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सुंदरबन का बाघ अब टहलते हुए एक सौ किलोमीटर दूर बांग्लादेश चला गया

  • राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः सुंदरबन का बाघ अब बांग्लादेश के जंगलों में है। बाघ के गले में लगे रेडियो

कॉलर से मिल रहे संकेतों के आधार पर यह जानकारी मिल रही है कि सुंदरबन इलाके का

यह बाघ टहलता हुए एक सौ किलोमीटर दूर बांग्लादेश की सीमा में आ चुका है। वैसे बता

दें कि सुंदरबन का इलाका भी दो देशों के बीच बंटा हुआ है और जंगली जानवर अक्सर ही

एक दूसरे देश की सीमा में आते जाते रहते हैं। लेकिन एक सौ किलोमीटर तक चला जाना

अपने आप में नई बात है। आम तौर पर पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि कोई भी जंगली

बाघ औसतन चालीस वर्ग किलोमीटर के इलाके में घूमता रहता है। यह बाघ एक सौ

किलोमीटर क्यों चला गया, इसका पता तो नहीं है लेकिन उसके रेडियो कॉलर से उसके

अभी बांग्लादेश के सुंदरबन इलाके में होने की पुष्टि हो रही है। बाघ के बारे में बांग्लादेश के

वन विभाग की तरफ से अब तक कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गयी है। वैसे बांग्लादेश

के वन विभाग के द्वारा भी बाघों के रेडियो कॉलर पर ध्यान दिया जाता है।

सुंदरबन के प्रधान वन संरक्षक वीके यादव ने कहा है कि इस बाघ को पिछले दिसंबर

महीने में रेडियो कॉलर पहनाया गया था। उसके बाद से ही वहां कहां है, उसकी नियमित

जानकारी मिल रही थी। अब उसके बांग्लादेश के इलाके में होने के संकेत मिल रहे हैं। वैसे

हैरानी की बात यह है कि इस इलाके तक पहुंचने के बाद उस बाघ को कई नदियों को पार

करना पड़ा होगा। इन नदियों में भी छोटे आकार के लेकिन खतरनाक किस्म के

मगरमच्छों की आबादी है। इसी वजह से इन नदियों से गुजरते हुए वहां के मछुआरे भी

बहुत संभलकर चलते हैं और नदी के पानी में हाथ कभी नहीं डालते हैं।

सुंदरबन का बाघ कई नदी तैरकर वहां पहुंचा है

सुंदरवन का विशाल जंगल भी दो हिस्सों में बंटा हुआ है। इसमें से एक इलाका भारत के

पश्चिम बंगाल में है तो दूसरा इलाका बांग्लादेश में हैं। दोनों इलाकों को मिलाकर जंगल के

अनेक हिस्सों में नदियों का प्रवाह है। श्री यादव ने बताया है कि पिछले साल इस बाघ को

बसीरहाट इलाके के हरिखाली कैंप के विपरीत हरिनभांगा जंगल में पकड़ा गया था। उसे

रेडियो कॉलर लगाकर 27 दिसंबर को छोड़ दिया गया था। कुछ दिनों तक आस पास के

जंगलों में रहने के बाद वह बाघ धीरे धीरे आगे बढ़ता चला गया। बांग्लादेश के तालपट्टी

द्वीप के इलाके मे चले जाने के दौरान इस बाघ ने कई नदियों को तैरकर पार किया है।

अब उसके रेडियो कॉलर से संकेत नहीं आ रहे हैं। इसके पहले भी कई अन्य बाघ भारत

और बांग्लादेश के जंगलों के बीच आना जाना करते रहे हैं, इसकी जानकारी दोनों देशों के

वन विभाग के लोगों को है। श्री यादव ने बताया कि बाघ के शरीर में रेडियो कॉलर के

अलावा भी एक संकेत प्रेषण यंत्र है जो बाघ के मर जाने की सूचना देता है। लेकिन वह

संकेत नहीं आया है। इससे पता चलता है कि किसी कारण से अथवा लगातार पानी में

उतरने की वजह से यह रेडियो कॉलर नष्ट हो गया है और बाघ उसी तालपट्टी के इलाके के

आस पास कहीं मौजूद है।

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