fbpx Press "Enter" to skip to content

किसान आंदोलन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दो टूक फैसला




  • आंदोलनकारियों ने कहा इस पर बैठकर निर्णय लेंगे

  • केंद्र के बने कानूनों पर रोक लगायी कमेटी बनायी

  • गठित कमेटी में सरकार समर्थक लोग सदस्य

  • कांग्रेस ने कमेटी के सदस्यों पर सवाल उठाये

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः किसान आंदोलन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दो टूक फैसला आया। इस फैसले

का संकेत तो अदालत ने बीते दिन ही सुनवाई के दौरान कर दिया था। इसके तहत शीर्ष

अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा अमल में लाये गये तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगाने का

आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही इस पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट देने के

लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा गठित इस कमेटी में बेकीयू

अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति

अनुसंधान संस्थान के डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन के

अनिल धनवट हिस्सा होंगे। कमेटी के गठन के आदेश के बाद से ही समिति के सदस्यों पर

सवाल भी उठने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट की बनाई कमेटी में कई ऐसे सदस्य हैं, जोकि पहले ही

सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं। इनमें से कुछ ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह

तोमर से मुलाकात करके अपना समर्थन जताया था तो किसी ने कानूनों के पक्ष में बयान

दिया था। हालांकि, इस बीच किसान नेताओं ने अभी स्पष्ट नहीं किया है कि क्या वे

सरकार की बनाई कमेटी की बात की तरह कोर्ट की कमेटी का भी विरोध करेंगे या फिर

उसके पास जाकर कानूनों की कथित कमियों की जानकारी देंगे। कमेटी के सदस्य और

बीकेयू के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान पहले कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं। 14

दिसंबर को हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु से किसानों ने कृषि मंत्री से मुलाकात

की थी। उन्होंने कुछ संशोधनों के साथ कानूनों को लागू करने की मांग की थी। यह किसान

संगठन ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले कृषि मंत्री से मिला था। इसके

अभी चेयरमैन भूपिंदर सिंह मान हैं। इसके अलावा, मान ने कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को पत्र

लिखा था।

किसान आंदोलन के मुद्दे पर पहले ही जता चुके हैं समर्थन

इसमें उन्होंने कहा था, ”आज भारत की कृषि व्यवस्था को मुक्त करने के लिए पीएम नरेंद्र

मोदीजी के नेतृत्व में जो तीन कानून पारित किए गए हैं, हम इन कानूनों के पक्ष में सरकार

का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं। कमेटी के सदस्यों में एक शेतकारी संगठन के

अनिल धनवट भी हैं। उन्होंने पिछले महीने कहा था कि केंद्र सरकार को कृषि कानूनों को

वापस नहीं लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सदस्यों पर राजनैतिक

दलों ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक किसी नेता का बयान

नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस ने ट्विटर हैंडल पर सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने

ट्विटर पर लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के सभी सदस्य पहले ही कृषि

बिल का समर्थन कर चुके हैं। ट्वीट में सरकार पर किसानों के साथ साजिश करने का भी

आरोप लगाया गया है। वहीं, कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद भारतीय किसान यूनियन के

प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने भी कहा कि वे किसानों के साथ बातचीत करेंगे

और कमेटी में कौन-कौन सदस्य शामिल हैं, इसके बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे।



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from अदालतMore posts in अदालत »
More from कृषिMore posts in कृषि »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from दिल्लीMore posts in दिल्ली »
More from राजनीतिMore posts in राजनीति »
More from व्यापारMore posts in व्यापार »

Be First to Comment

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: