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तमिलनाडू सरकार के फैसले से राज्य में पेट्रोल तीन रुपये सस्ता हुआ




  • कर के घाटे का बोझ उठायेगी राज्य सरकार

  • एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार का बजट

  • जनता को राहत पहुंचाने की दिशा में पहला कदम

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडू सरकार के एक फैसले से पूरे तमिलनाडू की जनता को राहत मिली है।




मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने एक फैसले में इन इंधनों पर लगने वाले राज्य कर के

हिस्से में कटौती करते हुए जनता को यह राहत दिलायी है। राज्य सरकार के इस फैसले से

अब तमिलनाडू में पेट्रोल तीन रुपये प्रति लीटर सस्ता हो गया है। तमिलनाडू के वित्त मंत्री

पालानिवेल थियागराजान ने इसकी घोषणा की है।  उन्होंने राज्य में बजट पेश करते हुए

कहा कि राज्य सरकार ने जनता को राहत प्रदान करने के लिए ऐसा फैसला लिया है। 

इससे राज्य को इस मद में मिलने वाले कर में 1160 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

उठाना पड़ेगा। फिर भी जनता को राहत देने के मकसद से राज्य सरकार ने ऐसा फैसला

लिया है। उन्होंने कहा कि पूरे तमिलनाडू में 2.6 करोड़ लोग स्कूटरों का इस्तेमाल करते हैं।

इन करोड़ों लोगों को राहत दिलाना ही इस फैसले का मुख्य मकसद है। डीएमके सरकार

की तरफ से वह राज्य में पहला बजट पेश कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस बार के

विधानसभा चुनाव में एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने स्पष्ट बहुमत के साथ

चुनाव जीता है। चुनावी घोषणा पत्र में भी पार्टी ने जनता को हर स्तर पर राहत देने की

बात कही थी। अब इस फैसले से निश्चित तौर पर सरकार ने जनता के लिए राहत का बड़ा

फैसला लिया है।  देश में लगातार पेट्रोलजनित इंधनों के दामों में बढ़ोत्तरी के बीच बार




बार सरकारों द्वारा कर का बोझ कम करने की मांग की जाती रही है।  विपक्ष में रहते हुए

इसी मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस की सरकार पर लगातार हमले किये थे। अब सत्तारूढ़ होने

के बाद भाजपा के नेता पेट्रोल के दाम बढ़ने के सवाल से चिढ़ जाते हैं।

तमिलनाडू सरकार ने कर छोड़ने की पहल की पूरे देश में

सभी राज्यों में राज्य सरकारों से भी अपनी जेब ढीली करने की मांग की जाती रही है।

तमिलनाडू ने इसकी पहल कर शायद अन्य गैर भाजपा शासित राज्यों को रास्ता दिखाया

है। देश के कई राज्यो में पेट्रोल की कीमत एक सौ के करीब है। वैट और परिवहन खर्च की

वजह से अलग अलग राज्यो में इसकी अलग अलग दरें होती है। दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय

बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 19 डॉलर तक पहुंचने के बाद भी सरकार की तरफ से

उपभोक्ताओं को कोई राहत प्रदान नही की गयी है। उदाहरण के तौर पर देखें तो पेट्रोल के

मूल दाम में वैट और कर का हिस्सा ही सबसे ज्यादा होता है। देश में बढ़ती महंगाई की

एक वजह इंधनों के दामों में बढ़ोत्तरी भी है। इसके बाद भी तमिलनाडू के पहले किसी

अन्य सरकार ने जनता के हक में ऐसा फैसला नहीं लिया है। कांग्रेस सहित अन्य विरोधी

दल लगातार इस मुद्दे पर भाजपा सरकार पर हमले तो कर रहे हैं लेकिन तमिलनाडू के

जैसा फैसला तो किसी कांग्रेस शासित राज्य में अब तक नहीं लिया गया है।



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