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सूर्य की रोशनी से वाकई जल्दी मर जाता है कोरोना वायरस

  • अल्ट्रा वॉयोलेट किरणों का असर मारक है

  • आठ गुणा तेज गति से काम करता पाया गया

  • तकनीक बनी तो कोरोना का सबसे सस्ता ईलाज बनेगा

  • यूसी सांता बारबारा विश्वविद्यालय के नये अनुसंधान में पुष्टि

राष्ट्रीय खबर

रांचीः सूर्य की रोशनी से कोरोना का वायरस तेजी से मरता है, यह प्रयोग फिर से सफल

हुआ है। इसकी जानकारी पहले ही मिली थी लेकिन इतने दिनों में इस शोध को और

परिष्कृत किया गया है। यू सी सांता बारबारा विश्वविद्यालय ने अपने पूर्व के एक शोध को

जारी रखा था। अब उसमें और अधिक आंकड़े भी शामिल हो गये हैं। इस लिहाज से यह

माना जा सकता है कि जो रिसर्च वहां चल रहा था उसमें जिन आंकड़ों का विश्लेषण किया

गया है, वह किसी प्रारंभिक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त है। इसमें फिर से इस बात

की पुष्टि हुई है कि वाकई सूर्य किरणों के असर से कोरोना वायरल जल्दी अपनी मारक

क्षमता खो देता है। दरअसल सूर्य की रोशनी से इस वायरस को सुरक्षा प्रदान करने वाले

प्रोटिन कवच ही गल जाते हैं।

गर्मी से वायरस का प्रोटिन रक्षा कवच गल जाता है

एक बार सुरक्षा कवच के गल जाने के बाद वायरस अपने आप इंसान अथवा किसी अन्य

प्राणी के शरीर में प्रवेश करने के बाद भी वहां टिक नहीं पाता और किसी अति सुक्ष्म की

भूमिका में रहता है। प्रोटिन कवच होने के बाद यह प्रोटिन कवच ही उसे शरीर के अन्य

कोषों के साथ जोड़ने और वंशवृद्धि करने का अवसर प्रदान करता है। सूर्य किरणों से यह

प्रोटिन का खोल गरमी में गल जाता है। शोधकर्ताओं ने माना है कि सूर्य किरणों में कोविड

19 के वायरस आठ गुणा अधिक तेजी से नष्ट होते हैं। इस शोध के बाद यह माना जा रहा

है कि कोरोना महामारी से निपटने में अब सूरज की रोशनी की भी अहम भूमिका बनने जा

रही है। शोधकर्ताओं ने वहां के मैकेनिकल इंजीनियर पाओलो लुज्जाटो फेगिज की

अगुवायी में सबसे पहले इसका सैद्धांतिक मॉडल तैयार किया था। सैद्धांतिक तौर पर सारी

बातों को जांच लेने के बाद उस पर प्रयोग भी किये गये हैं। प्रयोग में ही यह पता चला कि

दरअसल वायरस के प्रभावहीन होने की समय सीमा आठ गुणा अधिक है।

सूर्य की रोशनी के प्रभाव को प्रायोगिक तौर पर आजमाया गया है

driving

सैद्धांतिक तौर पर यह माना गया था कि दरअसल सूर्य की रोशनी में मौजूद अल्ट्रा

वॉयोलेट किरणें जब वायरस के आरएए पर आती हैं तो वे इस कवच को नष्ट कर देती है।

जब प्रयोग किया गया तो सैद्धांतिक गणना से आठ गुणा अधिक गति से वायरस को नष्ट

होते हुए देखा गया। इस प्रयोग के बाद ऐसा माना जा रहा है कि भविष्य में इस वायरस के

ईलाज के लिए यह एक नई और कारगर विधि विकसित हो सकती है। शोध वैज्ञानिकों ने

स्पष्ट किया है कि दरअसल डीएनए और आरएनए में मौजूद प्रोटिन मध्य रेंज के अल्ट्रा

वॉयोलेट किरणों से ज्यादा तेजी से समाप्त होते हैं। इस मध्य रेंज के यूवी रे में सुक्ष्माणुओं

को मारने का गुण मौजूद होता है। अच्छी बात यह ही कि यह इंसानी खून पर कोई

प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता। आम तौर पर सूर्य की रोशनी का यह हिस्सा वायुमंडल के

ऊपरी आवरण की सीमा को तोड़कर पृथ्वी के अंदर नहीं आ पाता है। लेकिन यह किरण

धरती पर भी कई अन्य स्थानों पर प्रतिक्रिया की वजह से पैदा होती हैं। इनमें रसोई घर

प्रमुख है। वायरस युक्त लार को जब कृत्रिम तौर पर तैयार सूर्य किरणों के माहौल में दस

से बीस मिनट तक रखा गया तो वह पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। इससे साफ हो गया कि

प्राकृतिक तौर पर आने वाली सूर्य की रोशनी से प्राकृतिक तौर पर इस वायरस का नियंत्रण

होता है। शोध दल का निष्कर्ष है कि गर्मी के मौसम में वातावरण में मौजूद वायरस आधे

घंटे की रोशनी में खुद ही पूरी तरह निष्क्रिय हो जाते हैं। दूसरी तरफ जाड़े के दिनों में यह

वायरस लंबे समय तक सक्रिय बना रहता है।

प्रयोग में वायरस नष्ट होने की तेज गति की पुष्टि हुई

एक अलग टीम ने वायरस के आरएनए कणों की जांच करने के बाद पाया कि यूवी किरणों

की वजह से उनका बाहरी हिस्सा टूट रहा है। एक बार इस बाहरी हिस्सा के टूट जाने के बाद

वायरस खुद कोई मारक प्रभाव नहीं छोड़ पाता वह महज एक सुक्ष्माणु बनकर रह जाता

है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मध्यम और छोटे तरंग के अल्ट्रा वॉयोलेट किरणों का

प्रभाव वायरस पर अधिक होता है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह कुछ वैसी ही पद्धति है,

जिस पद्धति में दूषित जल को अल्ट्रा वायोलेट किरणों से साफ किया जाता है। पानी के

अंदर मौजूद दूषण वाले कण भी इस अल्ट्रा वायोलेट किरणों के प्रभाव में अलग हो जाते हैं।

समझा जा रहा है कि अगर इस तकनीक पर आधारित चिकित्सा पद्धति विकसित हुई तो

सूरज की रोशनी से कोरोना के मरीजों का ईलाज बहुत सस्ता और बहुत जल्द स्वास्थ्य

लाभ देने वाला साबित होने जा रहा है। इसके लिए वैज्ञानिक अब इस तंरग की लंबाई की

पहचान कर रहे हैं जो सबसे कम समय में वायरस के आवरण को ध्वस्त कर सके।


कोरोना से संबंधित अन्य रिपोर्ट यहां देख लें

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