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टीबी की नई दवा से दुनिया के वैज्ञानिकों को उम्मीद




  • अमेरिकी प्रशासन ने परीक्षण के बाद इस्तेमाल को दी मंजूरी
  • 14 अगस्त को दवा को मिली है इस्तेमाल की मंजूरी
  • गैर मुनाफा वाली संस्था ने किया है इसे विकसित
  • अमेरिका में दिसंबर तक बाजार में आयेगी दवा
प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः टीबी की नई दवा को अंततः अमेरिकी प्रशासन ने इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है।

इस दवा का विकास तो पहले ही कर लिया गया था।

प्रारंभिक परीक्षण में सफल होने के बाद दवा का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा था।

उसकी तमाम रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद इस दवा को कारगर पाया गया है।

इन रिपोर्टों के आधार पर अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिंस्ट्रेशन ने इसके इस्तेमाल की स्वीकृति गत 14 अगस्त को जारी कर दी है।

टीबी के नई दवा का नाम प्रेटोमानिड है। इसे एक ऐसी संस्था ने विकसित किया है,

जो मुनाफा कमाने के लिए काम नहीं करती।


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इस वजह से भी इसके सारे अनुसंधान रिपोर्टों को प्रारंभ से ही काफी गंभीरता से लिया गया था।

दुनिया भर में टीबी रोग के विषाणुओं में लगातार अनेक किस्म की चुनौती खड़ी होने के बाद

इस दवा के विकास पर लोगों ने जी जान लगा रखा था।

प्रेटोमानिड नाम की इस दवा की अमेरिकी प्रशासन द्वारा दी गयी मंजूरी के क्रम में तीसरी दवा के तौर पर बताया गया है।

पिछले चालीस वर्षों में अमेरिकी प्रशासन ने तीसरी ऐसी दवा को मंजूरी दी है।

टीबी एलायंस नामक इस संगठन से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस दवा को विकसित किया है।


भारतीय चिकित्सा विज्ञान की कुछ उपलब्धियां

अब अमेरिकी में इसकी मंजूरी मिलने के बाद इस दवा का व्यापारिक उत्पादन माइलान नामक कंपनी को करना है।

यह कंपनी पेनिनसिल्वानिया में हैं।

यह कंपनी ही इस दवा का उत्पादन कर पूरी दुनिया में उसका व्यापार भी करेगी।

टीबी की नई दवा दिसंबर तक अमेरिका में उपलब्ध होगी

वैसे अमेरिका में ऐसा माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक यह दवा उपलब्ध हो जाएगी।

इस दवा की मंजूरी का आवेदन यूरोपियन मेडिसिंस एजेंसी के पास भी दिया गया है।

साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन में भी इसे दुनिया भर में टीबी रोगियों के लिए इस्तेमाल के लायक मानने का आवेदन दिया जा चुका है।

टीबी की नई दवा के बारे में वैज्ञानिक इस बात को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं कि यह ईलाज की अवधि को काफी कम करने में सक्षम है।

आम तौर पर वर्तमान चिकित्सा पद्धति में टीबी के ईलाजम 18 से 24 महीने लगते हैं।

इधर परीक्षण में यह पाया गया है कि प्रेटोमानिड दवा के इस्तेमाल से रोगी को सिर्फ छह से नौ महीनों में ठीक किया जा सकता है।

इस दवा का इस्तेमाल दो अन्य स्वीकृत दवा बेडाक्वीलिन और लाइनजोलिड के साथ दिया जाता है।


रोग अनुसंधान की कुछ और महत्वपूर्ण खबरें

इन सभी दवाइयों को खाया जाता है। इससे ईलाज से मरीज को उल्लेखनीय फायदा होता है और उसके ठीक होने का समय भी कम हो जाता है।

परीक्षण के दौरान यह पाया गया है कि आइसोनियाजिड और रिफामपिसीन का प्रभाव जिन रोगियों पर नहीं पड़ता है, उन्हें दूसरी दवा दी जाती है।

दरअसल कई मामलों में टीबी के मरीजों के अंदर बैठे विषाणु इतने शक्तिशाली हो चुके हैं कि पहले दौर की दवा का उनपर कोई असर ही नहीं पड़ता है।

इसके लिए एमडीआर-टीवी की ईलाज पद्धति का विकास किया गया है।

लेकिन यह भी देखा गया है कि कई रोगी इस ईलाज को झेल नहीं पाते हैं।

ऐसे सभी रोगियों के लिए यह नई दवा अत्यंत कारगर साबित होगी।

क्लीनिकल ट्रायल के दौरान 14 देशों के 1168 मरीजों पर टीवी की नई दवा का परीक्षण किया गया है।

परीक्षण की रिपोर्ट के बाद दी गयी है मंजूरी

इन्हीं परीक्षणों से निकले निष्कर्ष के आधार पर दवा को मंजूरी दी गयी है।

क्योंकि प्रारंभिक परीक्षण में वे सफल साबित हो चुके है।




वैसे वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि बेडाक्वीलिन और लाइनोजोलिज के साथ ही इसका इस्तेमाल किया गया है।

टीबी के ईलाज के काम आने वाली अन्य दवाइयों के साथ इसका परीक्षण अभी नहीं हुआ है।

इस दवा का इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं के लिए भी वर्जित किया गया है।

साथ ही बच्चों पर अब तक इसका परीक्षण नहीं किया गया है।

क्लीनिकल ट्रायल के दौरान कई साइड एफेक्टों का भी पता चला है इसलिए अत्यंत सावधानी के साथ इसके इस्तेमाल की विधि स्पष्ट की गयी है।

कुछ मामलों में मरीजों को इन तीन दवाइयों के मिश्रण से लीवर, बोन मैरो और रक्त कोशिकाओं की कमी की शिकायत मिली है।

इन तीनों दवाइयों को खाने की अधिकतम समय सीमा 26 सप्ताह की है।

इनमें से अन्य दवाइयों का प्रयोग नियमितहोने के बाद भी इस बेडाक्वीलिन का प्रयोग प्रारंभिक अवस्था में चार सौ मिलीग्राम के बाद बाद में घटा दिया जाता है।

परीक्षण में इसी अवधि में टीबी के पूरी तरह ठीक होने की रिपोर्ट मिली है।

जबकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यदि मरीज में सुधार होने के बाद भी रोग पूरी तरह से ठीक नहीं हुआ तो हो इसकी अवधि आगे भी बढायी जा सकती है।


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