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दक्षिण अमेरिका के इलाके में फिर से पर्यावरण असंतुलन का खतरा




  • पहले से ही जीवित माना जाता है

  • इक्वाडोर में इसे काला दैत्य कहा जाता है

  • पहाड़ फट गया तो आयेगी बहुत बड़ी तबाही

  • टुंगुराहुआ ज्वालामुखी फिर से जागने लगा है

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः दक्षिण अमेरिका के इलाके में फिर से ज्वालामुखी विस्फोट का खतरा नजर

आने लगा है। वहां का टुंगुराहुआ ज्वालामुखी फिर से विस्फोट होने के संकेत दे रहा है। वैसे

इसे जीवंत ज्वालामुखी ही माना जाता है। इसलिए ऐसे संकेत मिलने के बाद पहले से ही

सतर्कता के लिहाज से लोगों को सुरक्षित इलाकों में चले जाने के कह दिया गया है।

दक्षिण अमेरिका के इस ज्वालामुखी के विस्फोट से पहले भी काफी नुकसान हो चुका है।

इसी वजह से इसकी गतिविधियों की निगरानी होती है। निगरानी की वजह से ही यह पहले

से पता है कि यह ज्वालामुखी अंदर से सदैव सक्रिय रही है। इसी वजह से इसे जीवंत

अवस्था में माना जाता है।

इस बार टुंगुराहुआ ज्वालामुखी के बारे में वैज्ञानिकों को यह चिंता सता रही है कि कहीं यह

इस बार के दबाव में पूरी तरह टूटकर बाहर न आ जाए। काफी ऊंचे पर्वतशिखर के ऊपर से

निकलने वाले लावा की वजह से पहाड़ का आंतरिक इलाका भी कमजोर हो जाता है। ऐसी

स्थिति में अगर फिर से ज्यादा दबाव पड़ा तो यह पहाड़ ही टूटकर बिखर सकता है। वैसी

स्थिति में इसके खतरनाक नतीजे भी हो सकते हैं। दुनिया में पहले भी इस तरीके से

ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान पहाड़ों के फट जाने की घटनाएं दर्ज हैं। दरअसल पहाड़

फटने की स्थिति में अंदर से निकलने वाला लावा किस रास्ते पर आगे बढ़ जाएगा, इसका

कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। इसी वजह से पहाड़ के विस्फोट होने अथवा पूरी

तरह टूट जाने दोनों ही स्थिति में नुकसान होने का ज्यादा अंदेशा होता है।

दक्षिणी अमेरिका इलाके में पहले भी आयी थी तबाही

इस टुंगुराहुआ ज्वालामुखी को काला दैत्य भी कहा जाता है। इस बार उसके अंदर की

हलचल की वजह से पहाड़ के बाहरी आवरण पर होने वाले बदलाव भी नजर आने लगे हैं।

इसी वजह से यह माना जा रहा है कि इस पहाड़ का आंतरिक इलाका शायद विस्फोट की

वजह से कमजोर हो चुका है। लिहाजा अगले दबाव में यह पूरी तरह ध्वस्त भी हो सकता

है। इस पर हुए शोध के नतीजों के आधार पर कैम्ब्रोन स्कूल ऑफ माइंस के डॉ जेम्स

हिक्की ने यह रिपोर्ट दाखिल की है। उन्होंने आंकड़ों के आधार पर यह बता दिया है कि

पहाड़ का पश्चिमी छोर लगातार आकार बदलता जा रहा है। इससे तय है कि यह पहाड़

फटने के लिए तैयार हो रहा है। अंदर से जब कभी भी जोर का झटका आयेगा तो इस

इलाके से अथवा किसी अन्य छोर से यह पहाड़ पूरी तरह फट जाएगा। उनके मुताबिक

जिस भी दिशा में यह विस्फोट होगा, उसके रास्ते पर आने वाले सभी इलाकों में बड़ी

तबाही होगी क्योंकि लावा के साथ साथ विस्फोट से पहाड़ के टुकड़े भी काफी दूर दूर कर

बिखर जाएंगे। साथ ही आसमान पर ज्वालामुखी विस्फोट से उत्पन्न होने वाले धुएं के

गुबार से भी पर्यावरण को काफी नुकसान होगा क्योंकि यह धूलकण युक्त धुआं विषैला

भी होता है और आसमान की ऊंचाई पर होने की वजह से दूर तक फैलता चला जाता है।

इस जीवंत ज्वालामुखी के दशा और दिशा पर निष्कर्ष निकालने के लिए शोधकर्ताओं ने

सैटेलाइट के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया है। जिसके आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे

पर पहुंचे हैं कि अंतरिक्ष से ही पहाड़ के आकार में हो रहा यह बदलाव नजर आ रहा है।

यह ज्वालामुखी वर्ष 1999 से ही जीवंत देखा जा रहा है

टुंगुराहुआ ज्वालामुखी को वर्ष 1999 से ही जीवंत अवस्था में देखा जा रहा है। पहली बार

जब इसमें बड़ा विस्फोट हुआ था तो इलाके के 25 हजार लोगों को आनन फानन में हटाना

पड़ा था। वैसे वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि करीब तीन हजार वर्ष पूर्व भी इसमें विस्फोट

हुआ था जिसकी वजह से दक्षिण अमेरिका के इलाके की पूरी संरचना ही बदल गयी थी।

इस इलाके के अनेक भूभाग पर प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोट के प्रमाण मिले हैं। पिछली

बार जब इस विस्फोट के आधुनिक विज्ञान की आंखों से देखा गया था तो इसका असर

करीब 80 वर्गकिलोमीटर तक फैला हुआ था। इस पूरे इलाके में मिट्टी, पत्थर और बर्फ के

साथ साथ लावा भी बहकर आया था।

यह पहाड़ दूर से काला नजर आता है। शायद इसी वजह से दक्षिण अमेरिका के इस इलाके

के  स्थानीय लोगों ने इसे काला दैत्य का नाम दे रखा है। करीब पांच हजार मीटर की ऊंचाई

तक पहुंचे इस पहाड़ के शीर्ष से विस्फोट होने का प्रभाव भी दूर तक होता है। लेकिन अगर

पहाड़ का कोई हिस्सा इस बार ढह जाता है तो इसके खतरनाक नतीजे हो सकते हैं, ऐसा

पहले ही बता दिया गया है। कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि लगातार दबाव में होने की वजह से

पहाड़ की ऊंचाई भी धीरे धीरे बढ़ती चली गयी है। वर्तमान में यह शंकु के आकार का

आसमान की ऊंचाई की तरफ है। लेकिन पहाड़ के निचले हिस्से दबाव की वजह से

कमजोर पड़ चुके हैं।



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