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संपादकीय

चुनाव पर आधारित बजट से ग्रामीण विकास का ध्यान

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट की आलोचना तो अब विरोधी भी सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं। वैसे इस पूरे घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बात स्पष्ट हो रही है, जिसमें उन्होंने बजट को चुनाव के बाद पेश करने के…

अंधेरे में जो बैठे हैं नजर उनपर भी कुछ डालो

अपने जमाने में वामपंथी गीत के तौर पर चर्चित हुआ था यह गाना- अंधेरे में जो बैठे हैं, नजर उनपर भी कुछ डालो, अरे ओ रोशनी वालों। यह हाल रांची का है। हर स्तर पर घोषणा के बाद भी बड़े अजीब किस्म के बिजली गुल हो रही है। पहले तो लोग इस बात को याद…

बर्बादी रोकने की पहल हो

देश में नये सिरे से अकाल की आहट सुनायी पड़ने लगी है। मॉनसून के बीच में ही गुम हो जाने की वजह से खेतों में लगी फसल को नुकसान हो रहा है। मध्यभारत के कुछ इलाकों में मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद भी पीली पड़ चुकी धान की बालियों में अब कितनी…

पेंशन पर निरंतर ‘टेंशन’

अंतत: सरकार ने सेना के लिए एक पद के लिए एक समान पेंशन की मांग को स्वीकार कर लिया। वैसे इस मुद्दे पर आंदोलनकारी पूर्व सैनिकों और सरकार के बीच अब भी मतभेद की स्थिति हैं, जिसे दोनों ही पक्ष सुलझाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। इतने लंबे समय तक…

इंतहा हो गयी ‘ ‘ इंतेजार ‘ ‘ की

भाई को खतरनाक किस्म के विस्फोटकों के साथ गिरफ्तार किये थे। यह भी बताया था कि वह खतरनाक किस्म का आतंकवादी है, स्लीपर सेल का सदस्य है, वगैरह वगैरह। अब दस दिनों में सारा खेल ही उल्टा हो गया। बेचारा झोलाछाप डाक्टर निकला। बड़ी बड़ी बातें हुई थी,…

भाजपा की राजनीति और मुलायम

जनता दल को एक करने की जिम्मेदारी जिस नेता पर थी, वह मुलायम सिंह यादव ही अब नाराज हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की उपेक्षा की वजह से यह नाराजगी जाहिर की है। दूसरी तरफ भाजपा ने भी बिहार चुनाव से फुर्सत होते ही उत्तर…

रैली में किसका स्वाभिमान कितना

पटना में भाजपा विरोधी दलों की स्वाभिमान रैली की सफलता और असफलता के परस्पर विरोधी दावे हो रहे हैं। वैसे इस रैली से उभरे स्वर एकबार फिर यह साबित कर गये कि राजनीति के केंद्र में अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं। जिसके पक्ष और विपक्ष में…

आ देखें जरा किसमें कितना है दम

चलो पहला राउंड तो जैसे तैसे ड्रा हो गया। सत्र की समाप्ति नहीं होती तो शायद दूसरा राउंड भी चालू हो जाता। अब सभी अपने अपने इलाके में जाओ, प्राण वायु का संधारण करो और दोबारा मैदान में भिड़ने की पूरी तैयारी करने आना। यूं भी जैसे-जैसे बिहार का…

स्मार्ट सिटी में पिछड़ा झारखंड

पूरे झारखंड राज्य में सिर्फ रांची को ही स्मार्ट सिटी बनाने के लिए पहले चरण में चुना गया है। दूसरी तरफ बिहार में मुजफ्फरपुर और भागलपुर का चयन हुआ है। जाहिर है कि पहले चरण में झारखंड से जमशेदपुर और धनबाद तथा बोकारा में से किसी एक को चुना जाना…

अन्ना का आंदोलन समाप्त, अब देश में किसान ही बने राष्ट्रीय बहस के केंद्र

समाजसेवी अन्ना हजारे ने अंतत: अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस के आग्रह पर अपना अनशन समाप्त किया। इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार करने की भी बात कह दी। देश भर में किसानों…

बाबूजी जरा धीरे चलो बिजली खड़ी यहां .. .. .. ..

बिजली तो गिर पड़ी भाई। इस बिजली के गिरने से क्या क्या हुआ, इसकी जानकारी जरूरी है। किस पर गिरी, कैसे गिरी इस पर तो चर्चा होगी ही लेकिन इस बिजली से कौन कौन घायल हुआ, उसकी सूची तो जारी हो जाने दो। वैसे भी इन दिनों सब जगह पता नहीं क्यों बहुत…

गंभीर सवालों के घेरे में चुनाव आयोग, ट्विटर पर आयोग से पहले सूचना कैसे ?

चुनाव आयोग अपने जीवन में पहली बार विश्वसनीयता की चुनौती के सामने खड़ा है। इससे पहले भी आयोग पर राजनीतिक दल आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन आरोप राजनीतिक होने की वजह से उनकी कोई खास प्रतिक्रिया नहीं हुई है। हाल के कई घटनाक्रमों ने जनता के बीच यह…

भारतीय अर्थव्यवस्था दोगुनी करने की सामाजिक चुनौती से ही होगा काम

देश के वित्त मंत्री भारतीय अर्थव्यवस्था को सवा तीन सौ करोड़ खरब डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए वर्ष 2025 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक तरक्की के रफ्तार को आठ…

देश में खेती पर ध्यान समय की मांग, इससे बहुआयामी राष्ट्रीय फायदे होंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री राधामोहन सिंह दोनों ने ही किसानों के लिए अपना वादा दोहराया है। श्री मोदी ने किसानों को इस बात का भरोसा दिलाया है कि इस बार बजट में किसान को फसलों का उचित मूल्य दिलाने का बड़ा निर्णय लिया गया है और तय…

फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका, सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल असली दोषी कौन

इनदिनों फेसबुक और उसके संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के साथ साथ कैम्ब्रिज एनालिटिका की खूब चर्चा हो रही है। भारतीय राजनीति का सबसे रोचक प्रसंग शायद यही है। लेकिन आम जनता की प्राथमिकताएं इसमें पीछे छूट रही हैं। पूरी दुनिया की राजनीति में यह दोष…

ग्रेच्युटी के साथ नौकरी की गारंटी भी हो, नौकरीपेशा लोगों के लिए अवसर

सरकार ने एक कैबिनेट के फैसले से नौकरी करने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी की सीमा बढ़ा दी है। यह अच्छी बात है। काफी लंबे समय तक नौकरी करने के बाद जब लोग सेवानिवृत्त होते हैं तो उनके पास बचत के नाम पर बहुत कम धन उपलब्ध होता है।