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किसी को कोरोना हो जाने का तो किसी को नौकरी जाने का डर, बच्चे भी हो रहे चिड़चिड़े




  • किसी को कोरोना को लेकर कई भ्रम भी है
  • प्रत्येक दिन लगभग 150 कॉल आते है मनोचिकित्सकों को

रांची : किसी को कोरोना हो जाने का भय तो किसी को नौकरी जाने की चिंता ने लोगों का

जीना दूभर कर दिया है, जिसका असर लोगों के घर, परिवार व बच्चों पर हो रहा है। बच्चों

को भी इन गतिविधियों से हो रही परेशानियों का सामना पिता के गुस्से के रूप में करना व

बंद कमरों में झेलना पड़ रहा है, जिसके कारण कई बच्चे भी घर बैठे चिड़चिड़े हो रहे है।

बता दें कि कोरोना के वर्तमान संकट व लॉकडाउन की स्थिति में चिंता और डर के कारण

लोग परेशान हैं। उनके अवसाद में जाने का भी खतरा है। लोगों में कोरोना को लेकर भ्रम

भी है। एसोसिएशन ऑफ साइकेट्रिक सोशल वर्क प्रोफेशनल द्वारा संचालित हेल्पलाइन

नंबर पर लगातार ऐसे लोगों के फोन आ रहे हैं। कई लोग अपने बच्चों के लगातार घर में

रहने के कारण उनके चिड़चिड़े होने की शिकायत करते हुए इसका समाधान भी मनोरोग

चिकित्सकों से पूछ रहे हैं। माइनिंग सरदार के रूप में काम करनेवाले एक व्यक्ति को यह

डर है कि खनन क्षेत्र में डस्ट होने से भी उन्हें कोरोना न हो जाए। एसोसिएशन की झारखंड

प्रभारी तथा रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो फिजिशियन एंड एलायड साइंसेज (रिनपास) की

चिकित्सक डॉक्टर मनीषा किरण कहती हैं कि कई लोगों को यह चिंता और डर जानकारी

के अभाव में भी है। उनके अनुसार, लॉकडाउन लागू होने के कारण लोगों का रूटीन बदल

गया है। उन्हें घरों में रहना पड़ रहा है। अब नए सेटअप में अपने आपको ढालना उनके

समक्ष बड़ी चुनौती है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में ही अपने आपको ढालकर, अपने

को लगातार रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखकर, आपस में अधिक से अधिक बातचीत कर

लोग इस स्थिति से बच सकते हैं। डॉक्टर मनीषा के अनुसार, अभी जो कॉल आ रहे हैं

उनमें अधिसंख्य कॉल कोरोना के डर को लेकर ही है। ऐसे में लोगों को सही जानकारी देकर

उनमें इस डर और भ्रम की समस्या को दूर करने की आवश्यकता है। डॉक्टर मनीषा

बताती हैं कि प्रत्येक दिन उनके पास 10 से 12 फोन आ रहे हैं। इसी तरह चार अन्य

चिकित्सकों को भी लोग कॉल कर अपनी समस्याओं का निदान ढूंढ रहे हैं।

किसी को डिप्रेशन की शिकायत, तो कोई चिंता में जी रहा

रांची के सनतन को यह चिंता सता रही है कि लगातार काम बंद रहने से उसकी नौकरी तो

नहीं छूट जाएगी। इधर, केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआइपी) द्वारा संचालित

हेल्पलाइन नंबर पर भी लगातार फोन आ रहे हैं। वहां तैनात चिकित्सक ने बताया कि

प्रत्येक दिन लगभग 150 कॉल उनके पास आ रहे हैं। अधिसंख्य लोगों की चिंता होती है

कि कोरोना से कैसे निपटा जाए। कई लोगों ने इस चिंता में रात में सो नहीं पाने तथा

डिप्रेशन में होने की शिकायतें की हैं। उनके अनुसार, सावधानी बरतने, पैनिक नहीं होने,

लगातार अभ्यास करने, मेडिटेशन आदि से इस समस्या का समाधान हो सकता है।



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