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अचानक से लोगों को ज्योतिषियों की याद आने लगी है

  • कुछ अइस बता दो बाबा कि फंसी गाड़ी निकल सके

  • कोरोना जांच में आमदनी पता पर लागत मालूम नहीं

  • हर ग्राहक से डेढ़ किलो माल चुरा रहे राशन वाले

संवाददाता

रांचीः अचानक से लोगों को फिर से ईश्वर पर कम और भाग्य पर ज्यादा भरोसा नजर

आने लगा है। दरअसल कारोबार की गति चाह लेने के बाद भी अपेक्षित गति को प्राप्त नहीं

करने की वजह से हर स्तर का कारोबारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। इसी दौरान

लोगों की किस्मत जांचने और बांचने वालों की चांदी हो आयी है। लोग मिलने के अलावा

फोन पर भी अपने ज्योतिषियों के निरंतर संपर्क में हैं। लॉक डाउन की मंदी के बीच ऐसे

भाग्योदय का तरीका बताने वालों की वाकई चांदी हो गयी है।

इस बीच बाजार में लंबे समय तक मुनाफा देने वाले कारोबार पर भी लगातार व्यापार

जगत चर्चा करने लगा है। लोगों की चर्चा के मुताबिक फिलहाल मुनाफे का कारोबार

कोरोना की जांच और राशन की दुकान है। कोरोना की जांच में दरअसल कितने पैसे का

सामान लगता है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। लेकिन कोरोना का भय कुछ ऐसा है

कि इसकी जांच निजी स्तर पर कराने वाले घर के दूसरे बजट को काटकर भी जांच केंद्रों में

साढ़े चार हजार रुपये का भुगतान कर रहे हैं। अब इस साढ़े चार हजार के भुगतान में जांच

केंद्र को कितना मुनाफा हो रहा है, यह जांच का विषय है।

दूसरी तरफ कपड़ा और अनाज के अलावा लोहा के कारोबारियों का मानना है कि कोरोना

लॉक डाउन में अगर कोई खुलकर कमाई कर रहा है तो वह राशन दुकानदार है। इस

शिकायत पर स्थिति की जांच भी की गयी।

अचानक से लोगों ने कम राशन की भी शिकायत की

राजधानी रांची के अनेक राशन दुकानों में लोगों को जो पंद्रह किलो अनाज दिया जा रहा है,

वह अलग से तौलने पर साढ़े तेरह किलो से अधिक नहीं निकलता। हर ग्राहक से डेढ़ किलो

का मुनाफा वाकई राशन दुकानदार को कोरोना की मंदी में उस स्थिति में पहुंचा रहा है,

जिसे हिंदी में कहते हैं पांचों ऊंगली घी में और सर कढ़ाई में। मामला जांच लेने के बाद जब

चुपके से राशन दुकानदारों से इसकी शिकायत की गयी तो प्रारंभिक इंकार के बाद उन्होंने

इस बात को स्वीकार तो कर लिया लेकिन साथ ही काम की जानकारी यह दे दी कि यह

सारी कमाई उनके अकेले की जेब में थोड़े ना जा रहा है। नीचे से ऊपर तक इसका सिस्टम

बना हुआ है। यानी कोरोना के संकट काल में यह सिस्टम अपनी कमाई करता जा रहा है।


 

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