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फ्रांस के पांच मंत्रियों के फोन में जासूसी पेगासूस स्पाईवेयर पाये गये




नईदिल्लीः फ्रांस के पांच मंत्रियों के फोन की जासूसी पेगासूस स्पाईवेयर के जरिए की गयी थी। वहां जारी जांच के तहत यह जानकारी पहली बार सामने आयी है।




इसके पहले फ्रांस के राष्ट्रपति एमानूएल मैक्रों के फोन की सेंधमारी भर की पुष्टि हुई थी, जिसमें यह पता चला था कि यह साजिश मोरक्को से रची गयी थी।

अब फ्रांस के पांच मंत्रियों की भी जासूसी किये जाने की पुष्टि हो चुकी है। मीडिया वेबसाइट मीडिया पार्ट ने इसका खुलासा किया है।

इसमें कई सूत्रों और फ्रांस की अपनी जांच का हवाला दिया गया है। बता दें कि इमानूएल मैक्रों के फोन की जासूसी का पता चलने के बाद फ्रांस सरकार ने अपनी तरफ से भी इस मामले की जांच प्रारंभ कर दी है।

इसकी वजह से नाराज फ्रांस के राष्ट्रपति ने इजरायल के नये प्रधानमंत्री से भी फोन पर बात कर इसपर आपत्ति जतायी थी।

फ्रांस के तीखे तेवर की वजह से इजरायल की सरकार पने स्तर पर भी पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

इस जांच का दायरा यह देखना है कि इस पेगासूस स्पाइवेयर का नाजायज और राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है, जिसमें लोगों की निजता का हनन हो रहा हो।

दरअसल किसी अज्ञात माध्यम से इस स्पाइवेयर के गलत इस्तेमाल और उसके शिकार बने लोगों की एक सूची उपलब्ध होने के बाद इस पूरे मामले की जांच पत्रकारों के एक वैश्विक संगठन के द्वारा प्रारंभ की गयी थी।




इसी क्रम में जो तथ्य सामने आये थे, उसमें अनेक ऐसे लोगों के नाम का खुलासा हुआ था जो कमसे कम अपराध और आतंकवाद से किसी तरीके से भी नहीं जुड़े थे।

तब जाकर यह आरोप प्रमाणित हुआ था कि इस अत्यंत महंगे स्पाइवेयर को खरीदने वाली सरकारो ने दरअसल इसका बेजा इस्तेमाल किया है।

फ्रांस से पांच मंत्रियों के पहले मैक्रों के फोन पर सेंधमारी

राजनीतिक मकसद साधने के लिए विरोधी दलों के नेताओं के अलावा अफसरों और पत्रकारों के मोबाइलों में यह स्पाइवेयर डाले गये थे।

भारत में इसका खुलासा होने के बाद केंद्र सरकार बार बार इस आरोप से इंकार करती है। दूसरी तरफ इसे बनाने वाली कंपनी ने फिर से फ्रांस के मंत्रियों के फोन हैक होने के बारे में सफाई दी है कि उसकी तरफ से ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है।

स्पाइवेयर बनाने वाली कंपनी एनएसओ का दावा है कि इसे सिर्फ गंभीर किस्म के अपराध और आतंकवाद की रोकथाम के लिए तैयार किया गया है।

यह किसी समाज के व्यक्ति की निजता के हनन अथवा राजनीतिक मकसद से की जानेवाली जासूसी के लिए नहीं बना है।

वैसे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस मामले की तकनीकी जांच कराने की बात कही है। केंद्र सरकार द्वारा जानकारी देने से इंकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला लिया है।



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