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सोवियत संघ के स्पूतनिक के अंतरिक्ष में पहुंचाने से बौखलाया था अमेरिका

  • एक पुस्तक में योजना का खुलासा

  • शीतयुद्ध के दौर में तैयारी चरम पर थी

  • अंतरिक्ष से ही पृथ्वी पर कब्जा करने की तैयारी

  • परमाणु बम से चांद को उड़ाने वाला था अमेरिका

प्रतिनिधि

नई दिल्ली: सोवियत संघ के साथ अमेरिकी रस्साकस्सी चलती थी। अब सोवियत संघ

नहीं रहा तो यह तनाव अब रुस के साथ बढ़ती हुई नजर आने लगी है। इसी बीच शीत युद्ध

के काल में दोनों महाशक्तियों के बीच के तनाव के बीच कई पुरानी और रोचक जानकारी

सामने आयी हैं। यूं तो अमेरिका को दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में से एक माना जाता

है। उसके पास सुपरपॉवर भी है, लेकिन अक्सर अपनी धाक जमाने के लिए अमेरिका कई

खुफिया योजनाएं भी बनाता रहता है। ऐसे ही एक सीक्रेट प्लानिंग का खुलासा सीक्रेट्स

फ्रॉम द ब्लैक वॉल्ट किताब में हुआ है। इस पुस्तक में यह दावा किया गया है कि 70 साल

पहले अमेरिका चांद को परमाणु बम से उड़ाने की योजना बना चुका था। जॉन ग्रीनवाल्ड

जूनियर की किताब सीक्रेट्स फ्रॉम द ब्लैक वॉल्ट में अमेरिका की चांद के बारे में हुई

प्लानिंग के बारे में जानकारी दी गयी है। किताब के मुताबिक जब अमेरिका और सोवियत

संघ के बीच शीत युद्ध के चलते अंतरिक्ष की दौड़ जोरों पर थी। इस पूरे प्रकरण में यह ध्यान

रखने वाली बात है कि महाशक्तियों की होड़ में शीत युद्ध के काल के बाद जो कमी आयी

थी, वह फिर से तेज होने लगी है। दरअसल सोवियत संघ के विघटन के बाद काफी दिनों

तक अमेरिका का एक छत्र राज चल रहा था। इस बीच ही युद्ध की संभावित तकनीकों में

बदलाव हुआ। दूसरी तरफ सोवियत संघ के विघटन से सुस्त पड़ा रुस फिर से उठ खड़ा

हुआ। इन दोनों से अलग चुपचाप तरीके से काम करता हुआ चीन भी आणविक शक्ति

अर्जित करता चला गया।

सोवियत संघ के बाद अब रुस से मिल रही चुनौती

लेकिन युद्ध की सीमा फिर से धरती से बाहर निकलकर अंतरिक्ष तक जा पहुंची। उसके बाद

से ही अंतरिक्ष के माध्यम से किसी भी संभावित युद्ध की दिशा और परिणाम बदलने की

अनेक तकनीकों का विकास हो चुका है। इसके तहत अंतरिक्ष से लेजर किरणों की मदद से

दुश्मन के मिसाइलों को ध्वस्त करने तथा दुश्मन देशों के सैटेलाइटों को अंतरिक्ष में ही

नष्ट करने की तकनीक भी विकसित हो चुकी है। इस क्रम में खुद भारत ने भी अंतरिक्ष में

दुश्मन देश के सैटेलाइट को नष्ट करने का सफल परीक्षण कर लिया है।

इस स्थिति को याद करने के क्रम में पुस्तक में यह लिखा गया है कि तब अमेरिका में इस

बात का प्रस्ताव रखा गया था कि चांद को आणविक हथियारों से उड़ा दिया जाए। इससे

पूरी दुनिया पर उसकी हुकूमत चलेगी। मगर इसी दौरान अमेरिका के मंसूबों पर पानी फिर

गया क्योंकि साल 1959 में सोवियत यूनियन ने बाजी मारते हुए स्पूतनिक एक को

अंतरिक्ष में पहुंचाया। तभी अमेरका ने चांद को परमाणु बम से उड़ाने की योजना बनाई।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक सोवियत संघ ने चांद को अपने रणनीतिक और सैन्य

उद्देश्यों के लिए चंद्रमा का उपयोग किया तो वह चांद को ही उड़ा देगा। किताब में यह भी

बताया गया कि दुनिया में नाम कमाने के लिए अमेरिका ने चांद पर एक स्थायी बेस

बनाया था। इस प्लान का नाम प्रोजेक्ट होराइजन था जिसमें सैटर्न 5 रॉकेट प्रक्षेपणों की

योजना थी।

चांद पर बस्ती बनाने पर चल रहा अनुसंधान

इसके अलावा चांद पर बस्ती बनाने की भी योजना तैयार की गई थी। वैसे चांद को बम से

उड़ाने की अमेरिका को कभी जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि दूसरे देशों के मुकाबले अमेरिका के

वैज्ञानिक अंतरिक्ष पर सबसे पहले पहुंचे थे। अब तो अंतरिक्ष से दुनिया की हरेक गतिविधि

पर लगातार नजर रखने का काम चल रहा है। हर महाशक्ति अपने अपने सैटेलाइटों के

जरिए दुश्मन देशों की गतिविधियों पर नजर रखती है। इसके अलावा अंतरिक्ष से विभिन्न

इलाकों में सैन्य तैयारियों का भी लगातार जायजा लिया जाता है। साथ ही दुश्मन देश के

पानी के जहाज और सबमेरिन कहां तैनात हैं, उसपर भी नजर रखी जाती है। खुद अमेरिका

ने हाल ही में चुपके से अपने अंतरिक्ष प्लेन का परीक्षण भी कर लिया है। साथ ही फॉल्कन

रॉकेट की मदद से निजी परियोजना के अंतरिक्ष यान को भी अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर

पहुंचाने में सफलता मिल चुकी है। इन सारे घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि पृथ्वी पर

महाशक्ति बने रहकर अपने व्यापारिक हित को साधने के जुगाड़ में लगे बड़े देश युद्ध की

सीमा को पृथ्वी के बाहर अंतरिक्ष तक ले जाने में कामयाब रहे हैं। इन तमाम प्रयोग और

परीक्षणों का ही नतीजा है कि पृथ्वी के सैटेलाइटों का कचड़ा अब अंतरिक्ष में बेतरबीत

तरीके घूम रहा है और भावी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए बड़ी चुनौती बनता चला जा रहा है।


 

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