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जल्द ही दामोदर नदी हो जायेगा पूरी तरह बालू विहीन

  • नदी में जगह जगह बन गए हैं जान लेवा गड्ढे

  • पिछले दिनों एक युवक की हो चुकी है मौत

  • जिला खनन विभाग का उदासीन रवैया

बेरमोः जल्द ही दामोदर नदी से बालू ही पूरी तरह गायब हो जाएगा। बालू के लीज की

समाप्ति के बाद किसी भी बालू घाट से बालू उठाव करना अवैध घोषित हो जाता है और

फिलवख्त दामोदर नदी के लगभग सभी बालू घाट इसी श्रेणी में आता है। मगर यहां कि

स्थिति देख कतई नहीं लगता कि बालू उठाव पर कोई प्रतिबंध है बल्कि लीज के समय

बालू उठाव से भी अधिक गति से इन दिनों 24 घंटे दामोदर नदी के अम्बाटोला घाट से

बालू का उठाव देखा जा रहा है और यह क्षेत्र कथारा ओपी अंतर्गत आता है। मगर इस पुरे

प्रकरण में जो बात सबसे चौकाने वाली है वह यह कि अवैध बालू कथारा रेलवे काॅलोनी के

बीच धनी आबादी से की जाती है जिससे कॉलोनी के बच्चो के साथ हादसा होने के खतरे

बढ़ गए हैं। किसकी मजाल जो इन बालू लदे ट्रेक्टरो की रोक टोक कर सके ये लोग मारपीट

पर आमादा हो जाते हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर किसके सह पर अवैध बालू उठाव

का खेल खुले आम चल रहा है जबकि यह देखने की जिम्मेवारी जिला खनन विभाग के

अधिन आता है मगर यह कह कर स्थानीय थाना पल्ला नही झाड़ सकता कि वे कुछ नहीं

कर सकते। उनके थाना क्षेत्र में होने वाले सभी अवैध गतिविधियों को रोकना स्थानीय

थाना कि जबाव देही होती है। बताता चलू कि अवैध रूप से बालू उठाव की होड़ में जल्द ही

बालू घाटो के इर्द गिर्द बड़े बड़े जान लेवा गड्ढे बन गए हैं जिसमे डुबकर पिछले दिनों एक

युवककी जान चली गई थी।

जल्द कार्रवाई करती रहती है पुलिस

इस संबंध में पूछे जाने पर संबंधित कथारा ओपी प्रभारी बबुआ नन्द भगत ने बताया कि

हमारी टीम लगातार अवैध बालू लदे ट्रेक्टरो को खदेड़ती रहती है पिछले दिनों ही हमने

बालू लदे ट्रेक्टर पकड़ कर थाने लाया मगर सूचना के बाद भी खनन विभाग का कोई भी

अधिकारी नही पहुचे जिसके बाद गोमिया सीओ द्वारा फाइन काट कर तथा जुर्माने की

वसुली कर ट्रेक्टर छोड़ा गया।कहा कि इस संबंध में अनेको बार उन्होने लिखी व मौखिक

खनन विभाग के अधिकारियों को जानकारी देने का काम किया है।

जिला खनन विभाग की चुप्पी और निष्क्रियता

जिला खनन विभाग के अधिकारियों के निष्क्रियता और उदासीन रवैया के कारण इस

अवैध धंधे को बल मिला है। एक अनुमान के अनुसार कथारा के अम्बाटोला व चांपी तथा

खेतको बालू घाट से 24 घंटो के भीतर हजारो ट्रेक्टर बालू अवैध रूप से निकाला जाता है

जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन लाखो लाख की रॉयल्टी का नुकसान होता है। जानकारो

की माने तो इस खेल में स्थानीय थाना के अलावे कई सफेद पोश लोग भी शामिल हैं

जिनमे छुटभाईया नेता, तथाकथित पत्रकार, क्षेत्र के दबंग लोग आदि को ये बालू के लुटेरे

नियमित रुपया पहुचाने का काम करते हैं। स्थित देख यह कहना गलत नहीं होगा कि एक

दुसरे पर दोषारोपन कर पुलिस और खनन विभाग बच नही सकते जवाबदेही तो दोनो की

बनती है इस अवैध कारोबार को रोकने की और राष्ट्रीय सम्पति की रक्षा करने की। ज्ञात

हो कि सैकड़ो की संख्या में इस कार्य में लगे ट्रेक्टर मालिकों को इस धंधे से सिधे मोटा

मुनाफा हो रहा है ना तो उसे किसी तरह का टैक्स देना है और ना ही नियम का पालन

करना है  बस दिन रात सरकारी सम्पति की लुट मे जुटे रहना है। अब सवाल उठता है कि

क्या विभाग और प्रशासन के बुते के बाहर हो गई है।

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