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उच्चतम न्यायालय में अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी







  • नाटक भी खूब हुआ आज के दौरान
  • एक घंटे पहले खत्म हुई सुनवाई
  • मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट सौंपी
  • सुन्नी वक्फ बोर्ड की चिट्ठी पर हंगामा
  • कई प्रमुख लोगों की सुरक्षा बढ़ाई गयी

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया।

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन के ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ पर

अपनी जिरह पूरी करने के साथ ही

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में

सुनवाई पूरी हुई और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

इससे पहले हिन्दू पक्ष की ओर से श्री सी एस वैद्यनाथन, रंजीत कुमार और

सुशील जैन ने दलीलें पेश की।

उसके बाद श्री धवन ने अपनी जिरह पूरी की। अयोध्या मामले की सुनवाई 40 दिन चली है,

जो न्यायिक इतिहास में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है।

हिंदू महासभा के वकील वरुण सिन्हा ने बताया कि

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा हौ और मामले पर फैसला 23 दिन में आएगा।

अदालत में बुधवार को राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद मामले की लगतार 40वें दिन सुनवाई हुई।

पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई की।

आज सुनवाई शुरू होते ही मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने साफ कर दिया कि

आज शाम को पांच बजे मामले में अंतिम सुनवाई होगी।

हालांकि सुनवाई एक घंटे पहले चार बजे ही खत्म हो गई।

मुस्लिम और हिंदू पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने पेश कीं।

इस दौरान कोर्टरूम में ड्रामा देखने को मिला।

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने हिंदू महासभा के वकील द्वारा पेश किए गए

नक्शे को फाड़ दिया। इससे पहले मंगलवार को सीजेआई ने कहा था कि

सभी पक्ष 16 अक्तूबर तक मामले से संबंधित दलीलें पेश कर दें क्योंकि

फिर उन्हें फैसला लिखने में चार सप्ताह का समय लगेगा।

आज मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने अयोध्या मामले में एक पक्ष हिंदू महासभा के हस्तक्षेप के

आवेदन को खारिज करते हुए कहा, ‘यह मामला आज शाम को खत्म हो जाएगा।

बहुत हो चुका। हम और समय नहीं देंगे।’

उच्चतम न्यायालय में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय में अयोध्या विवाद की सुनवाई न्यायिक इतिहास की दूसरी सबसे लंबी सुनवाई हो गई है।

इससे पहले आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई 38 दिनों तक चली थी,

जबकि 68 दिनों की सुनवाई के साथ ही केशवानंद भारती मामला पहले पायदान पर बना हुआ है।

1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की

पीठ ने अपने संवैधानिक रुख में संशोधन करते हुए

कहा था कि संविधान संशोधन के अधिकार पर एकमात्र प्रतिबंध यह है कि

इसके माध्यम से संविधान के मूल ढांचे को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए।

अपने तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद यह सिद्धांत अभी भी कायम है और जल्दबाजी में किए जाने वाले

संशोधनों पर अंकुश के रूप में कार्य कर रहा है।

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य के मामले में 68 दिन तक सुनवाई हुई,

यह तर्क-वितर्क 31 अक्टूबर 1972 को शुरू होकर 23 मार्च 1973 को खत्म हुआ था।

आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष कोर्ट में

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की थी।

इस बेंच में न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और

न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल थे।

आधार मामले में 38 दिनों तक चली सुनवाई के बाद

गत वर्ष 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था,

जबकि इस पर गत वर्ष सितंबर में फैसला सुनाया गया था।

इस मामले में विभिन्न सेवाओं में आधार की अनिवार्यता की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी।

अयोध्या विवाद:राजीव धवन ने नक्शा, दस्तावेज फाड़े

उच्चतम न्यायालय में अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान पल पल बदलते

घटनाक्रम के बीच मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बुधवार को नक्शा और दस्तावेज फाड़ डाले।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़,

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष

ऑल इंडिया हिन्दू महासभा के वकील विकास कुमार सिंह ने कुणाल किशोर की

पुस्तक ‘अयोध्या रीविजिटेड’ पेश किए।

श्री धवन ने इस पर आपत्ति जताई, और न्यायालय से आग्रह किया कि इस पुस्तक को रिकॉर्ड में नहीं लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक हाल ही में लिखी गई है और

इसे साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जा सकता।

श्री सिंह ने फिर एक नक्शा का हवाला दिया, और इसे तय नियमों के तहत

मुस्लिम पक्ष के वकील को भी सौंपा। श्री धवन ने उस नक्शे को फाड़ दिया।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी भरे लहजे में उन्हें कहा, ‘‘कुछ और भी फाड़ दीजिए।

इसपर धवन ने और भी दस्तावेज फाड़ दिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

यदि ऐसे ही चलता रहा तो हम उठकर चले जाएंगे।



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