दूरसंचार कंपनियों ने कहा, डेटा सुरक्षा के लिए ठोस कदम की जरूरत

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मुंबई: भारती एयरटेल, आइडिया सेल्युलर और रिलायंस जियो समेत शीर्ष दूरसंचार कंपनियों ने डाटा प्रोटेक्शन नियमों के दायरे के तहत ओवर द टॉप (ओटीटी) एप्स जैसे व्हाट्सएप, वाइबर और अन्य सोशल साइट्स को भी शामिल किए जाने की वकालत की है। एक समान नीतियों के तहत इन सोशल मीडिया साइट्स की भी वर्तमान लाइसेंस मानदंडों के तहत लाए जाने की मांग पिछले कई साल से हो रही है।हालांकि, डेटा संरक्षण और उपभोक्ता गोपनीयता के समर्थक इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसे संस्थाओं ने भी इस मामले में व्यापक कानून बनाने के लिए अभियान चला रखे हैं।

मौजूदा डेटा संरक्षण नियम आज की डेटा आवश्यकताओं को देखते हुए अपर्याप्त और पूरी तरह से असुरक्षित साबित हो रही हैं। आज मोबाइल फोन से बड़ी मात्रा में डेटा प्रेषित होता है। इंटरनेट के बड़े पैमाने पर उपयोगकर्ताओं में स्मार्ट फोन की भूमिका बढ़ी है। डेटा की उपलब्धता के लिए उपलब्ध विभिन्न संचार माध्यमों के रूप में स्थानीय-होस्टिंग पर भी नजर बनाए रखने की जरूरत बताई गई है।

भारत की सीमा के बाहर और अन्य देशों के मोबाइल-इंटरनेट उपभोक्ताओं तक किसी के व्यक्तिगत डेटा को पहुंचने से रोकने के लिए तमाम सुरक्षा के उपाय अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इंटरनेट आधारित कंपनियों ने तर्क दिया है कि इस तरह का कोई भी कदम इंटरनेट की खुली विविधता को खतरा पहुंचा सकती है। अन्य देशों में विदेशी कंपनियां भी भारतीय कंपनियों के साथ संचार सुविधाओं के परस्पर आदान-प्रदान को लेकर यही नियम अपना सकती हैं।

मुकेश अम्बानी के स्वामित्व वाली वाहक कंपनी ने भी गोपनीयता व डेटा की सुरक्षा पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के साथ चर्चा की थी। कंपनी ने कहा कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए इस सेक्टर में डेटा गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और डेटा स्वामित्व के मसले पर नियामक ढांचे को और भी अच्छी तरह से परिभाषित किया जाना चाहिए। ओटीटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों और बिना लाइसेंस प्राप्त सेवा प्रदाता कंपनियों को डेटा गोपनीयता सिद्धांतों के तहत उपभोक्ता डेटा इकट्ठा करने की मंजूरी दी जानी चाहिए।

नियामक को मोबाइल फोन और दूरसंचार क्षेत्र में डेटा संरक्षण से संबंधित प्रमुख मुद्दों की पहचान करने के संदर्भ में अगस्त 2017 से डेटा अधिकारों के पर्याप्त संरक्षण का आकलन करने हेतु परामर्श शुरू करने की अपील की गई थी। इसके साथ ही सभी वाहकों की दलील थी कि लाइसेंस के तहत डेटा गोपनीयता और संरक्षण मानदंडों को मजबूत करने लिए उन्हें किसी विशेष आदेश की जरूरत नहीं है।

उद्योग संगठन सीओएआई ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि ओटीटी संचार प्रदाता और किसी भी नेटवर्क पर वॉइस एवं मैसेज सेवा प्रदान करने वाले ऑपरेटर भी दूरसंचार कंपनियों के ही समान हैं। इस सेक्टर से जुड़े सभी हितधारकों के लिए ‘समान सेवा एक ही नियम’ के मापदंड लागू होने चाहिए। मार्केट लीडर भारती एयरटेल ने भी इसी मुद्दे पर इंटरनेट इको सिस्टम के लिए कंटेंट प्रोवाइडर, डिवाइस निर्माताओं, ब्रॉउजर, ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदाताओं के लिए भी एक ही तर्क प्रस्तुत किया था। इंटरनेट पारिस्थितिकी तंत्र के तहत काम करते समय भी निजी डेटा का उपयोग होता है, लेकिन उस पर अलग-अलग नियमों और विनियमों द्वारा नियंत्रण होता है।

भारती एयरटेल ने कहा की हालांकि इस क्षेत्र मे ग्राहकों की गोपनीयता में कमजोरियों के तीन महत्वपूर्ण स्रोत हैं – उपकरण, नेटवर्क और कंटेंट प्रोवाइडर। कोई भी कानून अगर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को अपने दायरे में सीमित करता है, तो भी व्यक्तिगत रूप से निजी डेटा की गोपनीयता को कितना सुरक्षित कर पाएंगे, यह कहा नहीं जा सकता। भारती एयरटेल का कहना है कि दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों ( टीएसपी) को अपने ग्राहकों के व्यक्तिगत डेटा को भारत से बाहर भेजने की अनुमति नहीं है, जबकि देश के भीतर किसी अन्य सेवा प्रदाताओं पर ऐसा कोई निषेध / प्रतिबंध कानून लागू नहीं है। ट्राई को भी एक लिखित जवाब में यही कहा गया है।

आइडिया ने भी इस संदर्भ में एक नियामक बोर्ड के गठन की जरूरत पर जोर दिया है। कंपनी ने कहा कि ओटीटी को भी एक उपयुक्त नियामक ढांचे के तहत “तत्काल” लाया जाना चाहिए। इससे यह सेक्टर भी डेटा सुरक्षा, संरक्षण, गोपनीयता और गोपनीयता के संबंध में दूरसंचार कंपनियों के लिए लागू होने वाले समान दायित्वों के अंतर्गत आ जाएग।

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