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गोरैया की उपस्थिति से चंबल घाटी के पर्यटक होते है खुश

इटावाः गोरैया इनदिनों खोजे से नहीं मिलती। दरअसल मोबाइल टावरों के विकिरण से

उन्हें शायद परेशानी होती है। इसी वजह से यह छोटी सी चिड़िया अब शहरों और कस्बों में

कम नजर आती है। लिहाजा इसके विलुप्त होने की खबरें भले ही आती हो लेकिन चंबल

घाटी में से सुरक्षित हैं। चंबल घाटी से जुड़े इटावा में गोरैया लाखों की तादात में देखी जा

रही है। इटावा सफारी पार्क के उपनिदेशक सुरेश चंद्र राजपूत ने बताया कि आज गोरैया

दिवस मनाया जा रहा है। भले ही गोरैया के बारे मे देश-दुनिया से विलुप्त होने की खबरें

आती हों लेकिन चंबल घाटी से जुडे इटावा में यह नन्हीं चिड़िया लाखों की तादात में देखी

जा रही है। उन्होंने बताया कि यहां गोरैया की मौजूदगी उन तमाम रिर्पोटों को खारिज

करती है, जो उसके लुप्त होने के बारे में चिंता जता रही हैं। उन्होंने बताया कि आज इटावा

सफारी पार्क में करीब 200 के आसपास घौसले सभी कर्मियों को बांटे गये है ताकि इस

चिडिया का संरक्षण किया जा सके।

गौरतलब है कि ब्रिटेन की ‘रॉयल सोसायटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स’ ने भारत से लेकर

विश्व के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों के आधार पर

इस पक्षी को ‘रेड लिस्ट’ में डाला है।

गोरैया अब कई हिस्सों में रेड लिस्ट में शामिल

कभी घरों की मुंडेरों पर चहचहाने वाली गौरैया करीब-करीब विलुप्त होने के कगार पर आ

खडी हुई थी। इसको लेकर वन विभाग अधिकारियों और तमाम पर्यावरणीय संस्थाओं की

ओर से चिंता जताई जाने लगी थी। आम लोग गोरैया को देखने के लिए तरस गए थे।

उपनिदेशक ने बताया कि इटावा सफारी पार्क में जहॉ बडी तादात मे गोरैया चिडिया देखी

जा रही है जिसकी संख्या अनुमानित कम से कम से कम दस हजार के बीच आंकी जा

सकती है। उन्होंने कहा कि यमुना चंबल के बीहड़ो में इनकी संख्या इतनी है कि इनका झुंड

देख कर खुश होना लाजिमी है।

चंबल के बीहड़ इन्हें रास आ रहे हैं

असल में चंबल के बीहड़ में खासकर अधिक हरियाली होने के कारण गोरैया यहॉ पर बडी

आसानी से रह रही है। इटावा के बाइस ख्बाजा वासी मुहम्मद वारिस बताते है कि गोरैया

चिडिया बहुत संवेदनशील पक्षी हैं और मोबाइल फोन तथा उनके टावर्स से निकलने वाले

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियेशन से भी उसकी आबादी पर असर पड रहा है। इसके अलावा शहरों

में भव्य इमारतों के निर्माण और मोबाइल टावरों से निकलने वाली किरणों के कुप्रभाव के

चलते गोरैया शहरी इलाकों से पूरी तरह से लुप्त हो रही है। पर्यावरण के लिये काम करने

वाली संस्था स्कॉन के सचिव संजीव चौहान ने बताया कि गोरैया एक संकटग्रस्त पक्षी है।

ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे देशों में इनकी संख्या तेजी से गिर रही है लेकिन नीदरलैंड

में तो इन्हें दुर्लभ प्रजाति के वर्ग में रखा गया है। गोरैया को बचाने की कवायद में दिल्ली

सरकार ने इसे अब राज पक्षी भी घोषित कर दिया है । एक अध्ययन के अनुसार भारत

में इनकी संख्या करीब साठ फीसदी तक घट गई है। इस गंभीर स्थिति की तरफ दुनिया

का ध्यान आकृष्ट करने के लिए वर्ष 2010 से गोरैया दिवस मनाया जा रहा है।

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