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स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं के लिए आदर्श : डॉ मुनीष







हजारीबाग : हजारीबाग लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। लोगों को एहतियात बरतने की सलाह भी दी जा रही है। लोगों को एहतियात बरतने की सलाह भी दी जा रही है। इसी के मद्देनजर आईसेक्ट विश्वविद्यालय, हजारीबाग के एनएसएस इकाई के बैनर तले स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बूधवार को राष्ट्रीय युवा दिवस जूम एप के जरिए वर्चूअल रूप में मनाया गया।

दरअसल 1985 ई0 में भारत सरकार की घोषणा के बाद हर 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जयंती के मौके पर देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। बड़ी संख्या में इस एप के जरिए विद्यार्थी भी जुड़े। सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत हुई।

कला एवं मानविकी संकाय के डीन डॉ रूद्र नारायण ने कार्यक्रम की शुरूआत में स्वागत भाषण दिया और विवेकानंद के जीवन से सभी को अवगत कराया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने आज के युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद के जीवन को आदर्श बताया।

उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा के साथ साथ अपने रूचि वाले क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए ताकि खुद के लिए भी और देश के लिए भी उसके योगदान को सुनहरे अक्षरों में लिखे जाएं।

उन्होंने कहा कि 1893 ई. में शिकागो में हुए धार्मिक सम्मेलन में जब स्वामी विवेकानंद ने भारत और हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व किया तो उनके विचारों से पूरी दुनिया उनकी ओर आकर्षित हुई। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीके नायक ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए।

साथ ही बतौर नागरिक सभी की ओर से उसे आगे बढ़ाने के निरंत प्रयास किए जाने चाहिए, लेकिन हावी होती पाश्चात्य सभ्यता के बीच स्वामी विवेकानंद के जीवन से सीख लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो भाषण के पहले और बाद में यानी हमेशा भारतीय संस्कृति के साथ साथ अध्यात्म का विस्तार पूरी दुनिया में किया, जो किसी मिसाल से कम नहीं है। सएस इकाई के बैनर तले स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बूधवार को राष्ट्रीय युवा दिवस जूम एप के जरिए वर्चूअल रूप में मनाया गया।

स्वामी विवेकानंद के जयंती के मौके पर देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है

दरअसल 1985 ई0 में भारत सरकार की घोषणा के बाद हर 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जयंती के मौके पर देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। बड़ी संख्या में इस एप के जरिए विद्यार्थी भी जुड़े। सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत हुई।

कला एवं मानविकी संकाय के डीन डॉ रूद्र नारायण ने कार्यक्रम की शुरूआत में स्वागत भाषण दिया और विवेकानंद के जीवन से सभी को अवगत कराया। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने आज के युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद के जीवन को आदर्श बताया।

उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा के साथ साथ अपने रूचि वाले क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए ताकि खुद के लिए भी और देश के लिए भी उसके योगदान को सुनहरे अक्षरों में लिखे जाएं।

उन्होंने कहा कि 1893 ई. में शिकागो में हुए धार्मिक सम्मेलन में जब स्वामी विवेकानंद ने भारत और हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व किया तो उनके विचारों से पूरी दुनिया उनकी ओर आकर्षित हुई। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीके नायक ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए।

साथ ही बतौर नागरिक सभी की ओर से उसे आगे बढ़ाने के निरंत प्रयास किए जाने चाहिए, लेकिन हावी होती पाश्चात्य सभ्यता के बीच स्वामी विवेकानंद के जीवन से सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो भाषण के पहले और बाद में यानी हमेशा भारतीय संस्कृति के साथ साथ अध्यात्म का विस्तार पूरी दुनिया में किया, जो किसी मिसाल से कम नहीं है।



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