सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया बीसीसीआइ में एक राज्य एक मत का नियम

सुप्रीम कोर्ट का डंडा
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  • लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करें सभी

  • एक राज्य एक मत का नियम खारिज

  • नियम नहीं मानने पर सजा की चेतावनी

  • सीओए करेगी नियमों की निगरानी

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) और राज्य क्रिकेट संघों को बड़ी राहत देते हुये



‘एक राज्य एक मत’ के नियम को खारिज कर दिया।

लोढा समिति के भारतीय बोर्ड के लिये बनाये गये संविधान के मसौदे को भी कुछ सुधारों के साथ अपनी मंजूरी दे दी।

सर्वाेच्च अदालत ने बीसीसीआई में संवैधानिक और आधारभूत सुधारों के लिये लोढा समिति का गठन किया था

जिसने अदालत के सामने अपनी सिफारिशें रखी थीं।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बोर्ड के लिये तैयार किये गये

संविधान के मसौदे को कुछ बदलावों के साथ मंजूरी दे दी।

अदालत ने साथ ही बीसीसीआई के राज्य सदस्यों को बड़ी राहत देते हुये एक राज्य एक मत के नियम को रद्द कर दिया है

मुंबई, सौराष्ट्र, वडोदरा और विदर्भ क्रिकेट संघों को स्थायी सदस्यता प्रदान कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार को चार सप्ताह के भीतर सुधार करने को कहा है

मुख्य न्यायाधीश ने तमिलनाडु सोसायटी के रजिस्ट्रार जनरल को चार सप्ताह के भीतर

नये संशोधित बीसीसीआई संविधान मसौदे को रिकार्ड करने के लिये निर्देश भी दिये हैं।

खंडपीठ में न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूण भी शामिल थे।

उन्होंने रेलवे, सेना और यूनिर्वसिटीज की स्थायी सदस्यता को भी बरकरार रखने का फैसला किया

जिसे पहले सर्वाेच्च अदालत द्वारा गठित लोढा समिति की सिफारिश पर रद्द कर दिया गया था।

सर्वाेच्च अदालत ने बीसीसीआई के पदाधिकारियों के लिये ‘कूलिंग आॅफ’ या दो कार्यकालों के बीच में

अंतर की समयावधि के नियम में भी बदलाव किये हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कोई भी अब सिर्फ दो कार्यकाल तक रह सकता है

संशोधित नियम के अनुसार बोर्ड का कोई शीर्ष पदाधिकारी अब एक के बजाय लगातार दो कार्यकाल तक पद पर बना रह सकता है।

अदालत ने साथ ही क्रिकेट संघों को आदेश दिये हैं कि वे 30 दिनों के भीतर बीसीसीआई के संविधान को लागू करें।

इसके लिये अदालत ने स्वयं गठित प्रशासकों की समिति(सीओए) को भी निर्देश दिये हैं कि

वह इस प्रक्रिया की निगरानी करे। राज्य संघों को नियम उल्लंघन करने की स्थिति में सजा के लिये भी चेताया गया है।

उल्लेखनीय है कि पांच जुलाई को अपने फैसले में सभी राज्य क्रिकेट संघों को

शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक लगायी थी।

वहीं पिछली सुनवाई मेंं तमिलनाडु क्रिकेट संघ(टीएनसीए) ने बीसीसीआई

एवं राज्य सघों के पदाधिकारियों के लिये कूलिंग आॅफ का विरोध किया था।

टीएनसीए ने साथ ही आर एम लोढा समिति के पदाधिकारियों के लिये 70 वर्ष की आयु तक पद पर रहने की सिफारिश का भी विरोध किया था।

हालांकि अदालत ने पदाधिकारियों के लिये 70 वर्ष की आयु निर्धारित करने के नियम को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा दूसरे भी सलाह दें

सर्वाेच्च अदालत ने इससे पहले बीसीसीआई के पदाधिकारियों और राज्य क्रिकेट संघों को भारतीय बोर्ड के नये संविधान के लिये अपनी सलाह देने के लिये भी कहा था

जो लोढा समिति की सिफारिशों की दिशा में हों।

लोढा समिति ने बीसीसीआई में आधारभूत ढांचें में बदलाव के लिये अपनी सिफारिशें अदालत के सामने रखी थीं

जिनमें से पहले एक राज्य एक मत के नियम सहित अधिकतर पर अदालत ने अपनी सहमति जताई थी।

हालांकि बाद में कई नियमों का विरोध हुआ जिसमें से एक राज्य एक मत नियम मुख्य था

क्योंकि महाराष्ट्र राज्य के ही अकेले तीन क्रिकेट संघ हैं

जिनकी टीमें रणजी सहित घरेलू टूर्नामेंटों में खेलती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करेगी सीओबी

उल्लेखनीय है कि न्यायाधीश मुकुल मुद्गल समिति की रिपोर्ट ने बीसीसीआई में ढांचागत बदलावों की सिफारिश की थी

जिसके लिये लोढा समिति का जनवरी 2015 में गठन किया गया था।

मुद्गल समिति वर्ष 2013 में दुनिया की सबसे बड़ी ट्वंटी 20 घरेलू क्रिकेट लीग आईपीएल में

स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी की जांच से जुड़ी थी।

शीर्ष अदालत ने 18 जुलाई 2016 को लोढा समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था।

सर्वाेच्च अदालत ने बोर्ड और राज्य संघो में सिफारिशों को लागू कराने के लिये फिर प्रशासकों की समिति(सीओए) का भी गठन किया था

जिसका काम इन सिफारिशों के लागू होने तक भारतीय बोर्ड का संचालन करना है।

पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय की अध्यक्षता वाली सीओए को

अब इन सिफारिशों को लागू कराने का जिम्मा सौंपा गया है जो निर्देशों के लिये फिर से अदालत से संपर्क कर सकती है।

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