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दक्षिण अफ्रीका के कालाहारी क्षेत्र की खुदाई में पाया गया अजीब साक्ष्य

  • लाख वर्ष पहले भी कोई इंसान कीमती पत्थर रखता था

  • ऑस्ट्रिज के अंडों में पानी रखने का भी प्रमाण मिला

  • प्राचीन काल में यहां होमो सैपियंस की आबादी थी

  • विशाल रेगिस्तानी इलाका कई देशों तक फैला है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दक्षिण अफ्रीका के कालाहारी को प्राकृतिक तौर पर एक दुरुह क्षेत्र माना जाता है।

सवाना के जंगलों के बीच स्थित यह कालाहारी क्षेत्र वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन का

लोकप्रिय लेकिन महंगा क्षेत्र है। साथ ही यहां का वन्य जीवन भी पर्यटकों को आकर्षित

करता है। इसी कालाहारी क्षेत्र में एक ऐसा साक्ष्य मिला है , जो यह बताता है कि प्राचीन

काल की इंसानों की प्रजाति को भी कीमती पत्थरों की पहचान थी। उस दौर के किसी एक

इंसान द्वारा संजोकर रखे गये स्फटिक के पत्थरों का एक खजाना शोध कर्ताओं को मिला

है। दक्षिण अफ्रीका के क्षेत्र में हुई खुदाई का यह कालाहारी दरअसल एक विशाल

रेगिस्तानी इलाका है। भौगोलिक तौर पर कहें तो यह पूरे बोत्सवाना और नामिविया के

पूर्वी छोर पर एक तिहाई तक फैला हुआ है। दक्षिण अफ्रीका के उत्तरी केप प्रांत तक यह

फैला हुआ है। कुल मिलाकर कहें को यह करीब तीन लाख साठ हजार वर्गमील में फैला

हुआ क्षेत्र है। इसमें से दक्षिण अफ्रीका के इलाके ही थोड़े बहुत विकसित हैं।

वहां के गा मोहाना पहाड़ी के एक खास क्षेत्र में हुई खुदाई से यह पता चला है कि वहां एक

लाख पांच हजार वर्ष पूर्व भी इंसानों की आबादी रहती थी। इससे यह साबित हो जाता है कि

प्राचीन काल के इंसानों की आबादी वाला यह क्षेत्र किसी भीषण प्राकृतिक आपदा के दौर से

गुजरा था। इसी वजह से यह बाद में क्रमवार तरीके से रेगिस्तानी इलाके में तब्दील हो

चुका है। यहां के बारे में कई पौराणिक किवंदतियां भी प्रचलित हैं। स्थानीय इलाकों में गा

मोहाना को एक रहस्यमय इलाका माना जाता है। वहां किसी झील के एक विशाल सांप की

कहानी अधिक प्रचलित है। जिसकी अब भी पूजा होती है। लेकिन इसके बीच ही

शोधकर्ताओं ने वहां यह खोज कर ली है।

दक्षिण अफ्रीका के इस इलाके में अनेक किंवदंतियां भी हैं

वहां हुए अनुसंधान के निष्कर्ष यह बताते हैं कि यह उस दौर के यानी एक लाख पांच हजार

वर्ष पूर्व इंसानों की पहली प्रजाति होमो सैपियंस का बड़ा इलाका था। अब इस इलाके में

प्राचीन काल के इंसानों की जीवन पद्धति जानने के तहत ही वहां खोज हुई है। इस खोज से

एक खास स्थान पर 22 स्फटिक पाये गये हैं। इससे यह भी साबित होता है कि उस दौर का

इंसान इन स्फटिकों को किसी खास आकार में काटने की महारत भी हासिल कर चुका था।

आधुनिक विज्ञान की जांच से इसकी पुष्टि ही है। किसी एक स्थान पर ही इन स्फटिकों के

पाये जाने से यह अनुमान भी लगाया गया है कि वह किसी एक इंसान की संपत्ति थी।

जहां से यह स्फटिक पाये गये हैं वह कोई खदान नहीं है बल्कि इंसानों के वहां रहने के

प्रमाण मौजूद है। इसी आधार पर दक्षिण अफ्रीका के इस क्षेत्र को प्राचीन इंसानों की बस्ती

के तौर पर भी देखा गया है। वैसे प्राचीन कथाओं के मुताबिक इन स्फटिकों को उस दौर की

ईश्वर आराधना से भी जोड़कर देखा जाता है। दक्षिण अफ्रीका के इस क्षेत्र में कई और

रोचक सूचनाएं भी मिली हैं। उनमें ऑस्ट्रिच के अंडों के खोल में पानी रखने का इंतजाम भी

नई खोज है। वहां खुदाई के दौरान एक ही स्थान पर ऐसे अंडों के खोल कई टुकड़ों में मिले

हैं, जिन्हें जोड़कर देखा गया तो वह एक ही अंडे के खोल थे। उनका इस्तेमाल पानी के

भंडारण के लिए किया जाता था। जानवरों की हड्डियों से बने कलाकृतियों का प्रमाण भी

इस खुदाई में मिला है। इस वजह से माना जा रहा है कि प्राचीन काल में वर्तमान दक्षिण

अफ्रीका के इस इलाके में प्राचीन इंसानों की आबादी थी।

उस दौर के इंसान कुछ मामलों में तकनीकी जानकार थे

वैसे भी पूर्व के शोध में अफ्रीकी महाद्वीप के लोगों में एक ऐसे जीन का पता चला है, जो

अन्य दुनिया के लोगों से भिन्न है। जिस कारण यह अनुमान व्यक्त किया गया है कि

शायद क्रमिक विकास के दौर में इंसानों की एक और प्रजाति भी अफ्रीकी महाद्वीप के

इलाकों में विकसित हुई थी। इस इलाके में हुए शोध के दौरान वहां के लोगों द्वारा आज भी

पानी के किसी विशाल सांप की पूजा किये जाने की विधि का पता चला है। स्थानीय

निवासियों की एक अलग आबादी आज भी इन प्रथाओं का पालन करती है। शोध दल ने

वहां की रीति रिवाज का सम्मान करते हुए खुदाई के बाद पूरे इलाके को पूर्ववत ही कर

दिया है ताकि किसी की धार्मिक मान्यताओं को कोई ठेस ना पहुंचे

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