अंतरिक्ष की स्माइली दरअसल नये तारों का समूह है

अंतरिक्ष की स्माइली दरअसल नये तारों का समूह है
  • काम पर लौटे हब्बल टेलीस्कोप ने वैज्ञानिकों की दी नई तस्वीर

  • सोशल मीडिया में स्माइल परिचित है

  • अंतरिक्ष में नये तारों के जन्म की पुष्टि

  • गुरुत्वाकर्षण की वजह से प्रकाश भी तिरछी

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः अंतरिक्ष में तारों के बीच एक मुस्कुराते हुए चेहरे के आकार की रोशनी ने

पिछले कुछ दिनों से वैज्ञानिकों को हैरान कर रखा था।

आम तौर पर अंग्रेजी में इस किस्म के आकार को स्माइली के नाम पर जाना जाता है।

इसका उपयोग इनदिनों सोशल मीडिया में भी प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए खूब किया जाता है।

अंतरिक्ष की इस स्माइली को देखकर इसकी वजह जानने की इच्छा वैज्ञानिकों में बढ़ी हुई थी।

कुछ दिनों तक काम नहीं करने के बाद अचानक सक्रिय हुए अंतरिक्ष के सबसे बड़े टेलीस्कोप हब्बल ने इसके चित्र भेजे हैं।

इनके आधार पर वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि अंतरिक्ष में यह जो मुस्कुराता हुआ प्रतीक है, वह तारों के एक समूह का है।

इन तारों का निर्माण हाल ही में हुआ है। अंतरिक्ष की भाषा में यह नवजात तारे हैं।

जिनका समूह मिलकर यह आकार बना रहा है।

हब्बल के तीसरे कैमरे (डब्ल्यूएफसी 3) ने यह चित्र दर्ज किया था।

समझा जा रहा है कि दरअसल वहां पर गुरुत्वाकर्षण की वजह से प्रकाश की किरणें भी मुड़ रही है।

इससे मुस्कुराने का यह आकार जन्म ले रहा है।

वैज्ञानिक गणना के मुताबिक जहां पर यह स्माइली बन रहा है वह अंतरिक्ष के एसडीएसएस जे 0952+3434 के करीब है।

अंतरिक्ष में अलग अलग क्षेत्रों का नाम भी रखते हैं वैज्ञानिक

वैज्ञानिक इस सौरमंडल के अलग अलग क्षेत्रों का नामकरण इसलिए भी करते हैं

ताकि अन्य वैज्ञानिकों अथवा खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों को इलाके की पहचान करने में आसानी हो।

दो बड़े तारों के ठीक नीचे टेढ़ी होकर गुजरती प्रकाश किरण से वैज्ञानिक यह अनुमान लगा रहे हैं कि

वहां कोई और बड़ा तारा है, जिसके गुरुत्वाकर्षण की वजह से प्रकाश की किरणें इस तरह तिरछी नजर आ रही है।

नीचे के इस हिस्से में प्रकाश की किरणें तिरछी होने की वजह से ही इस स्माइली का आकार बना रही हैं।

वर्ष 1990 में अंतरिक्ष अनुसंधान के काम में लगाये गये हब्बल टेलीस्कोप ने अपने काम के 28 वर्ष पूरे कर लिये हैं।

समझा जा रहा है कि यह अब अधिक दिनों तक क्रियाशील नहीं रह पायेगा।

लेकिन इस 28 वर्षों में इस टेलीस्कोप ने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष के अनेक अनजाने रहस्यों की जानकारी दी ही।

जिन सूचनाओं के आधार पर वैज्ञानिकों को इस प्रकांड ब्रह्मांड के बारे में बहुत कुछ नया जानने को भी मिला है।



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