झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष ने फैसले की आलोचना की

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  • फैसले से दल बदल को मिलेगा बढ़ावा

रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डा. अजय कुमार ने कहा कि

तीन साल दस महीने तक दसवीं अनुसूचि के अंतर्गत दल बदल कानून के मामले में आये

फैसले से दल बदल को बढ़ावा देने एवं मौका परस्तों को राजनीति में स्थापित करने वाला फैसला है।

आज पूरे राज्य की जनता की निगाहें स्पीकार के फैसले पर टिकी हुई थी

लेकिन विधानसभा स्पीकर ने पंच परमेश्वर को तार-तार कर दिया।

स्पीकर का यह कहना है कि दल-बदल नहीं हुआ है बल्कि एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हुआ है,

यह दुर्भाग्यपूर्ण है, निराशजनक है और गलत है।

सत्ता के साथ खड़ा रहना और सरकार को संरक्षण प्रदान करने के लिए

विधानसभा अध्यक्ष ने बहुप्रतिक्षित फैसला सुनाया है।

झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष डा. कुमार ने कहा कि झारखण्ड विधानसभा के छह सदस्यों पर

दसवीं अनुसूचि के अंतर्गत दल बदल कानून के मामले में स्पीकर कोर्ट का फैसला दल-बदल कानून का अपमान है।

इससे लोकतंत्रिक ढांचा कमजोर हुआ है।

उहोंने कहा कि स्पीकर ने सत्ता पक्ष के प्रभाव में आकर उनको मदद करने की नीयत से मर्जर (विलय) को जायज ठहराया है।

डा. कुमार ने कहा कि दसवीं अनुसूचि के 4 में कहा गया है कि जब सदन के ओरिजिनल पोलिटिकल पार्टी का विलय

दूसरी पॉलिटिकल पार्टी के साथ होता है और यह क्लेम किया जाए कि

वह और दूसरे अन्य सदस्यों ने इसकी पार्टी की सदायता ग्रहण कर ली है

या इस तरह के विलय से नया राजनीतिक दल का गठन कर लिया है,

तब यह मर्जर के दायरे में आयेगा और सदायता रद्द नहीं होगा

परंतु यहां पर जेवीएम के छह सदस्य भाजपा में शामिल हो जाते हैं

और नये दल की सदस्यता से संबंधित रसीद/खाता को 16 फरवरी 2015 को

स्पीकर कोर्ट में पहली पेशी में सबूत के तौर पर जमा नहीं कर पाते है

और बराबर कोर्ट द्वारा मांगे जाने पर छह महीना बाद फर्जी खाता दिखाते हैं।

छह सदस्यों द्वारा पार्अी के किसी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के शामिल होने का

कोई सबूत कहीं नहीं दिखलायी पड़ता है

सिवाय फर्जी रजिस्टर के जिसे गठन करने में छह महीना समय लगा

और मंत्री बनने के बाद या सत्ता दल में शामिल होने के बाद अपने प्रभाव का

इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से स्पीकर कोर्ट को दस्तावेज उपलब्ध कराते है।

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