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निर्मल हृदय मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया

रांचीः निर्मल हृदय से बच्चों को बेचे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को

नोटिस जारी किया है। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन राइट्स की ओर से

दायर याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय

पीठ ने यह आदेश दिया है।याचिका में झारखंड सरकार व अरुणाचल प्रदेश की सरकार को

प्रतिवादी बनाया गया है। जान लें कि 2018 में यहां से से बच्चा बेचने का मामला प्रकाश में

आया था। इसको लेकर कोतवाली थाना में प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी थी। सरकार ने

इस मामले की जांच का जिम्मा सीआइडी को सौंपा है।  मिशनरीज आफ चैरिटी की ओर से

रांची में चलाया जाने वाला बाल गृह है, जहां एक नवजात को डेढ़ लाख में बेचने का मामला

3 जुलाई 2018 को सामने आया था। मामले को बाद में सीआइडी को दे दिया गया।

जिसकी जांच अभी भी चल रही है। इस मामले में संलिप्त सिस्टर कौनसिलिया बाखला

और सिस्टर अनिमा इंदवार पुलिस की गिरफ्त में है। घटना के बाद से बाल गृह बंद है।

समाज कल्याण विभाग की ओर से इस केंद्र के साथ अन्य 15 बालगृहों को भी 2019 में बंद

करने का आदेश दिया था। निर्मल हृदय बाल गृह में एक नवजात को डेढ़ लाख में बेचने का

मामला 3 जुलाई 2018 को सामने आया था। यूपी के दंपती को बच्चा बेचने के मामले में

निर्मल हृदय की सिस्टर कौनसिलिया बाखला और सिस्टर अनिमा इंदवार को गिरफ्तार

किया गया था। अनिमा के पास से पुलिस ने 1।20 लाख रुपये बरामद किये थे।

निर्मल हृदय मामले को राज्य की सीआइडी ने जांचा है

सीआईडी ने बाद में इस केस को टेकओवर कर लिया। सीआईडी ने जांच के दौरान निर्मल

हृदय में छापे मारे। जिससे जानकारी हुई कि 1995 से 2018 तक निर्मल हृदय में

अविवाहित माताओं को एडमिट किया गया। उनसे जन्मे 927 नवजात शिशुओं के बारे में

निर्मल हृदय ने कोई जानकारी सीडब्ल्यूसी को नहीं दी।12 अक्टूबर 2019 को भी सीआईडी

ने सुबह आठ बजे छापेमारी की। देर रात तक चली छापेमारी के दौरान सीआईडी ने निर्मल

हृदय के कार्यालय से अविवाहित माता एडमिशन रजिस्टर, सदर अस्पताल में नवजात के

जन्म से संबंधित कागजात, एडॉप्शन से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किये। जांच के दौरान

सीआइडी ने बाल गृह के कर्मचारियों पर संदेह करते हुए साक्ष्य मिटाने की बात की थी।

इस जांच में सीआइडी ने 14 सरेंडर डीड भी बरामद किये थे। आरोप है कि निर्मल हृदय के

कर्मचारियों के द्वारा नवजात शिशुओं के बायलॉजिकल माता:पिता या अभिभावकों पर

दबाव बनवाकर अपने बचाव में स्टांप पेपर में सरेंडर डीड बनवा ली जाती थी।

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