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टेलीपोर्ट के शोध में फिर मददगार बना क्वांटम फिजिक्स

  • क्वांटम कंप्यूटर बनाने पर काम जारी है

  • पहले सामानों पर यह परीक्षण किया जाएगा

  • निर्जीव पर सफलता के बाद ही जीवित पर शोध

  • अंतरिक्ष यात्रा में बन सकता है इंसानों का मददगार

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः टेलीपोर्ट पर काफी समय से जारी शोध में फिर से और प्रगति हुई है। इस क्रम

में फिर से क्वाटंम पद्धति ही काम आयी है। अब तक इस किस्म के प्रयोग में सिर्फ यही

विधि कारगर हुई है। वरना अन्य विधि और रासायनिक प्रक्रियाओं पर हुए सारे अनुसंधान

वह परिणाम नहीं दे पाये हैं, जिसकी वजह से इसे आजमाया जा रहा है। दरअसल इंसानों

को सुदूर अंतरिक्ष में भेजने के साथ साथ जरूरी सामानों को पलक झपकाने के समय में

काफी दूर पहुंचाने की सोच पर इस विज्ञान को आगे बढ़ाया जा रहा है। काफी समय से इस

पर काम सिर्फ इस सोच के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि इस विधि की मदद से इंसान

अंतरिक्ष में प्रकाश वर्ष तक की दूरी बहुत जल्द तय कर सके। इससे हमारे सौरमंडल से

बाहर भी जा पाना संभव होगा। इंसानों के लिए पृथ्वी का विकल्प तलाशने के दौर में इसे

महत्वपूर्ण समझा जा रहा है।

भौतिक विज्ञान की इस तकनीक पर काम करने का फायदा यह है कि शोध के दौरान

सामने आने वाली गड़बड़ियों को लगातार सुधारते हुए काम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस क्रम में पहले ही सूचना तकनीक के आंकड़ों को बिना किसी संपर्क के एक स्थान से

दूसरे स्थान तक पहुंचाने का प्रयोग सफल हो चुका है। उस प्रयोग के सफल होने के बाद

उसी तकनीक पर आधारित कंप्यूटर बनाने का काम भी चल रहा है। इस क्वांटम तकनीक

पर तैयार कंप्यूटरों की गति वर्तमान कंप्यूटर से बहुत अधिक होगी और यह खास तौर पर

आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस की मदद से होने वाले कार्यों में समय की जबर्दस्त बचत करेगा।

टेलीपोर्ट में प्रारंभिक सफलता भी क्वांटम थ्योरी से मिली थी

टेलीपोर्ट के मामले में अब दो अलग अलग पदार्थों को एक साथ क्रियाशील करने में भी

मदद मिली है। क्वांटम पद्धति पर आधारित टेलीपोर्ट विधि से क्वांटम के अत्यंत सुक्ष्म

विंदू को अलग अलग स्थान पर सक्रिय कर पाना संभव हुआ है। रोचेस्टर विश्वविद्यालय

और पुरड्यू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक यह काम कर रहे हैं। इनलोगों ने यह क्वांटम

पद्धति पर सक्रियता को न सिर्फ तैयार किया है बल्कि सफलतापूर्वक उनका परीक्षण भी

कर लिया है। इस परीक्षण के सफल होने के बाद अब वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि क्वांटम

पद्धति के आधार पर इलेक्ट्रॉनों का टेलीपोर्ट किया जाना संभव हो चुका है। अब इसके आगे

का काम किया जाना है ताकि भौतिक आकार के सामानों को भी परीक्षण के तहत टेलीपोर्ट

किया जा सके। यह काम सफल होने पर पूरी दुनिया में किसी भी सामान को पलक

झपकते ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजना भी संभव हो जाएगा। इससे खास तौर

पर दवा की आपूर्ति में इंसानों को फायदा हो सकता है।

एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा त्वरित होगी

इस शोध से जडे रोचेस्टर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफसर जॉन निकोल ने कहा कि

इस तकनीक में दो क्वांटम अणु बड़ी आसानी से और बहुत सुगमता के साथ एक दूसरे से

संपर्क और संवाद स्थापित कर लेते हैं। इसी शोध को आगे बढ़ाते हुए अब ऐसे क्वांटन

अणुओं के बीच की दूरी को बढ़ाकर इसी प्रयोग को दोहराने की तैयारी चल रही है। इसके

लिए आवश्यक यांत्रिक सुधार भी किये जा रहे हैं, जो इन प्रयोगों के दौरान खुलकर सामने

आये हैं। उन्होंने कहा कि यह सभी को पता है कि फोटोन अपने आप ही लंबी दूरी तय कर

लेते हैं जबकि इलेक्ट्रान एक ही स्थान पर स्थिर रहते हैं। इन इलेक्ट्रॉनों को एक स्थान से

दूसरे स्थान तक भेजना ही टेलीपोर्ट विधि की सफलता है। यह काम किसी चुंबक के दो

ध्रुवों के बीच आकर्षण जैसी स्थिति है। जिसमें एक हिस्सा खुद ही दूसरे की तरफ खींचा

चला आता है।

वैज्ञानिक अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए इसे और अधिक विकसित करना चाहते हैं ताकि

प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित इलाकों तक भी इंसान की पहुंच हो सके। इसके लिए अगली

पीढ़ी के टेलीस्कोप को ही इस काम के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनी हुई है। इंसानी

शारीरिक संरचना के आधार पर भविष्य में इंसानो को भी टेलीपोर्ट करने पर सैद्धांतिक

काम चल रहा है। वैसे इसी टेलीपोर्ट विधि पर पहले भी कई विज्ञान आधारित फिल्में बन

चुकी हैं। लेकिन किसी जीवित को टेलीपोर्ट करने के पहले प्राणहीन वस्तु को भेजने की

तकनीक को विकसित किया जाना है। उसके बाद ही जीवित कोषों को टेलीपोर्ट करने की

दिशा में शोध की गाड़ी आगे बढ़ पायेगी।


 

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