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स्विस बैंक में भारतीय पूंजी बीस हजार करोड़ बढ़ी

स्विस बैंक में भारतीय पूंजी बीस हजार करोड़ बढ़ी
  • पता चला भारतीय पैसा तेरह साल में सबसे अधिक

  • लगातार दो वर्षों से बढ़ रही है पूंजी

  • दूसरे ग्राहकों की जमा दर अब कम

  • भारत ने भी नहीं बताये उनके नाम

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः स्विस बैंक के नये आंकड़े यह बताते हैं कि इस साल भारतीय नागरिक अथवा

कंपनियों द्वारा वहां जमा करायी गयी रकम पहले के मुकाबले बीस हजार करोड़ अधिक

है। वैसे इस बैंक का अपना उपभोक्ता जमा अभी कम हुआ है। लेकिन भारतीय परिपेक्ष्य

में यह रकम पिछले तेरह वर्षो मे सबसे अधिक है। इसकी घोषणा करने के साथ साथ ही

स्विस बैंक ने यह साफ कर दिया है कि स्विस बैंक में रखी पूंजी को काला धान नहीं कहा

जाना चाहिए क्योंकि यह बैंक भारतीय एजेंसियों की कर चोरी तथा अन्य गड़बड़ियों में

लगातार सहयोग करता आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष में भारतीयों द्वार इस

बैंक में जमा की गयी रकम अधिक थी लेकिन इस साल का आंकड़ा तेरह वर्षों में सर्वाधिक

है। भारतीय नागरिक अथवा कंपनियों द्वारा यह पैसा भारत में स्थित बैंक शाखाओं

अथवा अन्य माध्यमों से जमा की गयी है। यह आंकड़ा स्विस मुद्रा में 2.55 बिलियन फ्रैंक

यानी भारतीय मुद्रा में बीस हजार सात सौ करोड़ अधिक है। वैसे स्विस बैंक की आर्थिक

गति इनदिनों ढलान पर नजर आ रही है क्योंकि उसके अपने ग्राहकों की जमा रकम धीरे

धीरे घटती जा रही है। वैसे यह आंकड़ा जारी करने के बाद भी बैंक ने उन भारतीय ग्राहकों

अथवा कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किये हैं। यह बैंक की अपनी गोपनीयता की शर्त

है। इसी शर्त की वजह से अनेक भारतीय पूंजीपतियों की रकम वहां के बैंकों में जमा है। इस

जमा पूंजी को ही अनेक माध्यम भारत से अर्जित काला धन ही बताते हैं। अपुष्ट चर्चाओं

के मुताबिक इनमें पूंजीपतियों के अलावा देश के नेताओं का भी पैसा है। जिसका खास

उपयोग सिर्फ चुनाव के वक्त किया जाता है। शेष समय में यह पैसा स्विस बैंक में ही पड़ा

रहता है।

स्विस बैंक की तरफ से इसे काला धन कहने पर आपत्ति है

यह धन भी भारत में प्रचलित स्वच्छ व्यापार के तौर तरीकों से भिन्न होकर ही कमाया

गया है, ऐसा आरोप पहले से ही लगते आ रहे हैं। भारतीय नागरिक अथवा कंपनियों द्वारा

वहां जमा करायी गयी रकम का बढ़ना वर्ष 2019 से प्रारंभ हुआ था। उससे पूर्व यह जमा

पूंजी कम होती पायी गयी थी। स्विस बैंक ने इन जमाकर्ताओं मे कितने भारतीय है अथवा

कितने एनआरआई हैं, इसका भी खुलासा नहीं किया है। स्विस बैंक का दावा है कि वर्ष

2018 से ही वह संदिग्ध खातों के बारे में भारतीय एजेंसियों को जानकारी देता आ रहा है।

इसलिए वहां जमा पूंजी को अब काला धन नहीं कहा जाना चाहिए। वैसे इस एलान के बाद

भी भारत सरकार की तरफ से यह नहीं बताया गया है कि स्विस बैंक की तरफ से किस

किसके खातों की जानकारी दी गयी है।

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