सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल मामले में फैसला सुरक्षित रखा

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गोपनीय दस्तावेजों के सार्वजनिक होने पर प्रशांत भूषण की याचिका

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल विमान सौदे में गोपनीय दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के मामले मे अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण एवं अन्य ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

सरकार का इस मामले में तर्क है कि इस गोपनीय दस्तावेजों पर सर्वोच्च न्यायालय में

बहस नहीं हो सकती है और उन्हें अदालत में बिना अनुमति के दाखिल भी नहीं किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि इन दस्तावेजों को सबसे पहले अंग्रेजी दैनिक द हिंदू के संपादक एन राम ने

अपनी रिपोर्ट के साथ प्रकाशित किया था। इस खबर में यह बताया गया था

कि इस गोपनीय दस्तावेजों से ही यह प्रमाणित हो जाता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का

राफेल विमान सौदे में सीधा हस्तक्षेप था।

इसी वजह से भारत को इन विमानों की खरीद में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

दस्तावेजों में कई विशेषज्ञों द्वारा इस किस्म की समानांतर वार्ता किये जाने को भी देश की सुरक्षा के लिए गलत बताया गया था।

इस दस्तावेजों के साथ खबर के प्रकाशित होने पर सरकार ने पहले यह दलील दी थी कि

ये दस्तावेज चोरी चले गये हैं।

बाद में इस दलील को सुधारकर सरकार की तरफ से एटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि

इन दस्तावेजो की फोटो कॉपी की गयी है और दस्तावेज सुरक्षित हैं।

आज इस बारे में श्री वेणुगोपाल ने फिर से साक्ष्य कानून की धारा 123 का हवाला देते हुए

कहा कि इनके आधार पर दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

इस पर न्यायमूर्ति जोसफ ने साफ किया कि सारे कानून भ्रष्टाचार के मामले में एक जैसा लागू होते हैं।

इसलिए सरकार की यह दलील अस्वीकार्य है।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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