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स्फीति घाटी में आये एक भूकंप से यह ममी लोगों को नजर आयी

  • हिमांचल में पाई गयी थी 500-साल पुरानी नैसर्गिक भारतीय ममी

  • क्या साधकों खुद ही ममी में तब्दील हो जाते थे

  • वौद्ध भिक्षुओं में शायद प्रचलित थी यह विधि

  • लंबे समय तक उपवास से शरीर ऐसा बना

@राकेश अग्रवाल

नईदिल्लीः स्फीति घाटी में 1975 में आये एक भूकंप में बौद्ध भिक्षु साँगा तेनज़िंग की ममी

मिली थी, जो 500 साल पुरानी थी । इस ममी की सबसे ख़ास बात यह थी कि इसे किसी

भी लेप इत्यादि लगा कर नहीं रखा गया था, बल्कि तेनज़िंग ने उत्तरी जापान के

यामागति बौद्ध भिक्षुओं द्वारा स्वयं को ममी के रूप में रखने की पद्धति का उपयोग किया

था । विशेष बात यह है कि नैसर्गिक रूप में बनी इस ममी पर मौसम का कोई असर नहीं

पड़ा था और यह नैसर्गिक ही थी । यहाँ तक उनके दांत, स्किन और बाल वैसे ही पाए गए

थे । इस ममी में तेनज़िंग दृढ़ता से बैठे हुए हैं, जिसमें उनकी एक मुट्ठी पैर के पास है और

उनकी ठोड़ी घुटने पर टिकी है । रिसर्च में पाया गया था कि उनके शरीर में नाइट्रोजन का

लेवल बहुत ज्यादा था, जो इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने लम्बे समय तक उपवास

किया था । उनके शरीर में गर्दन से लेकर पैरों तक ध्यान की एक बेल्ट भी पाई गयी थी जो

उनकी मुद्रा को बताती है । यामागति भिक्षु केवल पेड़ो पर आधारित भोजन ही करते हैं । वे

अपने भोजन में पेड़ की जड़ें, नट्स और जड़ी-बूटी ही खाते हैं जिससे उनके शरीर में वसा

(फैट्स) की मात्रा नहीं के बराबर पायी जाती है । इससे ज्ञान के चरम बिंदु पर पहुँचाना

आसान होता है और उसमें कई महीने या 10 वर्ष तक का समय लग जाता है ।

स्फीति घाटी की ममी कई वैज्ञानिक जानकारी देने वाली है

रिसर्च में यह भी बताया गया था कि ये भिक्षु विषैले नट्स और पेड़ों का विषैला रस भी पीते

थे जिससे उल्टी (वमन) होती थी और मरने के बाद शरीर की कीड़ों से रक्षा भी होती थी ।

मृत्यु होने तक भिक्षु के शरीर में फैट की मात्रा समाप्त हो जाती थी और शरीर सिकुड़ कर

छोटा हो जाता था जिससे उस सूखे शरीर का विघटित (डीकम्पोज़) हो पाना संभव नहीं हो

पाता था । ऐसी मान्यता है कि तेनज़िंग ने अपने अनुनाईयों से कहा था कि उनके शरीर को

तब ही ममी बनाया जाये जब पूरा इलाका बिच्छुओं से संक्रमित हो जाये । कहा जाता है कि

जब उनकी आत्मा ने उनका शरीर छोड़ा था उस समय आकाश में इंद्रधनुष दिखाई दिया

था और बिच्छू गायब हो गए थे । तेनज़िंग की ममी जहाँ वो मिली थी वहां से 3.5 कि. मी.

दूर एक मंदिर में आम जनता के लिए रखी गयी है । स्फीति का यह इलाका यह मंदिर

तिब्बत की सीमा के पास है ।

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