fbpx Press "Enter" to skip to content

यूपीएससी की परीक्षा में 19वां रैंक पाने वाले श्रेष्ठ अनुपम के परिवार से बात चीत

  • माता पिता दोनों ने शिक्षक की कमी पूरी की

  • बहन से बचपन में नोंक झोंक होती रहती थी

  • इंजीनियरिंग के बाद दूसरी कोशिश में सफलता

दीपक नौरंगी

भागलपुरः यूपीएससी की परीक्षा को देश में सबसे प्रमुख परीक्षा इसलिए भी समझा जाता

है क्योंकि इसी परीक्षा से उत्तीर्ण होकर देश के सरकारी सेवा के शीर्षस्थ अफसर बनते हैं।

पूरे देश में अगर कोई इस यूपीएससी की परीक्षा में 19वां स्थान हासिल कर ले तो यह

समझा जाता है कि वह दूसरे से काफी अलग है। ऐसी स्थिति में उसके प्रशासनिक सेवा में

जाने के पहले से ही उससे देश को अधिक उम्मीदें बंध जाती है। यूपीएससी की इसी परीक्षा

में यह सफलता हासिल की है भागलपुर के श्रेष्ठ अनुपम ने। 

वीडियो में देखिये श्रेष्ठ अनुपम और उसके परिवार से बात चीत

 

घर का लड़का अगर यूपीएससी में बेहतर स्थान अर्जित करें तो घर के लोगों की प्रसन्नता

स्वाभाविक है। इसी क्रम में अनुपम की बड़ी बहन प्रज्ञा प्रियदर्शनी ने भी अपनी खुशी

जाहिर की। बचपन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकारा कि दोनों के बीच उम्र का अंतर

कम था इसलिए बचपन में जैसे दूसरे घरों में होता है, वैसी ही नोंकझोंक उनके बीच भी

होती थी। प्रज्ञा खुद साफ्टवेयर इंजीनियर हैं और बेंगलुरु में कार्यरत है। कोरोना काल में

वह अपने घर आयी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि उनका भाई बचपन से ही मेधावी था। इस वजह से पहले से ही ऐसा लगता

था कि वह कुछ न कुछ कमाल जरूर करेगा। बात-चीत में बिहार की स्थिति पर भी चर्चा

निकल आयी। इस पर दोनों भाई बहनों का मानना था कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में

बिहार की छवि बदली है।

यूपीएससी की परीक्षा में सफलता दूसरी कोशिश में मिली

प्रज्ञा इस बात से खुश है कि माहौल बदलने की वजह से अब बिहार की बेटियां भी अपने

भविष्य के प्रति गंभीर चिंतन कर पा रही हैं। हर क्षेत्र में अब बिहार की लड़कियों ने पहले के

मुकाबले काफी सफलता अर्जित की है। दोनों भाई बहनों ने यह कहा कि उन्होंने इस

बचपन की पढ़ाई में कोई बाहरी मदद नहीं ली है। उन्हें घर पर उनकी मां यानी आशा देवी

ने ही पढ़ाया है। चेहरे से ही काफी प्रसन्न नजर आ रही मौसी प्रभा गोयनका ने कहा कि घर

की अगली पीढ़ी के यह दोनों ही बच्चे कामयाब हो रहे हैं। यह निश्चित तौर पर खुशी की

बात है। वह इस बात से भी प्रसन्न हैं कि इन दोनों को देखकर घर के दूसरे बच्चे भी अब

कुछ बेहतर करने की तरफ उत्साहित होंगे।

बच्चों की पढ़ाई के लिए पिता यहां चले आये थे

श्रेष्ठ के पिता दिलीप कुमार अमर ने बताया कि वे लोग मूल रुप से मुंगेर के बलियारपुर के

रहने वाले हैं। लेकिन बच्चों की पढ़ाई की वजह से वे भागलपुर चले आये थे। अपने जीवन

के उतार चढ़ाव की हल्की चर्चा करने के साथ साथ वह कहते हैं कि आज का दिन उनके

जीवन का सबसे अधिक खुशी का दिन है। माता आशा देवी भी अपने पुत्र की सफलता से

प्रसन्न हैं और उन्होंने कहा कि सचमुच उनसे हमलोगों के सपने को पूरा किया है। वह यह

भी चाहती हैं कि उनके बेटा बिहार के लिए ही अपनी सेवा दे ताकि बिहार के लोगों के लिए

वह कुछ बेहतर कर सके। मां आशा देवी ने यह जानकारी भी दी कि बचपन से ही वह काफी

चंचल था। इसलिए कभी भी खेलने लगता था और खेल के बीच से ही वह अचानक जब

पढ़ने बैठता था तो पूरी तन्मयता के साथ पढ़ाई करता था।

अपने जीवन के बारे में अनुपम ने बताया कि स्कूल की पढ़ाई भागलपुर से पूरी कर लेने के

बाद उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। यूपीएससी की परीक्षा में यह उसकी दूसरी

कोशिश थी।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from कामMore posts in काम »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from भागलपुरMore posts in भागलपुर »
More from वीडियोMore posts in वीडियो »
More from शिक्षाMore posts in शिक्षा »

2 Comments

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: