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ब्रेन में फीता कृमि का एक और मामला सामने आया







  • वह गयी थी ब्रेन ट्यूमर के लिए अंदर निकला कीड़ा

  • जनवरी 2018 से परेशान थी महिला

  • सामान्य जांच में ट्यूमर दिखा था

  • खोपड़ी खुली तो कीड़ा भी नजर आया


प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ब्रेन में फीता कृमि (टेप वर्म) पाये जाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है।

इस बार एक महिला का पता चला है जो अपने ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन कराने अस्पताल में दाखिल हुई थी।

ऑपरेशन के पूर्व होने वाली जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि दरअसल उसके ब्रेन के अंदर भी एक टेप वर्म पनप रहा है।

यह घटना न्यूयार्क के अस्पताल की है। राचेल पाल्मा नामक महिला पिछले साल के जनवरी माह से ही अनेक किस्म की परेशानियों से पीड़ित थी।

उसके अंदर सारे ऐसे पहचान नजर आ रहे थे जो आम तौर पर दिमागी परेशानी के होते हैं।

उसे रह रहकर चक्कर आने के अलावा भ्रम होने, नींद नहीं आने, कुछ याद नहीं रख पाने और किसी भी चीज को पकड़ने में परेशानी हो रही थी।

अनेकों बार डॉक्टरों से मिलने और दवा लेने के बाद भी उसमें कोई सुधार नहीं हुआ।

इस वजह से वह माउंट सिनाई के अस्पताल में गयी।

जहां एक विशेषज्ञ ने गहन जांच के बाद बताया कि उसके ब्रेन में एक स्थान पर ट्यूमर जैसा कुछ नजर आ रहा है।

इसी आधार पर यह समझा गया था कि उसके परेशानियों की असली वजह उसके ब्रेन का यह ट्यूमर ही है।

इसी निष्कर्ष के आधार पर उसके ट्यूमर का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया था।

ऑपरेशन के पहले जब डाक्टरों ने दोबारा से पूरी स्थिति की जांच की

जो उनलोगों ने प्रभावित हिस्से के एक छोटा से रेशा निकालकर उसके जांच के लिए भेजा।

ऑपरेशन के लिए डाक्टरों ने उसके खोपड़ी खोल दी थी।

ब्रेन के उस रेशे की वजह से चिकित्सकों को नये सिरे से अंदर की स्थिति के बारे में संदेह हुआ।

ब्रेन के इस टेप वर्म को डॉ जोनाथन ने पहले देखा

अस्पताल के मुख्य न्यूरोसर्जन डॉ जोनाथन रासौली ने इस घटना के बारे में बताया कि

ब्रेन के उस उत्तक को जब माइक्रोस्कोप के अंदर डालकर देखा गया तो वह टेपवर्म का बच्चा नजर आया।

इसके बाद ही सारे डाक्टर सतर्क हो गये। वैसे मरीज को भी यह बता दिया गया था कि

उसके ब्रेन में कोई ट्यूमर नहीं है।

सिर्फ ब्रेन के अंदर टेपवर्म पाये जाने के बाद सावधानी से इस फीताकृमि को बाहर निकाल लिया गया।

मरीज के पूरी तरह ठीक होने के बाद भी ब्रेन के अंदर इस किस्म के परजीवी के पहुंचने के कारणों की जांच विशेषज्ञ अब भी कर रहे हैं।

उनके मुताबिक आम तौर पर यह कैसे संभव हुआ, इसे समझना जरूरी है।

इस मरीज यानी राचेल के बारे में उसी से मिली जानकारी के आधार पर

डाक्टर यह मान रहे हैं कि संभवतः पोर्क खाने के दौरान ही यह कीड़ा

उसके पेट से होते हुए उसके ब्रेन तक पहुंच गया था।

वहां विकसित होने के बाद वह बच्चा भी देने लगा था।

दुनिया भर में खान पान की गड़बड़ी से टेप वर्म शरीर के अंदर आता है

उल्लेखनीय है कि इसी किस्म की कई घटनाएं हाल के दिनों मे दुनिया भर से

सामने आयी हैं।

इनमें भारत के फरीदाबाद के एक युवक की भी घटना शामिल है।

सिंगापुर के एक मामले में एक व्यक्ति के पेट से नौ फीट लंबा यानी

उस इंसान की लंबाई से भी बड़ा टेपवर्क निकाला गया है।

चीन में भी ऐसी कई घटनाएं सामने आयी हैं।

विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि पानी की गंदगी और अस्वच्छ सब्जी

अथवा मांस खाने की वजह से यह टेपवर्म इंसान के पेट तक पहुंचता है।

अपनी प्राकृतिक संरचना की वजह से वह अत्यंत क्षुद्र आकार का होने के बाद शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है।

इंसानी शरीर से भी अपनी पौष्टिकता ग्रहण करने के बाद वह अपना और अपने वंश की वृद्धि करने लगता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर चिकित्सा सुविधा से दूर वाले इलाकों में

अधिकांश ऐसे मामलों में शायद बीमार को पता ही नहीं चल पाता है कि

उसकी असली बीमारी क्या है।

सही ईलाज नहीं मिल पाने की वजह से इन्हीं कीड़ों की वजह से

वह अकाल मृत्य को प्राप्त होता है।


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