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दांतों के अपने आप ठीक होने के जीन को खोज निकाला







  • शोध पत्रिका में दी गयी है विस्तृत जानकारी

  • जेनेटिक उपाय से ठीक हो सकते हैं इंसान के दांत

  • दांतों की कठिन संरचना में जीन की महत्वपूर्ण भूमिका

  • इस जीन के पुर्नर्निमाण में योगदान पर अभी चल रहा है काम


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः दांतों की खेती अब पुरानी बात हो गयी। पहले हम नकली दांतों के सहारे काम चलाते थे।

उसके बाद टूट चुके दांतों की खेती की तकनीक बाजार में आयी।

इसके अलावा भी इंसान को अपनी दांतों की सुरक्षा के लिए कई नये उपाय मिले हैं।

अब वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि दरअसल इन दांतों को जेनेटिक उपाय से भी ठीक किया जा सकता है।


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दांतों के अंदर के स्टेम स्टेलों को अतिरिक्त शक्ति प्रदान करने वाले जीन की भी इस क्रम में पहचान कर ली गयी है।

इसका नाम डीएलके 1 है। यह जीन दांतों के अंदर नये सिरे से जीवन प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम है।

नेचर कम्युनिकेशंस नामक एक पत्रिका में इस विषय पर हुए शोध के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक यह मानते हैं कि इस विधि को और उन्नत बनाकर दांतों की हर किस्म की परेशानी को जेनेटिक तरीके से स्थायी तौर पर ठीक किया जा सकता है।

वैसे मजाक के तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि इसके पूरी तरह विकसित होने की स्थिति में

पूरी दुनिया में दांतों के डाक्टरों की संख्या तेजी से कम होने लगेगी।

क्योंकि एक बार स्थायी उपचार होने के बाद मरीज भी डाक्टर के पास नहीं आयेगा।

ऐसी स्थिति में दांत के डाक्टरों के पास पर्याप्त मरीज ही नहीं होंगे।

दांतों के शोध में नयी जानकारी दूसरी मदद कर सकती है




वैज्ञानिकों ने इस अनुसंधान के दौरान पाया है कि चंद किस्म के स्टेम सेल ही हैं जो इस सफलत की कुंजी हैं।

इन सेलों का सक्रिय होने से पूरे शरीर में विकास अथवा पुनर्संचरना संभव है।

इस कड़ी में दांतों में हर किस्म के विकार को सुधारा जा सकता है।

यानी क्षतिग्रस्त हो चुके दांतों को भी नये सिरे से सुधारा जा सकता है। यह सुधार पूरी तरह स्थायी भी होगा।

डीएलके 1 नामक जीन की मदद से वैज्ञानिक उस टिश्यू को विकसित करने में कामयाब हुए हैं,

जो यह काम अच्छे तरीके से कर सकता है।


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प्लाईमाउथ के विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता बिंग हू ने इस बारे में जानकारी दी है कि

इस एक जीन से पूरे शरीर के विकास में मिलने वाली अन्य मददों का भी नये सिरे से अध्ययन किया जा रहा है।

हो सकता है कि यह जीन इंसानी शरीर में अन्य किस्म की परेशानियों को दूर करने में भी मददगार साबित हो।

लेकिन दांत के मुद्दे पर वैज्ञानिक शोध सफल साबित हुआ है।

जेनेटिक विज्ञान की रोचक जानकारी

इस विधि से दांत के अंदर नये सेल विकसित किये गये हैं और नये टिश्यू के बन जाने की

वजह से क्षतिग्रस्त दांतों को भी पूरी तरह ठीक किया जा सका है।

इस जीन से स्टेल सेल को नये सिरे से तैयार करने की दिशा में वैज्ञानिक आगे भी अनुसंधान कर रहे हैं।

संरचना के गहन अध्ययन के बाद प्रयोग किया गया था




यह बताया गया है कि दांतों की संरचना के गहन अध्ययन के बाद इस काम को आगे बढ़ाया गया है।

दरअसल इंसानी दांत की संरचना में उसके ढांचे और बनावट अलग अलग तरीके से विकसित होते हैं।

यह छोटा सा हिस्सा होने के बाद भी उसमें हड्डी और मांसपेशियां होती हैं।

ऊपर से उन्हें बचाने के लिए एक अलग आवरण भी होता है।

किन्हीं कारणों से यह ऊपरी आवरण नष्ट होने के बाद दांत अंदर से तेजी से खराब होने लगते हैं।

इस मजबूत ऊपरी आवरण को डेंटिन कहा जाता है।

इस संरचना को समझने और उनके विश्लेषण के क्रम में ही वैज्ञानिकों ने उस मेंसेनचाइमल स्टेम सेल का

पता लगाया है जो इन सभी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन सभी का रिश्ता उस जीन से है, जिसकी अभी पहचान हुई हैं।

प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने यह पाया कि जब इन स्टेम सेलों को नये सिरे से इस जीन की मदद से

सक्रिय किया गया तो उन्होंने सभी प्रमुख सेल केंद्रों तक इसका संकेत भेजा था।

इस संकेत के बाद ही नये सिरे से दांतों के पुनर्निर्माण का प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी।

अब इसका पता चल जाने के बाद शोध कर्ता यह मान रहे हैं कि इस विधि को और उन्नत बनाकर

दांतों की बीमारी दूर करने की दिशा में क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

वैसे इंसानी शरीर के पुनर्संरचना में भी इस सेल के योगदान पर अभी और शोध प्रारंभ हो चुके हैं।


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