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पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत ने पहली बार अनजाने तथ्यों की जानकारी दी

  • छह दिसंबर घटना नहीं होती तो बातचीत से सुलझ जाता

  • सभी बड़े नेताओं ने सौंपी थी जिम्मेदारी

  • लगातार वार्ता से सहमति के रास्ते बने थे

  • हर कोई चाहता था कि भव्य मंदिर बने

संवाददाता

रांचीः पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता सुबोध कांत ने श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन को

श्रद्धा का विषय बताते हुए कहा कि इससे असंख्य लोगों की धार्मिक आस्था पूरी हो रही है।

उन्होंने इस धार्मिक विषय को राजनीति से परे रखने की अपील की है। इसी मौके पर

अपने वीडियो संदेश में उन्होंने पहली बार अनेक अनजाने विषयों का खुलासा किया है।

वीडियो में क्या कहा सुबोध कांत ने यहां देखिये

दरअसल इस पूरे प्रकरण के दौरान वह केंद्र में मंत्री रहे थे। गृह राज्य मंत्री होने के नाते

खास तौर पर उस वक्त अयोध्या विवाद और कश्मीर में शांति की पहल उनकी देन थी।

इस विषय में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पहली बार यह खुलासा किया कि वरिष्ठ नेताओं के निर्देश

पर उन्होंने इस मुद्दे पर बतौर केंद्रीय मंत्री पहल की। श्री सहाय ने पहली बार इस बात की

जानकारी दी कि उस दौर में महंत अवैद्यनाथ, अशोक सिंघल और स्वर्गीय ओबैसी जैसे

नेताओं को एक साथ जुटाकर मसले को सुलझाने की पहल की गयी थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने वह बातें बतायी जो कोई नहीं जानता था

स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह, स्वर्गीय चंद्रशेखर और स्वर्गीय राजीव गांधी की सरकार में भी इस काम को शांति से आगे बढ़ाया गया था।

पहली बार उन्होंने अयोध्या के बारे में यह जानकारी दी कि लगातार बैठकों की वजह से काफी प्रगति हुई थी।

छह दिसंबर की घटना नहीं होती तो शायद बात-चीत से ही यह मुद्दा पहले ही सुलझ गया होता। उन्होंने

आज यह राज खोला कि उस वक्त की बात-चीत में समस्या के स्थायी समाधान के लिए

किस प्रमुख व्यक्ति ने क्या कुछ प्रस्ताव दिये थे। उन्होंने कहा कि उस दौर की वार्ता में

शामिल मुसलमान नेता भी यह चाहते थे कि वहां श्रीराम का भव्य मंदिर बने। लेकिन बाद

में छह दिसंबर की घटना ने सारे प्रयासों पर पानी फेर दिया। इस विषय पर पूर्व केंद्रीय मंत्री

ने धार्मिक आस्था को राजनीति से परे रखने की अपील की है। उन्होंने अपने वीडियो संदेश

में कहा है कि यह देश विदेश के अनगिनत लोगों की आस्था के पूरा होने का समय है। ऐसे

शुभ धार्मिक कार्यों में राजनीति के हस्तक्षेप से नाहक परेशानी होती है। इसलिए उन्होंने

इस महान धार्मिक कार्य को राजनीति से अलग रखने की अपील की है।


 

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