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सुल्तानपुर में गोमती साफ करने के अभियान में उल्लेखनीय सफला

  • सफाई का काम निरंतर जारी रखा गया

  • मित्र मंडल बनाकर गोमती नदी को संवारा

  • काम आगे बढ़ता गया तो लोग भी जुड़ते गये

  • कोरोना काल में भी लगातार अभियान में जुड़े रहे

सुल्तानपुर: सुल्तानपुर में आदि गंगा गोमती के स्वच्छता अभियान में लगे गोमती मित्र

मंडल ने महामारी आपदा को अपने लिए मिले अवसर के रूप में लिया और पांच महीने की

बंदी काल में लॉकडाउन का सम्मान करते हुए अथक रूप से अपने अभियान में लगे रहे।

लॉकडाउन से साप्ताहिक रविवासरीय आरती की परंपरा प्रभावित जरूर हुई किंतु परम्परा

को टूटने नहीं दिया। आठ साल पहले अप्रैल 2012 में आदि गंगा गोमती के तट सीताकुंड

को एक मॉडल बनाने का जज्बा लिए व समाजसेवा के प्रति समर्पित युवाओं की एक टीम

अधिवक्ता रूद्र प्रताप के नेतृत्व में संकल्पित हुई।

सुल्तानपुर की इस टीम ने जब सीताकुंड पर स्वच्छता अभियान शुरू किया तो उसकी

स्थिति अत्यन्त दयनीय थी। घाट व आसपास कीचड़, कूड़े का ढेर, जंगल जैसे झाड़ियों का

झुंड था। कुछ लोगो ने तो यह भी कहना शुरू कर दिया था कि सीताकुंड पर बड़े पैमाने पर

कब्जा जमाने की तैयारी हो रही है किंतु कुछ ही दिनों में सीताकुंड के बदलते आकर्षक

स्वरूप को देखकर लोगो की भावना बदल गयी। लोग खुद ब खुद उनके साथ जुड़ने लगे।

आज गोमती मित्र मंडल की युवा, बाल व महिला शाखा भी अलग-अलग काम कर रही हैं।

जून 2018 को माँ गोमती की स्वच्छता का संदेश सरकार तक पहुंचाने को पूरी टीम ने

लखनऊ में झूलेलाल पार्क स्थित गोमती नदी के घाट की सफाई की। सुल्तानपुर के

गोमती मित्र मंडल के इस जज्बे को देखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ  ने इनसे

मिलकर न सिर्फ उत्साहवर्द्धन किया था बल्कि इनकी कार्यशैली को भी समझा।

सुल्तानपुर के प्रयास की मुख्यमंत्री योगी ने भी सराहना की

गोमती मित्र मंडल के मीडिया प्रभारी रमेश माहेश्वरी ने बताया कि बीते 25 मार्च को

कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन घोषित किया गया तो गोमती मित्र मंडल ने सरकार

के आदेशों का पालन करते हुए रविवार को स्वच्छता अभियान में नजदीक रहने वाले और

सीमित संख्या में लोगों ने सफाई अभियान जारी रखा। अभियान से लेकर अभी तक एक

रविवार भी ऐसा नही है जब टीम माँ गोमती की सफाई सेवा व सायं आरती को जरा भी

अलसाया हों। बंदी के दौरान भी सदस्यों में पहले जैसे ऊर्जा बरकरार रहीं। इस आपदा पर

टीम इसे आपदा मानकर घर नही बैठी बल्कि सेवा का अवसर मानकर लॉकडाउन भर टीम

के लोगों ने सुल्तानपुर जिला अस्पताल व पैदल यात्रियों के लिए, रेलवे स्टेशन व बस

स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को भोजन, राशन मुहैया कराती रहीं। पिछले महीने लगातार

बरसात भी गोमती मित्रों के स्वच्छता अभियान पर ब्रेक नही लगा सकी। उन्होंने बताया

कि सरकार की ओर से घोषित दो दिवसीय लॉकडाउन में रविवार का दिन आ जाने से

गोमती मित्रों को सीता कुंड धाम पर साप्ताहिक श्रमदान आयोजित करने में थोड़ी दिक्कत

महसूस हो रही थी,लेकिन सोमवार को सप्तमी होने की वजह से महिलाओं का अधिक

संख्या में सीता कुंड धाम आना था इसलिए श्रमदान भी आवश्यक था। नजदीक रहने वाले

और सीमित संख्या में लोग आकर के तट और धाम परिसर को साफ किया।

सब कुछ साफ होने के बाद भी अब कम श्रद्धालु आते हैं

कोरोना संक्रमण का असर सुल्तानपुर में मां गोमती की आरती पर भी पड़ता दिखाई

दिया। लेकिन 25 अगस्त को लॉकडाउन के 5 माह पूरे हो गए हैं। इस दरमियान काफी कुछ

बदला है और आठ वर्षों से मां गोमती के पावन तट पर होने वाली आदि गंगा मां गोमती

की आरती भी इससे अछूती नहीं रही। जहां आरती के वक्त एक हजार से अधिक श्रद्धालु

इकट्ठा होते थे वहां अब सीमित संख्या में ही श्रद्धालुओं को आरती करने की अनुमति

गोमती मित्र मंडल द्वारा प्रदान की जाती है। इस कोरोना काल में गोमती मित्रो ने मास्क

और सोशल डिस्टेंसिग के लिए स्लोगन, गीत, संदेशों आदि के मध्यम से लोगो को जगाते

रहे।

सरयू नदी की कटान से तटवर्ती बांधों को खतरा

उत्तर प्रदेश के बस्ती में सरयू नदी की कटान से तटवर्ती बांधों को खतरा पैदा हो गया है।

नदी की कटान से सात गांव प्रभावित हैं जहां नदी खेती की जमीन को काट रही है।

आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां कहा कि सरयू नदी खतरे के निशान से एक मीटर पांच

सेंटीमीटर नीचे बह रही है। नदी का रुख घटने की ओर है। सरयू मे शारदा बैराज से 2535

क्यूसेक, सरजू बैराज से 4530 क्यूसेक तथा गिरजा बैराज से 91466 क्यूसेक पानी छोड़ा

गया। नदी की कटान से भरपुरवा गांव के नौ परिवारों को बेरागल गांव में बसाया गया है।

नदी की कटान से विस्थापित हुए परिवार अब सुरक्षित जगह पर पहुंच गए हैं। नदी की

कटान से तटवर्ती बांध गौरव, सैफाबाद ,कटोरिया चांदपुर पर दबाव बढ़ गया है। कटोरिया

चांदपुर बांध को बचाने के लिए खजांची पुर के पास बंबू कैरेट बनाकर बोरी में मिट्टी भरकर

कटाव रोकने के काम में बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी कर्मचारी जुटे हुए हैं


 

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