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तवांग जीतने वाले सैन्य अधिकारी का स्मारक बनेगा




  • छोटे से दस्ते ने जीता था युद्ध

  • चीनी सरकार के लिए एक चेतावनी

  • अरुणाचल सरकार ने लिया है फैसला

  • भारत ने चीन से दोबारा छीन लिया था इलाका

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: तवांग जीतने वाले सैनिकों का स्मारक बनाने की घोषणा कर चीन को एक और

चेतावनी दी गयी है। जैसे चीनी सरकार अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा मानती है और

चीन कहता रहा है कि वह अरुणाचल को भारत का हिस्सा नहीं मानता है, बल्कि यह चीन

में दक्षिणी तिब्बत का एक क्षेत्र है। इस मामले में 70 साल से चीन ने भारत के साथ लड़ाई

में लगा हुआ है, उस समय अरुणाचल सरकार ने एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत लिया है।

अरुणाचल सरकार ने फैसला लिया है कि भारत के ओर से चीन से तवांग जीतने वाले सेना

के अधिकारी का स्मारक बनाएगी । जो सेना जवान ने अरुणाचल के तवांग में चीन

सरकार को लाल आंखों दिखाए थे और छोटे से दस्ते ने तिरंगा फहराया था। अरुणाचल

सरकार उसका स्मारक स्थापित करेगी। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने आज

कहा कि उनकी सरकार 1951 में चीन से लगती सीमा पर स्थित तवांग में सैनिकों के छोटे

से दस्ते के साथ भारत का प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने वाले सेना के मेजर बॉब

केथिंग की याद में एक स्मारक स्थापित करेगी। खांडू ने कहा कि स्मारक के लिए

आधारशिला 14 फरवरी को तवांग में रखी जाएगी। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा

खांडू ने चीनी सरकार को चेतावनी दी कि अरुणाचल का प्रत्येक नागरिक राष्ट्र की रक्षा के

लिए तैयार है और भारतीय नागरिक चीन को कभी माफ नहीं करेगा, जो अरुणाचल प्रदेश

को अपना हिस्सा मानता है। समझा जाता है कि 14 फरवरी को ही मेजर केथिंग ने 70

साल पहले वहां पर भारतीय तिरंगा फहराया था।

तवांग जीतने वाले अधिकारी थे मेजर केथिंग

उन्होंने कहा कि मणिपुर से संबंध रखने वाले सेना के अधिकारी के स्मारक के लिए स्थान

का चयन तवांग जिला प्रशासन करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हममें से कइयों को मेजर

केथिंग और अरूणाचल प्रदेश के लिए उनके योगदान की जानकारी नहीं है। एक बार

स्मारक बन जाए तो आंगतुकों को उनके बारे में जानकारी मिलेगी तथा वे मोनपा के बारे

में भी जान पाएंगे।’ तवांग में स्मारक के साथ-साथ स्थानीय मोनपा आदिवासियों का एक

संग्रहालय भी होगा।

सूत्रों ने बताया कि ब्रिटेन ने 1914 में चीन और तिब्बत के साथ शिमला संधि पर हस्ताक्षर

किए थे जिसके बाद यह इलाका ब्रिटिश भारत में आ गया था। हालांकि उस वक्त की

सरकार विभिन्न कारणों से इसे अपने प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं ला सकी थी। द्वितीय

विश्व युद्ध में लड़ने वाले मेजर केथिंग को नवंबर 1950 में पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी

(एनईएफए) के तिरप मंडल में सहायक राजनीतिक अधिकारी के तौर पर नियुक्त किया

गया। एनईएफए बाद में अरूणाचल प्रदेश बना।

सरकार से निर्देश मिलने के बाद मेजर केथिंग और असम राइफल्स के एक दस्ते ने 17

जनवरी 1951 को चारदौर से यात्रा शुरू की और छह फरवरी को तवांग पहुंच गए। तब

तापमान शून्य से नीचे था। उन्होंने बताया कि स्थानीय ग्राम प्रमुखों से बातचीत करने के

बाद, उन्होंने इलाके में भारत का प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित कर दिया। अरुणाचल

प्रदेश सरकार के इस फैसले का भारतीय सेना प्रमुख ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि

यह भारतीय सेना के मनोबल बुद्धि के लिए बहुत अच्छा काम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अरुणाचल प्रदेश की सरकार

की बहुत प्रशंसा की है।



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