अंतरिक्ष के स्पेस स्टेशन पर भी अज्ञात वाइरसों का पता चला

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  • स्पेस स्टेशन के टॉयलेट में पांच किस्म के विषाणु

  • बीमारी करते हैं इस श्रेणी के जीवाणु

  • अंतरिक्ष में भी दूसरे प्रकार का जीवन है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अंतरिक्ष भी विषाणुओं से मुक्त नही हैं।

यानी जिस इलाके को हम जीवन के लायक नहीं समझते थे, वहां भी जीवन है और दूसरी अवस्था में है।

अंतरिक्ष के स्पेस स्टेशन में इसकी पुष्टि हुई है।

साथ ही जांच में इस स्पेस स्टेशन के टॉयलेट से पांच ऐसे जीवाणुओं का पता चला है, जिनकी पहचान अब तक नहीं हो पायी है।

समझा जाता है कि ये जीवाणु वहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत पर बुरा असर भी डाल सकते हैं।

वैज्ञानिक परीक्षण में इस टॉयलेट से पांच ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे यह पता चलता है कि

वहां पांच अलग अलग किस्म के जीवाणुओं की मौजूदगी रही है।

इनमें से एक की पहचान और नामकरण भी हो चुका है।

वैज्ञानिकों ने इसे एंटरोवैक्टर बुगांडेनेसिस का नाम दिया है।

इसके जिनोम कुछ इस प्रकार के हैं, जो पृथ्वी पर पैदा होने वाले शिशुओं को बीमार करने वाले जीवाणुओं के होते हैं।

इस वजह से समझा जाता है कि इन विषाणुणों में अंतरिक्ष यात्रियों की बीमार करने की क्षमता है।

इस विषाणुओं की मौजूदगी प्रमाणित होने की वजह से अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत की सुरक्षा का सवाल उठ गया है।

भविष्य में इससे बचाव कैसे किया जाए इस पर शोध प्रारंभ भी हो चुका है।

खास कर यह आशंका व्यक्त की गयी है कि अगर वहां जीवन संभव है तो यह भी संभव है कि

अंतरिक्ष के किसी इलाके में इन विषाणों की पूरी बस्ती ही हो।

अंतरिक्ष में हो सकती है इन विषाणुओं की पूरी बस्ती भी

जहां जाने पर इंसान तुरंत बीमार पड़ सकता है।

कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि

पांच अलग अलग किस्म की बैक्टेरिया की पहचान होने के बाद उनसे मानव जीवन को होने वाले

खतरों के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने के लिए अनुसंधान चल रहे हैं।

जिस बैक्टेरिया की पहचान पृथ्वी पर उपलब्ध बैक्टेरिया से मिलती जुलती होने की तरह हुई है, वह बैक्टेरिया कितना खतरनाक है, इसे अधिक ध्यान से देखा जा रहा है।

वैज्ञानिक पहले से ही पृथ्वी पर मौजूद इस विषाणु के असर को जानते हैं, जो अस्पताल में अक्सर ही पैदा होता है और मरीजों तक को बीमार कर देता है।

खास तौर पर इसका असर उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका में अधिक होता हुआ पाया गया है।

अंतरिक्ष के स्पेस स्टेशन पर स्थापित टॉयलेट में इसी किस्म के विषाणु पाये जाने के बाद यह माना जा सकता है कि

जहां मानव समझ के हिसाब से जीवन संभव नहीं हैं, वहां अंतरिक्ष में जीवाणु हैं

और उनमें से कुछ ऐसे भी हो सकते हैं, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक हों।

इस अनुसंधा से जुड़े वैज्ञानिक कस्तुरी वेंकटश्वरन कहते हैं कि यूं तो यह विषाणु मानव जीवन के लिए

उतने खतरनाक नहीं हैं लेकिन भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं की वजह से इस पर पूरी जानकारी होनी ही चाहिए।

इसलिए जिनोम के स्तर पर एक जैसे नजर आने वाले बैक्टेरिया पर और अधिक शोध करने की जरूरत है।

लेकिन इससे इतना तो स्पष्ट हो गया है कि वहां भी जीवन संभव है और वह कुछ ऐसी अवस्था में है,

जिन्हें इंसान की आंख देख नहीं सकती। यह एक अदृश्य खतरे की स्थिति है।

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