उल्कापिंड को पृथ्वी पर टकराने से रोकेंगे विशेष अंतरिक्ष यान

उल्कापिंड को पृथ्वी पर टकराने से रोकेंगे विशेष अंतरिक्ष यान
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  • साइंस फिक्शन फिल्मों की कल्पना सच करने में जुटे हैं नासा के वैज्ञानिक

नईदिल्लीः उल्कापिंड के खतरों से मुकाबला करने के लिए दूसरी विधि पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।



यह कई विज्ञान आधारित फिल्मों की कहानी से मिलती जुलती है।

इसके तहत अंतरिक्ष यान खुद आने वाले उल्कापिंड से जा टकरायेगा

और उसे अत्यंत प्रभावशाली बमों के विस्फोट से टुकड़ों में खंडित कर देगा।

इस किस्म की घटनाएं हम कई हॉलीवूड फिल्मों में पहले भी देख चुके हैं।

इसलिए माना जा सकता है कि नासा के वैज्ञानिक उसी फिल्मी सोच को

अब वास्तव में ढालना की दिशा में काम कर रहे हैं।

नासा सहित अनेक खगोलशास्त्री सौर मंडल में मंडराते तमाम उल्कापिंड पर नजर रखे हुए हैं।

इनमें से अत्यंत छोटे आकार के उल्कापिंड अक्सर ही पृथ्वी पर गिरते रहते हैं।

बड़े आकार के उल्कापिंड की धुरी पर ध्यान रखा जाता है।

जब किसी ऐसे उल्कापिंड के अपनी धुरी की वजह से पृथ्वी से टकराने की आशंका नजर आती है तो उसपर अतिरिक्त नजरदारी प्रारंभ हो जाती है।

उल्लेखनीय है कि कई लाख वर्ष पूर्व एक बड़े आकार के उल्कापिंड के पृथ्वी से आ टकराने की वजह से ही भीषण विस्फोट हुआ था।

इस विस्फोट का परिणाम था कि पृथ्वी पर का हिम युग समाप्त हो गया था।

इसी हिमयुग की समाप्ति और भीषण विस्फोट की वजह से इस पृथ्वी पर से डायनासोरों का सफाया भी हो गया था।

जिसके बाद पृथ्वी पर नये युग और सृष्टि की रचना हुई थी।

अब नासा के वैज्ञानिक किसी ऐसे बड़े उल्कापिंड के पृथ्वी पर आ गिरने को लेकर ही चिंतित हैं।

इसी वजह से इस विकल्प पर काम हो रहा है।

उल्कापिंड के पृथ्वी पर गिरने से रोकने के हैं सारे उपाय

नासा की इस तैयारी के मुताबिक अगर वाकई कोई उल्कापिंड पृथ्वी की तरफ बढ़ आता है तो उसे अंतरिक्ष में ही तोड़कर नष्ट करने के लिए अंतरिक्ष यान का उपयोग किया जाएगा।

इसके लिए नासा ने जिस अभियान को प्रारंभ किया है, उसे डार्ट (डबल एस्ट्रोयड रिडाइरेक्शन टेस्ट) नाम दिया गया है।

इस योजना के तहत जो अंतरिक्ष यान बनाये जा रहे हैं वे वर्ष 2020 से 2021 के बीच अंतरिक्ष में स्थापित कर दिये जाएंगे।

उसके पहले पृथ्वी पर ही इनकी बारिकी से जांच की जाएगी।

इस योजना को दो तरफा आयाम दिया गया है।

वैज्ञानिक पहले तो इस यान को सीधे उल्कापिंड से टकराने के विकल्प पर काम कर रहे हैं ताकि इस टक्कर के बाद उल्कापिंड की धुरी बदल जाए और वह दूसरे रास्ते पर आगे बढ़ जाए।

दूसरा विकल्प अत्यंत शक्तिशाली परमाणु हथियारों के विस्फोट से उल्कापिंड को पूरी तरह उड़ा देना है।

नासा के एंड्रयू रिवकिन ने कहा कि डार्ट की इस योजना के तहत हम पहले तो उल्कापिंड के आकार प्रकार को समझने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेने की स्थिति में होंगे।

प्राथमिक कोशिश को उल्कापिंड को पृथ्वी की धुरी से अलग कर देने की ही है।

अगर ऐसा कर पाना संभव नहीं हुआ तो उल्कापिंड पर विस्फोट के विकल्प पर विचार किया जाएगा।

समझा जा रहा है कि अक्टूबर 2022 में पृथ्वी के पास आने वाले एक उल्कापिंड को लेकर रास्ते से हटाने के लिए ही यह सारी तैयारी चल रही है।

पृथ्वी की तरफ आते इस उल्कापिंड का नाम डिडिमोस रखा गया है।

इसके दो टुकड़े अलग अलग लेकिन साथ साथ हैं।

इनमें से डिडिमोस के उपग्रह के तौर पर घूमते डिडिमोस बी को ही रास्ते से हटाने की योजना है।

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