Press "Enter" to skip to content

सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न से उत्तरप्रदेश सरकार का सरदर्द बढ़ा




पांच हजार की भीड़ में सिर्फ 23 गवाह क्यों
अन्य मौतों पर भी अलग से रिपोर्ट मांगी गयी
हरीश साल्वे उपस्थित हुए राज्य सरकार की तरफ से
घटना में घायल गवाहों के बारे में भी अदालत ने सवाल पूछे
राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न ने उत्तरप्रदेश सरकार की परेशानी बढ़ा दी है, ऐसा प्रतीत होता है। लखीमपुर खीरी के हाई प्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए आज शीर्ष अदालत ने उत्तरप्रदेश से यह सवाल पूछा है।




दरअसल घटनास्थल पर करीब पांच हजार लोगों की भीड़ होने का दावा करने के बाद इस मामले में सिर्फ 23 गवाह क्यों हैं, यह सवाल उत्तरप्रदेश सरकार के साथ साथ जांच करने वाली पुलिस के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है।

इस सवाल के साथ साथ सुप्रीम कोर्ट ने उस घटना में मारे गये एक व्यक्ति श्याम सुंदर और एक पत्रकार की मौत पर अद्यतन रिपोर्ट की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न का मसला तब सामने आया जब इस मामले की सुनवाई में यह पाया गया कि पुलिस ने सिर्फ 23 लोगों को ही बतौर प्रत्यक्षदर्शी गवाह बनाया है।

याद दिला दें कि लखीमपुर खीरी की इस घटना में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के पुत्र आशीष मिश्र पर आरोप है कि उसने किसानों की भीड़ पर पीछे से आकर अपनी गाड़ी चढ़ा दी थी। बाद में पुलिस ने आशीष मिश्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

प्रारंभ में मंत्री और उनके पुत्र ने घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं होने की बात कही थी। लेकिन तकनीकी जांच में यह बात सामने आयी है कि घटना के वक्त आशीष मिश्र का मोबाइल लोकेशन घटनास्थल के पास था।

दूसरी तरफ जिस दंगल में उपस्थित होने की दलील दी गयी थी, वहां के लोगों ने भी कहा कि दोपहर दो बजे से चार बजे तक आशीष मिश्र वहां मौजूद नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न में छिपे हुए हैं कई संकेत भी

सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न की गंभीरता इस वजह से भी अधिक है क्योंकि इस मामले की सुनवाई करते हुए खुद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना ने तीन जजों की खंडपीठ के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है।




उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मामले की सुनवाई में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि घटना के वक्त उस स्थान पर सबसे करीब जो लोग मौजूद थे और जिन्होंने उस गाड़ी को देखा है, उनकी कुल संख्या 23 है। वैसे इस मामले में इन 23 लोगों को मिलाकर सरकार ने कुल 68 लोगों को गवाह बनाया है।

इनमें से तीस लोगों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराये जा चुके हैं। श्री साल्वे ने सरकार की तरफ से यह भी दलील दी कि इस घटना के बारे में कई वीडियो सामने आये हैं।

इसलिए जांच के लिए हर वीडियो का सही फ्रेम हासिल करने का काम चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न के दौरान ही इस खंडपीठ के जज सूर्यकांत ने सरकार से कहा कि वहां मौजूद पांच हजार लोगों में से अनेक लोग ऐसे हो सकते हैं, जो खुद से आगे नहीं आयेंगे।

लेकिन जांच होने पर हो सकता है कि इनमें से अनेक लोग सामने आयेंगे और यह बतायेंगे कि उनलोगों ने आखिर क्या देखा है।

कुछ घायल गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं

इस बीच उत्तर प्रदेश की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने कहा कि इस घटना के सिलसिले में सात अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न में यह भी शामिल था कि इस घटना मे क्या कोई भी घायल गवाह नहीं था। इस पर हरीश साल्वे ने अदालत को बताया कि घटना में कुछ घायल गवाह हैं। इनलोगों में से एकाध ने धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराया है।

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की गंभीरता को समझते हुए इस मामले में और गवाहों की तलाश की जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया कि इन गवाहों की सुरक्षा का इंतजाम किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 8 नवंबर को होगी।



More from अदालतMore posts in अदालत »
More from उत्तरप्रदेशMore posts in उत्तरप्रदेश »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from दिल्लीMore posts in दिल्ली »

Be First to Comment

Leave a Reply

%d bloggers like this: