सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा ही लिया कि हटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों

सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा मामले की सुनवाई जारी रही
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  • केंद्र ने कहा दोनों अधिकारी बिल्ली की तरह आपस में लड़ रहे थे

  • अदालत ने अधिकार वापस लेने का सवाल किया

  • वेणुगोपाल ने कहा सरकार के पूरे आदेश पर ध्यान दें

  • सीवीसी एवं अन्य की दलील कल सुनी जाएगी

रासबिहारी

नईदिल्लीः सर्वोच्च न्यायालय में आज फिर सीबीआइ के निदेशक आलोक वर्मा को हटाने के मामले की सुनवाई हुई।

इस सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के सीधे सवाल का उत्तर देते हुए केंद्र सरकार ने पहली बार यह स्वीकार किया कि

दोनों अधिकारियों के बीच विवाद था।

सरकार के मुताबिक दोनों अधिकारी आपस में बिल्ली की तरह लड़ रहे थे।

इसी वजह से केंद्र को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा।

लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के इस सवाल का उचित उत्तर केंद्र के पास नहीं था

कि रातोंरात इस कार्रवाई की आखिर जरूरत क्या पड़ी।

केंद्र सरकार की तरफ से दलील दी गयी थी कि दोनों की लड़ाई में

यह केंद्रीय जांच एजेंसी लोगों के बीच मजाक का मुद्दा बनकर रह गयी थी।

केंद्र सरकार की तरफ से एटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने तीन जजों की

खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार का यह दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

इस खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा न्यायमूर्ति संजय कृष्णण कौल और केएम जोसफ हैं।

दरअसल न्यायमूर्ति जोसफ ने सरकार से यह जानना चाहा था कि

क्या सरकार के पास भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत

सीबीआइ निदेशक को दिये गये अधिकार को वापस लेने का अधिकार है।

अदालत ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना कानून की धारा 4(1) का हवाला देते हुए

कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग को सीबीआइ के भ्रष्टाचार के

मामलों को देखने का अधिकार है।

वहीं धारा 4(2) के मुताबिक केंद्र को अन्य मामलों में दखल देने का अधिकार है।

इसलिए सरकार को पहले यह स्पष्ट करना होगा कि सीबीआइ निदेशक को

कानून के तहत प्रदत्त अधिकार वापस कैसे लिये जा सकते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय में कल भी मामले की सुनवाई होगी

अदालत में श्री वेणुगोपाल ने यह उल्लेख भी किया कि सीबीआइ निदेशक

आलोक वर्मा आगामी 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

उनको प्रदत्त अधिकारी अस्थायी तौर पर रोके गये हैं।

इसलिए अदालत को केंद्र सरकार के पूरे आदेश के आधार पर विचार करना चाहिए।

दूसरी तरफ केंद्रीय सतर्कता आयोग की तरफ से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता आज अपनी बात नहीं रख पाये।

समझा जाता है कि कल इस मामले की सुनवाई में सीवीसी की दलीलों को सुना जाएगा।

उसके बाद इस मामले में पक्षकार बने कुछ अन्य अधिकारियों और पक्षकारों को भी दलील रखने का मौका मिलेगा।

इस पूरे प्रकरण में आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के अलावा सीबीआइ के

दो अधिकारियों ने भी खुद को रातों रात स्थानांतरित किये जाने के आदेश को चुनौती दी है।

इसके अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने भी

उनकी बात सुने जाने की अपील की है।

क्योंकि उन्होंने दलील दी है कि जिस तीन सदस्यीय कमेटी में सीबीआइ

का निदेशक का चयन होता है उसमें वह भी एक पदेन सदस्य थे।

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