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इंसान के दिमाग में फिर पाये गये टेपवर्म के असंख्य कीड़े







  • एमआरआइ से नजर आये सात सौ अंडे
  • शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैले है कीड़े
  • फरीदाबाद में भी मर गया था एक किशोर
  • अधपका मांस खाने से दिमाग तक पहुंचा कीड़ा
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः इंसान के दिमाग में फिर से टेपवर्म पाया गया है।

चूंकि डाक्टरों को इसकी पहचान पहले ही एक किशोर के ईलाज के दौरान हो चुकी थी।

इसलिए तुरंत ही दिमाग में कीड़ा होने का अंदेशा हो गया था।

जब दिमाग की जांच की गयी तो उसमें सात सौ से अधिक कीड़े पाये गये।

अच्छी बात यह है कि पिछली बार की तरह इस बार बीमार की मौत जैसी स्थिति नहीं आयी।

पता चलते ही पुराने अनुभव का फायदा उठाते हुए डाक्टरों ने उसका ईलाज किया और वह फिलहाल संकट से बाहर है।

43 वर्षीय झू झोंगफा को मिरगी आने की शिकायत पर अस्पताल में दाखिल कराया गया था।

प्रारंभिक दौर में ही डाक्टरों को इस इंसान के लक्षण देखकर ही डाक्टरों को दिमाग में कीड़ा होने का अंदाजा हुआ था।

एमआरआइ में इसकी पुष्टि भी हो गयी।

यह पाया गया कि दिमाग में कीड़ा होने के अलावा भी यही कीड़ा शरीर के अंदर के अन्य हिस्सों में भी फैल गया था।

अस्पताल में दाखिल होने के दौरान ही उसके मुंह से फेन आने तथा कभी भी बेहोश हो जाने की शिकायत थी।

बेहोश चांद पर नये जीवन की नई नींव पड़ी चीन के प्रयास से के झेजियांग प्रांत के इलाके से आने वाले इस व्यक्ति को वहीं के स्कूल ऑफ मेडिसीन में ईलाज के लिए लाया गया था।

इंसान के दिमाग में यह कीड़ा पहले भी मिला था

उसकी हालत देखते ही सबसे पहले उसके दिमाग का स्कैन किया गया था।

स्कैन में ही दिमाग में पनपते हुए कीड़े नजर आ गये थे।

बाद में उसके सीने में भी इस कीड़े के होने का पता चल गया।

इसी वजह से उसके मुंह से फेन आ रहा था। वह एक मजदूर है

जो किसी निर्माण कंपनी में काम करता है.

बाद में बता चला कि उसने अधपका शूकर का मांस (पॉर्क) खा लिया था।

इसी अधपके मांस में मौजूद कीड़े ही उसके पेट से होते हुए उसके दिमाग तक पहुंच गये थे।

डाक्टरों को यह एहसास सिर्फ इसलिए हो पाया

क्योंकि इस किस्म का इंसान पहले भी पकड़ में आया था।

उस वक्त एक किशोर भी इसी तरह टेपवर्म की चपेट में आया था।

काफी विलंब से उसकी बीमारी पकड़ में आने की वजह से उसे बचाया नहीं जा सका था।

कुछ ऐसी ही शिकायत सिंगापुर और भारत से भी मिली थी।

लिहाजा इसी आधार पर त्वरित ईलाज की वजह से इस मरीज की जान बच गयी है।

डाक्टर मानते हैं कि उसके शरीर में अब भी कीड़े और उसके अंडे मौजूद हैं,

जिन्हें बारी बारी से और काफी सावधानी के साथ निकाला जा रहा है।

खास इलाकों में सीमित होने की वजह से उन्हें शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने का इंतजाम भी किया गया है।

इस पूरे घटना के बारे में डाक्टरों ने बताया है कि अधपका और कीड़ायुक्त मांस खाने की वजह से यह कीड़ा उसकी आंत तक गया था।

वहां से खून में घुलने के बाद वह ऊपर दिमाग तक पहुंच गया था।

वहां की परिस्थितियां कीड़े की वंशवृद्धि के लायक थी।

इसी वजह से वहां सात सौ से अधिक कीड़े पैदा हो गये थे।

एम आर आइ से नजर आये सात सौ से अधिक अंडे भी

शरीर के अंगों को क्षतिग्रस्त होने से बचाने का उपाय करने के बाद इन कीड़ों को मारने की दवा दी गयी है।

साथ ही इस कीड़े के बच्चों को समाप्त करने का अलग से दवा दिया जा रहा है।

एक सप्ताह के ईलाज के बाद मरीज की स्थिति का दोबारा विश्लेषण करने के बाद शरीर में मौजूद अन्य कीड़ों को समाप्त करने की दिशा में काम किया जाएगा।

फिलहाल दिमाग को कीड़ों से बचाना का काम ही डाक्टर कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत के फरिदाबाद में एक कम उम्र का बच्चा भी इसी तरह मर गया था।

उसके भी दिमाग में कीड़े पनप गये थे। लेकिन वह काफी देर से ईलाज के लिए पहुंचा था। इस वजह से उसे बचाया नहीं जा सका था।



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