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अंतरिक्ष में नजर रखने का नया उपकरण हब्बल टेलीस्कोप का स्थान लेगा




  • जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप 12 वर्षों के बाद तैयार
  • अंतरिक्ष के अनुसंधान में नये आयाम
  • इस दूरबीन के दोनों हिस्सों को जोड़ने का काम पूरा
  • कुछ खास उपाय भी किये गये हैं ताकि यह बेहतर काम कर सके
प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः अंतरिक्ष में नजर रखने का नया उपकरण अब लगभग बनकर तैयार हो गया है।

जेम्स वेब टेलीस्कोप नामक का यह खगोल दूरबीन अब हब्बल टेलीस्कोप का स्थान लेगा।

हब्बल टेलीस्कोप को काफी पहले ही बदल दिया जाना था।

लेकिन यह नया दूरबीन तब तक तैयार नहीं हो पाया था।

वैसे इस दौरान अपने इस्तेमाल की अवधि पूर्ण कर लेने के बाद भी हब्बल टेलीस्कोप

अब तक बेहतर तरीके से काम कर रहा है।


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अब उसके स्थान पर यह नया जेम्स बेव टेलीस्कोप काम करने वाला है।

इस नये टेलीस्कोप को बनाने का काम पिछले 12 वर्षों से चल रहा है।

अब उसके दोनों हिस्सों को जोड़ने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

सब कुछ ठीक रहा तो वर्ष 2021 में इसे अंतस्थापित में स्थापित कर दिया जाएगा।

नासा के इस टेलीस्कोप में कई अत्याधुनिक उपकरण जोड़े गये हैं।

जिनकी वजह से ऐसा माना जा रहा है कि यह हब्बल के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से काम करेगा और अंतरिक्ष के बारे में और नई जानकारी उपलब्ध करा पायेगा।

इस नये खगोल दूरबीन में खास तौर पर इंफ्रा रेड किरणों से सुसज्जित उपकरण लगा है, जो काफी दूर तक की घटनाओं को साफ साफ देख सकता है।

इसे स्थापित किये जाने के बाद नासा के नियंत्रण कक्ष को इसके माध्यम से अंतरिक्ष संबंधी जानकारी हासिल होती रहेगी।

नासा ने बुधवार को इसके दोनों हिस्सों को जोड़े जाने की जानकारी दी है।

अंतरिक्ष में नजर रखने के पहले इसे अच्छी तरह जांचा जाएगा

अब इन दोनों हिस्सों को जोड़ने के बाद उसमें मौजूद तमाम उपकरणों की क्रमवार तरीके से जांच की जाएगी।

जांच में सब कुछ सही पाये जाने के बाद उनका एक एक कर वास्तविक परीक्षण भी किया जाएगा।

इस काम में खास तौर पर इसके बिजली के कनेक्शनों की जांच एक कठिन काम है और इसे पूरी सावधानी से पूरा किया जाएगा।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि एक बार अंतरिक्ष में भेज दिये जाने के बाद इस किस्म की किसी गड़बड़ी को वहां ठीक नहीं किया जा सकेगा।

मिली जानकारी के मुताबिक इस नये खगोल दूरबीन को बनाने में नासा ने करीब दस खबर डॉलर खर्च किये हैं।

हब्बल के जीवनकाल का अंदाजा तो वैज्ञानिकों को पहले से ही था।

इसी वजह से 12 साल पहले इसका निर्माण प्रारंभ किया गया था।


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खगोल विज्ञान में नई नई तरक्की होने की वजह से इस नये दूरबीन की संरचना में आवश्यकतानुसार फेरबदल भी किये गये। इसमें बाद में भी कई नये उपकरणों को स्थान दिया गया है।

इन उपकरणों से भी खगोल विज्ञान के अनुसंधान में मदद मिलेगी।

इस नये टेलीस्कोप के बारे में उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक इसमें अनेक नये किस्म के वैज्ञानिक उपकरणों

के अलावा सूर्य की तेज किरणों से टेलीस्कोप के संवेदनशील उपकरणों को बचाने के भी पर्याप्त प्रबंध किये गये हैं।

इस बारे में जेम्स बेव टेलीस्कोप के प्रोजेक्ट मैनेजर बिल ओच्स ने कहा कि यह अपने आप में एक अद्भूत वैज्ञानिक उपकरण तैयार हो रहा है।

इसे मेरीलैंड के नासा गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के प्रयोगशाला में बनाया जा रहा है।

इसे बनाने में हजारों लोगों की बीस साल का परिश्रम है

उनके मुताबिक इसकी डिजाइन को तैयार करने में हजारों लोगों की भूमिका रही है और यह बीस साल के शोध का परिणाम है।




इसे तैयार करने में नासा के अलावा कनाडा की स्पेस एजेंसी, नार्थ्राप ग्रूमैन एवं अन्य

वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक संस्थानों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

जिन्होंने इसे कैसे तैयार करना चाहिए और उसमें क्या कुछ नया जोड़ा जाना चाहिए,

इस बारे में समय समय पर नासा की मदद की है।

बिजली कनेक्शनों की जांच कर लेने के बाद इसमें पांच स्तरों के सूर्य की रोशनी रोकने के उपाय लगाये जाएंगे।

इन्हें खास तौर पर इसलिए लगाया जा रहा है ताकि अंतरिक्ष पर नजर रखने वाले उपकरण गर्म नहीं हों

और वे इंफ्रा रेड किरणों की बरसात को रोक सकें।

इससे यह दूरबीन बेहतर तरीके से लगातार काम करता रहेगा।


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