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नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई जरूरी

नियमों का उल्लंघन करना भी आज के दौर में एक फैशन जैसा ही है। अभी कोरोना का

संकट मिटा नहीं है बावजूद इसके लॉक डाउन के दौरान दी गयी छूट का अनेक लोग

नाजायज लाभ उठाते नजर आने लगे हैं। ऐसे चेहरों को देखकर यह गलतफहमी भी हो

सकती है कि शायद कोरोना संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। अपने देश

की बात करें तो देश का सबसे तेज आर्थिक गतिविधियों का केंद्र मुंबई ही है। वहां कोरोना

वायरस के संक्रमण की क्या स्थिति है, इसे देखकर भी अगर लोग समझदारी से काम नहीं

ले रहे हैं तो ऐसे लोगों को दंडित किया जाना चाहिए। रांची की बात करें तो चौक चौराहों पर

तैनात पुलिस वालों को वाहनों की चेकिंग के बदले बिना मास्क के निकलने वालों पर

अर्थदंड लगाने की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। वरना वर्तमान में पुलिस का पूरा ध्यान

अपने इलाके से गुजरने वाले मालवाहक वाहनों पर ही केंद्रित हो गया है। सड़कों पर बेखौफ

बिना मास्क के घूमते लोग अपने लिए अगर खतरा मोल रहे हैं तो यह उनकी और उनके

परिवार की जिम्मेदारी है। लेकिन जब यह समाज और शहर के लिए संकट का कारण बन

सकता है तो इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। हममें से कोई यह नहीं जानता कि यह अदृश्य

वायरस किस रास्ते से हमला करने वाला है। इसी वजह से देश में वायरस के प्रसार को

रोकने के लिए ही लॉक डाउन की पद्धति अपनायी गयी थी, जो बहुत हद तक सफल रही है।

हम प्रारंभिक दौर में इस संक्रमण को अधिक फैलने से रोक सके हैं। लेकिन देश में

कारोबार चले, लोगों को रोजी रोटी मिले यह भी एक अनिवार्य शर्त है।

नियमों का उल्लंघन यानी लॉक डाउन की छूटों की अनदेखी

इसके लिए जरूरी था कि लॉक डाउन के कड़े प्रतिबंधों को क्रमवार तरीके से कम किया

जाए और कारोबार में छूट मिले। इसके तहत जो चंद अपवाद को छोड़कर शेष सारा

कारोबार रांची में प्रारंभ होने के बाद ही नियमों का उल्लंघन करने वाले दृश्य आम हो रहे

हैं। सड़कों पर बिना मास्क के चल रहे लोगों को रोका और टोका जाना चाहिए। अनेक ऐसे

चेहरे भी दिख रहे हैं, जो मास्क को अपने गले में लटकाये घूम रहे हैं। मास्क लगा रखा है

तो यह तय है कि उन्हें संक्रमण के खतरे की जानकारी है। लेकिन मास्क को गले पर

टांगकर वह जब दूसरों के लिए खतरा बन रहे हैं तो यह सामाजिक स्तर पर किया जाने

वाला अपराध की श्रेणी में आ जाता है। इसी तरह बाजारों में भी सोशल डिस्टेंसिंग की

धज्जियां उड़ रही है। ऐसे लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ पाये हैं लेकिन इस भीड़ के

बीच कौन सा व्यक्ति कब औऱ कहां से संक्रमित हो चुका है, इस बारे में किसी को कोई

जानकारी नहीं है। जाहिर है कि इसे भी रोकने की आवश्यकता है क्योंकि यह खतरा किसी

एक व्यक्ति का नहीं है बल्कि पूरे शहर के लिए है। भीड़ भरे इलाकों में अगर एक व्यक्ति

संक्रमण फैला जाता है तो कितने इलाके इसकी चपेट में आयेंगे, इसकी कल्पना भी नहीं

जा सकती। दूसरी तरफ अगर फिर से संक्रमण फैलने की वजह से इलाकों की घेराबंदी

होती है तो यह आर्थिक दृष्टि से और भी नुकसान पहुंचाने वाला साबित होगा।

नियम तोड़ने वालों से सख्ती से पेश आने की जरूरत

ऐसे में सख्ती से नियमों का पालन हो, इसके लिए जरूरी है कि पुलिस के स्तर पर यह

स्पष्ट संकेत जनता तक जाए कि नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड भरना पड़ सकता

है। इस संकेत से कमसे कम हर गंभीर विषय को हल्के में लेने वाले तथा अपने परिवार के

अभिभावकों को चकमा देकर सड़कों पर मटरगश्ती करने वाले युवकों को सबक मिलेगा।

इससे हम उस खतरे को कम कर सकते हैं जो कारोबारी छूट की वजह से फिर से मंडरा रहा

है। उदाहरण के तौर पर हमारे पास हिंदपीढ़ी का एक नमूना मौजूद है। एक महिला के

संक्रमित होने की वजह से पूरे इलाके को दो महीनों तक क्या कुछ झेलना पड़ा है, वह

सबकी आंखों के सामने है। इसलिए इस किस्म की गलती अथवा नासमझी वाली कार्रवाई

में शामिल लोगों को सख्ती के साथ रोका जाना चाहिए ताकि नियमों का उल्लंघन करने

की प्रक्रिया को रोककर भी हम संक्रमण के खतरे को कम कर सकें। आर्थिक दृष्टि से यह

अत्यंत महत्वपूर्ण समय बन चुका है। पूरे देश में अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने

कवायद के बीच कोरोना संक्रमण के आंकड़े भी तेजी से ऊपर जा रहे हैं। लिहाजा इस

स्थिति को संपूर्णता के साथ समझना होगा ताकि फिर से हालात बिगड़े और पूरी तरह

नियंत्रण से बाहर चला जाए, ऐसी नौबत ही नहीं आये। चंद उद्दंड लोगों को दंडित कर अगर

हम व्यापक तौर पर लोगों को खतरे से बचा सकते हैं तो नियमों का उल्लंघन करने वालों

के खिलाफ सख्त कार्रवाई का काम तुरंत प्रारंभ किया जाना चाहिए ।


 

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