने में एक … साइंस फिक्शन फिल्मों में हम देख चुके हैं इसे हिंदू पौराणिक कथाओं में भी इसका उल्लेख है सुदूर अंतरिक्ष तक कम समय … […]

Leave a Reply