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सुप्रीम कोर्ट गठित कमेटी 21 को सभी पक्षों के साथ बात करेगी

  • गठित कमेटी के सदस्य आज पहली बार मिले

  • कमेटी की तीन सदस्यों की पहली बैठक संपन्न

  • किसानों को बातचीत के लिए राजी करना चुनौती

  • निजी राय से कमेटी खारिज नहीं करेंगेः सीजेआई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट गठित कमेटी के सदस्य आज पहली बार औपचारिक तौर पर कृषि

कानूनों पर विचार के लिए मिले। इस बैठक के बाद कमेटी के सदस्य अनिल घनवत ने

कहा कि वे आगामी 21 जनवरी को किसानों एवं अन्य सभी इच्छुक पक्षों से अपनी बात

चीत प्रारंभ करेंगे। आज की बैठक में यह सहमति बनी कि सभी सदस्य निजी राय को

दरकिनार कर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के हिसाब से उन मुद्दों की फिर से व्याख्या करेंगे।

इस कमेटी का गठन सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों पर उत्पन्न अड़चनों को दूर करने के क्रम में किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह पहले ही साफ कर दिया है कि इस कमेटी का गठन सिर्फ कोर्ट ने अपने लिए किया है।

लेकिन इस कमेटी का गठन होने के तुरंत बाद आंदोलनकारी किसानों ने कमेटी के सदस्यों

के नामों पर एतराज जताते हुए कहा था कि सभी चार लोग पहले से ही सरकार के कृषि

कानूनों का समर्थन कर चुके हैं। इसलिए वे कमेटी के समक्ष हाजिर नहीं होंगे।

विवाद बढ़ने के बाद कमेटी के एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने खुद को इस कमेटी से अलग कर लिया है।

कमेटी की पहली बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए श्री घनावत ने कहा अब वे किसी के पक्ष में नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट जो जानना चाहती है, उसी पर काम कर रहे हैं।

21 जनवरी की बैठक के बारे में श्री घनवत ने कहा कि पहली चुनौती तो किसानों को कमेटी के साथ बात चीत करने के लिए राजी कराने को लेकर है, हमलोग इसके लिए पूरा प्रयास करेंगे।

साथ ही बात आगे बढ़ी तो वे आंदोलनकारी तथा अन्य पक्षों की दलीलों को भी सुनेंगे। कमेटी की तरफ से कहा गया है कि अब उनकी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के प्रति है।

सुप्रीम कोर्ट गठित कमेटी पर मुख्य न्यायाधीश की स्पष्ट राय

इधर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर अनौपचारिक राय दी कि

आंदोलनकारियों के विरोध की वजह से इस कमेटी को खारिज किये जाने का कोई

औचित्य नहीं है। न्यायमूर्ति बोवड़े ने कहा कि हो सकता है कि कमेटी सबकी बात सुनने के

बाद अपनी राय ही बदल ले। इसलिए बात चीत का होना जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा

कि किसी की निजी राय कुछ भी हो सकती है। निजी राय होने की वजह से उन्हें इस कमेटी

में शामिल होने से नहीं रोका जा सकता है।

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