सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा लोकपाल के लिए नाम दें

सुप्रीम कोर्ट सारदा चिट फंड जांच की निगरानी नहीं करेगा
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  • प्रशांत भूषण की याचिका पर अटर्नी जनरल के दिये निर्देश

रासबिहारी

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लोकपाल के लिए नाम देने का निर्देश दिया है।

स्वयंसेवी संस्था कॉमन कॉज की तरफ से प्रशांत भूषण की याचिका पर अदालत ने एटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के माध्यम से यह निर्देश सरकार तक भेजा।

अदालत ने इस लोकपाल के लिए एक पैनल तैयार करने की बात कही है।

साथ ही यह भी पूछा है कि ऐसे मामलो में हर बार सरकार को कार्रवाई करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश क्यों जरूरी होता है।

ऐसे काम तो सामान्य अवस्था में ही होने चाहिए।

इस लोकपाल के लिए गत वर्ष के सितंबर माह में एक सर्च पैनल कमेटी का गठन किया गया था।

तब से अब तक इसके आगे की कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।

सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई की तिथि तय होने की सूचना के बाद 16 जनवरी को एक पैनल की पहली बैठक आयोजित की गयी थी।

इस पर भी मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी जतायी।

अदालत को सरकार की तरफ से एटर्नी जनरल ने बताया कि इसके मामले में आधारभूत संरचना तथा मानव संसाधनो की कमी की वजह से काम में विलंब हुआ है।

अब सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

इसी आधार पर अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तिथि सात मार्च तय कर दी।

अदालत के निर्देश के बाद गठित सर्च कमेटी में प्रधानमंत्री के नेतृत्व लोकपाल की कमेटी का गठन होता है।

इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया गया है।

इस पर सवाल उठाने वाले प्रशांत भूषण को मुख्य न्यायाधीश ने सकारात्मक सोच रखने की नसीहत भी दी।

उन्होंने इसी क्रम में कहा कि हर बात को नकारात्मक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए

हो सकता है कि उम्मीद से अच्छा कुछ निकलकर सामने आये।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व जुलाई 2018 में केंद्र सरकार के सुझाव को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज करते हुए नये सिरे से कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया था।

विरोधी दल के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने इस बैठक का यह कहकर वहिष्कार कर दिया था कि

इस बैठक में उन्हें विशेष आमंत्रित के तौर पर बुलाया गया था।

उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया की खारिज कर दी थी।

याद रहे कि इसी लोकपाल के मुद्दे पर प्रारंभ हुए आंदोलन के क्रम में पूरे देश में कई उथलपुथल हुए थे।

अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले इसी आंदोलन में प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए थे।

वहां से बढ़ता हुआ आंदोलन पूरे देश में फैल गया था।

बाद में अरविंद केजरीवाल ने इससे अलग हटकर राजनीतिक पार्टी का गठन किया।

उसके बाद से आम आदमी पार्टी की सरकार नईदिल्ली में है।

बाद में कई अन्य राज्यों में भी इस दल को सफलता मिली है।

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