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तेलेंगना ने नई राह दिखायी आर्थिक मोर्चे पर कोरोना की लड़ाई में

  • निर्वाचित जनप्रतिनियों का वेतन कटौती

  • ऊंचे ओहदों वालों को भी कम वेतन मिलेगा

  • केंद्रीय सेवा के अफसरों को 50 फीसद कम

  • आर्थिक संकट को दूर करने की कोशिश

एस भाष्कर रेड्डी

हैदराबादः तेलेंगना सरकार ने कोरोना से उपजे आर्थिक संकट को दूर करने के लिए सभी

मंत्रियों के वेतन कटौती का आदेश जारी कर दिया है। खुद मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने

अपने ऊपर यह फैसला लागू कर इसकी शुरुआत कर दी है। उनके वेतन का 75 प्रतिशत

हिस्सा अब कोरोना से उपजी परिस्थितियों का मुकाबले करने में खर्च किया जाएगा। इसी

तरह राज्य के अन्य तमाम मंत्रियों के वेतन में भी कटौती होगी। यह सारी रकम कोरोना

की वजह से राज्य की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को सुधारने में ही खर्च होगी। मुख्यमंत्री

कार्यालय द्वारा इस बारे में जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि सरकार कोरोना की

रोकथाम और उससे उत्पन्न आर्थिक विषमताओं को दूर करने के लिए पर्याप्त प्रबंध कर

रही है। इसके तहत सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से भी यह मदद ली जा रही है। इसके

तहत मंत्रियों के अलावा राज्य के सभी विधायकों के वेतन में भी तीन चौथाई की कटौती

की जाएगी।

पूरे देश के कोरोना फंड की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक पथप्रदर्शक साबित होने

जा रहा है। तेलेंगना में विधान पार्षदों और स्थानीय निकाय के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों

के वेतन में भी इस 75 प्रतिशत की कटौती की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने

राज्य सरकार द्वारा संचालित परिवहन निगम और पर्यटन विकास निगम में कार्यरत

कर्मचारियों के वेतन में भी कटौती कर दी है।

तेलेंगना ने अपने अफसरों पर भी यही नियम लागू किया

राज्य सरकार का फैसला है कि संकट दूर होने तक सभी प्रशासनिक, पुलिस एवं केंद्रीय

सेवा के अन्य अधिकारी भी अपने वेतन का साठ प्रतिशत इस काम के लिए देंगे। यहां तक

कि जिन्हें सरकारी पेंशन मिलता है, उन्हें भी अभी 50 प्रतिशत ही पेंशन दिया जाएगा। श्री

राव ने स्पष्ट किया है कि कोरोना के खतरे से तो राज्य जल्द ही उबर जाएगा लेकिन जो

आर्थिक स्थिति बिगड़ी है, उसे सुधारने में अभी काफी वक्त लगेगा। वर्तमान में पिछले 15

मार्च तक राज्य के कोष में 12 हजार करोड़ रुपये की कमी थी। दूसरी तरफ कोरोना से

उत्पन्न भयावह स्थिति की वजह से पेट्रोल, जीएसटी, उत्पाद जैसे करों का भुगतान भी

बंद है। ऐसे में राज्य के पास जो आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है, उसकी भरपाई सरकार

अपने संसाधन से ही करना चाहती है। श्री राव ने अपने लोगों को स्पष्ट कहा है कि यह एक

संकट है इसलिए सभी को इसमें सहयोग करना होगा। उनके शब्दों में अगर आप भरपेट

खाना खा रहे थे तो संकट दूर होने तक आधा पेट ही खाइये क्योंकि राज्य के अन्य लोगों

को भी इसकी जरूरत है। इसे पूरा करने के लिए राज्य के पास खजाना खाली है। इसलिए

सरकार तमाम विलासिता अभी बंद करेगी। इसे सभी को मानना ही होगा।

सिर्फ फोर्थ ग्रेड और रिटायरों से दस प्रतिशत कटौती

तेलेंगना सरकार ने चतुर्थवर्गीय कर्मचारी तथा संविदा एवं रिटायर कर्मचारियों के वेतन में

सिर्फ दस प्रतिशत की कटौती की है। सरकार के इस फैसले के मुताबिक तमाम वैसे

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम जो सरकार के पैसे से संचालित होते हैं, वहां भी वेतन कटौती

होगी। इनमें लोक सेवा आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग भी शामिल हैं। राज्य की

वित्तीय स्थिति पर सोमवार को हुई एक लंबी बैठक के बाद यह कठोर फैसला लिया गया

है। इससे पहले ही सत्तारूढ़ तेलेंगना राष्ट्रीय समिति के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने एक

महीने का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का फैसला लिया था। वे अपने विधायक

निधि का एक साल का पैसा भी इसी कोष में देंगे। जिससे यह कोष करीब पांच सौ करोड़

रुपया हासिल करेगा। वैसे राज्य सरकार ने कोरोना की रोकथाम के उपायों पर अभी ही

पांच सौ करोड़ रुपये के आस पास खर्च कर दिये हैं। दूसरी तरफ कर संग्रह बंद होने की

वजह से राज्य के पास आने वाले दिनों में पैसे की भारी कमी होने जा रही है, जिसका पहले

से इंतजाम किया जा रहा है।


 

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